वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया। आजाद भारत का बजट इतिहास तकरीबन 70 साल पुराना है। स्वतंत्र भारत में देश के विशाल बजट को पेश करने वाले नेता, राजनेता और मंत्री अक्सर चर्चा में बने रहे। किसी का बजट पेश करने का अंदाज अनोखा था तो कोई अपने स्टाइलिश अंदाज के लिए फेमस रहा। इसी लिस्ट में भारत की इकलौती महिला फाइनेंस मिनिस्टर इंदिरा गांधी का भी नाम शामिल हैं। इंदिरा गांधी को खूबसूरत साड़ियां पहनने का बेहद शौक था।आइए जानते हैं उनके इस शौक के बारे में।
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indira gandhi
इंदिरा गांधी देश की पहेली महिला प्रधानंमत्री और वित्तमंत्री जितनी राजनीति में सक्रिय थी उतने ही निजी जीवन में उनके शौक और रुचियों को लेकर भी वे चर्चा में रहती थीं। स्पैनिश राइटर जेवियर मोरो की लिखी हुई सोनिया गांधी की जीवनी रेड साड़ी के मुताबिक इंदिरा गांधी बतौर पीएम जब भी दौरे पर जाती थीं तो उनके पास एक से बढ़कर एक साड़ियां पहनने को होती थीं। उनके कलेक्शन में भी उन्हें उपहार में मिली और बांग्लादेश से लेकर अलग-अलग जगहों से मिली साड़ियाों का जिक्र है। ऐसे ही पत्रकार सागरिका घोष की किताब 'Indira: India’s Most Powerful Prime Minister' में भी इंदिरा के साड़ियों को पहचानने के अद्भूत हुनर का जिक्र है।
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इंदिरा गांधी
- फोटो : self
इंदिरा गांधी को अपने ननिहाल जयपुर की बगरू प्रिंट वाली साड़ियां पहनना बेहद पसंद था।इंदिरा अपनी हर राजस्थान यात्रा के दौरान बगरू प्रिंट वाली साड़ी पहनना कभी नहीं भूलती थीं। आइए जानते हैं आखिर इस साड़ी में ऐसा क्या था खास।
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इंदिरा गांघी
जयपुर शहर से दक्षिण-पश्चिम दिशा में अजमेर रोड पर लगभग 30 किमी की दूरी पर एक कस्बा है-बगरू। यह कस्बा आकार में भले छोटा है, लेकिन अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं की जड़ों को आज भी बगरूवासी अपने खून पसीने से सींचते हैं। हाथ से कपड़े पर की जाने वाली ब्लॉक प्रिंटिंग ने बगरू को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
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इंदिरा गांधी
बगरू प्रिंट का इतिहास लगभग पांच सदियों पुराना माना जाता है।बगरू प्रिंट की सबसे बड़ी विशेषता है डाईंग में इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक रंग। इन रंगों में केमिकल का एक छींटा भी इस्तेमाल नहीं होता। बगरू प्रिंट में मुख्यत: लाल, काला और भूरा रंग प्रयुक्त होता है। इन रंगों का निर्माण भी ठेठ देसी और प्राकृतिक तरीके से किया जाता है। लाल रंग फिटकरी और आल की लकड़ी से, काला रंग घोड़े की नाल को गुड़ के साथ पानी में भिगोकर तथा भूरा रंग थोथा खनिज और लाल रंग को मिलाकर तैयार किया जाता है।
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Priyanka Gandhi- Indira Gandhi
कपड़े को अतिरिक्त और अनावश्यक प्रिंटिंग से बचाने के लिए दाबू तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाता है। दाबू एक प्रकार का पेस्ट है जो घुन लगे गेहूं के पाउडर, चूना, गोंद और काली मिट्टी को गूंथकर तैयार किया जाता है। इस पेस्ट का लेप करने पर ब्लॉक से की जाने वाली प्रिंट कपड़े पर उन जगह नहीं उतरती जिस जगह को डिजाइन के लिए कारीगर खाली छोड़ना चाहते हैं।
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- फोटो : Amar Ujala
कपड़े पर छपाई का काम परंपरागत ढंग से लकड़ी के स्टैम्पनुमा औजारों से किया जाता है जिन्हें ब्लॉक कहते हैं। इन ब्लॉक के निचले भाग पर कलात्मक डिजाइनें उत्कीर्ण होती हैं। इन डिजाईनों की पहचान कैर, आम, अनार, नरगिर, चकरी, साथिया, सूरज और पतासा बूटी आदि अनेक नामों से की जाती है।
वस्त्रों पर इन ब्लॉक से प्रिंट मुद्रित करने का कार्य कारखानों में किया जाता है। इन कारखानों में सफेद कपड़े को हरड़ या हल्दी के पानी में घंटों भिगोकर बैकग्राउण्ड फेब्रिक तैयार किया जाता है। इसके बाद सुखाकर इस्त्री कर साढ़े पांच से छह मीटर लम्बी टेबल पर बिछाया जाता है।