इस बार होली में केमिकल रंगों की बजाय हर्बल व नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करके देखें। इन रंगों से होने वाले साइड इफेक्ट से बालों, त्वचा आदि को बचाया जा सकता है।
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रासायनिक रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें, क्योंकि इन्हें आपकी सेहत को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। त्वचा संवेदनशील है, तो केमिकल रंगों से बचें।
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हर्बल और प्राकृतिक रंग स्किन फ्रेंडली होते हैं। त्वचा को कोमल बनाते हैं। इन्हें साफ करना भी आसान है, जिससे त्वचा पर जलन, रैशेज, फोड़े-फुंसियां नहीं होती हैं।
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हर्बल रंग फूलों के सत्त से तैयार होते हैं, जबकि केमिकल रंग टॉक्सिक होते हैं। इनसे त्वचा व स्कैल्प से संबंधित समस्याएं जैसे कॉनटैक्ट डर्मटाइटिस हो सकता है।
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रासायनिक कलर्स से बालों के गिरने और रूसी की समस्या हो जाती है, जबकि हर्बल और नेचुरल रंगों से ऐसा कुछ नहीं होता। इनसे आंखें भी सुरक्षित रहती हैं।
सूखे गुलाल में सिलिका, सीसा आदि होते हैं, जो सांस में प्रवेश कर जाए, तो अस्थमा से ग्रस्त लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में नेचुरल व हर्बल रंग का प्रयोग करें।