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Chaitra Navratri 2020: आखिर नवरात्रि में महिलाएं क्यों करती हैं 16 श्रृंगार ?

Sat, 28 Mar 2020 12:47 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नवरात्रि - फोटो : फाइल फोटो
शक्तिस्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। वैसे तो माता के भक्ति के लिए सब दिन समर्पित है लेकिन नवरात्रि में मां के पूजन का कुछ ज्यादा महत्व है। इतना ही नहीं नवरात्रि में मां दुर्गा का सोलह श्रृंगार का भी अपना एक खास महत्व है। आप घर में भी अपने बड़ों से व्रत, त्योहार पर श्रृंगार करने की सलाह देते हुए सुना होगा। लेकिन आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों किया जाता है?

इतना ही नहीं सोलह श्रृंगार का जिक्र ऋग्वेद में भी किया गया है। घर में सुख और समृद्धि लाने के लिए सोलह श्रृंगार किया जाता है। यह श्रृंगार सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बल्कि भाग्य को भी बढ़ाता है। मां दुर्गा को खुश करने के लिए महिलाएं नवरात्रि पर ये श्रृंगार करती हैं। आइए जानते हैं इस श्रृंगार के बारे में विस्तार से...
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navratri color - फोटो : फाइल फोटो
लाल रंग का जोड़ा
ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा को लाल रंग बहुत पसंद है। इसलिए माता को प्रसन्न करने के लिए कोशिश करें कि नवरात्रि में रोजाना लाल रंग के वस्त्र में पूजा करें।

बिंदी
बिंदी या कुमकुम को माथे पर लगाना पवित्र माना जाता है। सुहागिन स्त्रियों को कुमकुम या सिंदूर से अपने ललाट पर लाल बिंदी लगानी चाहिए। वैसे अब स्टीकर बिंदी का चलन है तो आप चाहें तो इसे भी लगा सकती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
मेहंदी
किसी भी सुहागन का श्रृंगार मेहंदी के बिना अधूरा लगता है। घर में यदि कोई भी शुभ काम होता है तो उस दौरान महिलाएं हाथों और पैरों मे मेहंदी रचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि नववधू के हाथों में मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है, उसका पति उसे उतना ही अधिक प्रेम करता है।

सिंदूर
सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सिंदूर लगाने से पति की आयु में वृद्धि होती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
गजरा
मां दुर्गा को मोगरे का गजरा बहुत प्रिय है। बालों को संवारने के साथ ही उनकी सुंदरता बढ़ाने के लिए गजरा लगाया जाता है। इसके लिए आप जूड़ा बनाकर उस पर गजरा लगा सकती हैं या फिर चोटी बनाकर भी इसे बालों के ऊपर बांध सकती हैं।

काजल
चेहरे की सबसे खूबसूरत चीज और मन का आइना होती हैं आपकी आंखें। जिनका श्रृंगार होता है काजल। इसे महिलाएं अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाती हैं। इसके अलावा काजल बुरी नजर से भी बचाए रखता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
मांग टीका
माथे के बीचों-बीच पहने जाने वाला यह आभूषण सिंदूर के साथ मिलकर हर लड़की की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। ऐसा माना जाता है कि नववधू को मांग टीका सिर के बीचों-बीच इसलिए पहनाया जाता है ताकि वह शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले।

चूड़ियां
चूड़ियां सुहाग का प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसा माना जात है कि सुहागिन स्त्रियों की कलाइयां चूड़ियों से भरी हानी चाहिए। चूड़ियों के रंगों का भी विशेष महत्व है। लाल रंग की चूड़ियां इस बात का प्रतीक होती हैं कि विवाह के बाद वह पूरी तरह खुश और संतुष्ट है। हरा रंग शादी के बाद उसके परिवार के समृद्धि का प्रतीक है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
नथ
सुहागिन स्त्रियों के लिए नाक में आभूषण पहनना अनिर्वाय माना जाता है। आम तौर पर स्त्रियां नाक में छोटी नोजपिन पहनती हैं, जिसे लौंग कहा जाता है।

बाजूबंद
कड़े के सामान आकृति वाला यह आभूषण सोने या चांदी का होता है। यह बाहों में पूरी तरह कसा जाता है। इसलिए इसे बाजूबंद कहा जाता है। पहले सुहागिन स्त्रियों को हमेशा बाजूबंद पहने रहना अनिवार्य माना जाता था। ऐसी मान्यता है कि स्त्रियों को बाजूबंद पहनने से परिवार के धन की रक्षा होती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
कानों में झुमके
कान में पहने जाने वाला यह आभूषण चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने का काम करता है। इसे पहनने से महिलाओं का चेहरा खिल उठता है। मान्यता है कि विवाह के बाद बहू को खासतौर से पति और ससुराल वालों की बुराई करने और सुनने से दूर रहना चाहिए।

अंगूठी
शादी के पहले मंगनी या सगाई के रस्म में वर-वधू द्वारा एक-दूसरे को अंगूठी को सदियों से पति-पत्नी के आपसी प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है। हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथ रामायण में भी इस बात का उल्लेख मिलता है। सीता का हरण करके रावण ने जब सीता को अशोक वाटिका में कैद कर रखा था तब भगवान श्रीराम ने हनुमानजी के माध्यम से सीता जी को अपना संदेश भेजा था। तब स्मृति चिन्ह के रूप में उन्होंनें अपनी अंगूठी हनुमान जी को दी थी।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
मंगल सूत्र
शादीशुदा महिला का सबसे खास और पवित्र गहना मंगल सूत्र माना जाता है। इसके काले मोती महिलाओं को बुरी नजर से बचाते हैं।

पायल
पैरों में पहने जाने वाले आभूषण हमेशा सिर्फ चांदी से ही बने होते हैं। हिंदू धर्म में सोना को पवित्र धातु का स्थान प्राप्त है, जिससे बने मुकुट देवी-देवता धारण करते हैं और ऐसी मान्यता है कि पैरों में सोना पहनने से धन की देवी-लक्ष्मी का अपमान होता है।
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navratri 2020 - फोटो : अमर उजाला
कमरबंद
कमरबंद कमर में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे स्त्रियां विवाह के बाद पहनती हैं, जिसमें नववधू चाबियों का गुच्छा अपनी कमर में लटकाकर रखती है। कमरबंद इस बात का प्रतीक है कि सुहागन अब अपने घर की स्वामिनी है।

बिछुआ
पैरों के अंगूठे और छोटी अंगुली को छोड़कर बीच की तीन अंगुलियों में चांदी का बिछुआ पहना जाता है। शादी में फेरों के वक्त लड़की जब सिलबट्टे पर पैर रखती है, तो उसकी भाभी उसके पैरों में बिछुआ पहनाती है। यह रस्म इस बात का प्रतीक है कि दुल्हन शादी के बाद आने वाली सभी समस्याओं का हिम्मत के साथ मुकाबला करेगी।
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