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सौंदर्य उत्पाद से जुड़ी इन अनूठी बातों को जानती हैं आप, इस देश से पूरी दुनिया में छाया मेकअप का दीवानापन

Mon, 07 Jun 2021 10:05 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Cleopatra - फोटो : Social Media
आजकल मेकअप करना ज्यादातर लड़कियों को पसंद होता है। काजल से लेकर मस्कारा, आईशैडो, ब्लशर और लिपस्टिक तक हर किसी के मेकअप किट में शामिल होते हैं। अगर आपको लगता है कि केवल आधुनिक जमाने में ही इस तरह से मेकअप का चलन है तो आप पूरी तरह से गलत हैं। मेकअप करने का ये चलन कई सौ साल पुराना है। आज मेकअप का बाजार कई अरब डॉलर का हो चुका है। जिसमे केमिकल से लेकर हर्बल तकनीक से बने उत्पाद शामिल हैं। लेकिन जानकर आश्चर्य होगा कि प्राचीन मिस्त्र में पुरुष और महिलाओं को आईलाइनर, आईशैडो, लिपस्टिक और रूज लगाए हुए देखा गया है। वैसे तो प्राचीन मिस्त्र के कई सारे रहस्य है। लेकिन उनका सौंदर्य से जुड़ा प्यार अब रहस्य नहीं रह गया है। प्राचीन मिस्त्र के लोग मेकअप का इस्तेमाल सिर्फ सुंदरता को बढ़ाने के लिए नहीं करते बल्कि उनमें ये रिवाज के तौर पर देखा जाता है। इसके अलावा ये लोग अपनी सुंदरता दिनचर्या को बेहद गंभीरता से लेते हैं। सबसे परिष्कृत सौंदर्य अनुष्ठान मिस्त्र की अमीर महिलाओं के शौचालय से ही सामने आए हैं। 
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Cleopatra - फोटो : Social Media
मध्य साम्राज्य (2030-1650 ई.पू.) के दौरान रहने वाली महिलाएं कोई भी मेकअप लगाने से पहले उसके लिए अपनी स्किन को तैयार किया करती थी। वे त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए दूध में डेड सी साल्ट मिलाकर स्नान किया करती थी। इसके अलावा चेहरे पर दूध और शहद का मास्क सबसे लोकप्रिय उपचार था। 
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cleopatra
वे अपने अंडरआर्म्स में डियोड्रेंट की जगह अगरबत्ती का इस्तेमाल किया करती थी। अपनी त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए फूलों और मसालों से निकाले गए तेल को लगाया करती थी। इन्होंने ही शहद और चीनी के मिश्रण से वैक्सिंग करने की तरकीब का आविष्कार किया था। आज जिसे ब्यूटी कंपनी हॉट वैक्स के नाम से बेचा करती हैं। इस सब के बाद मेकअप से जुड़ी सभी सामग्रियों को रखने के लिए जिन जार का इस्तेमाल किया जाता था वो अपने आप में काफी लेविश हुआ करते थे। परफ्यूम से लेकर आई पेंट को रखने के लिए कीमती पत्थर, कांच और सोने का इस्तेमाल कर जार बनाए जाते थे। कोहल और आईशैडो को तैयार करने के लिए सिल्टस्टोन पैलेट को क्रश किया जाता था।

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cleopatra - फोटो : social media
आईशैडो को तैयार करने के लिए पशुओं की चर्बी या वनस्पति तेलों के साथ मैलाकाइट पाउडर मिलाया जाता था। उस समय रेगिस्तान की तेज धूप से आंखों की रक्षा करने के लिए महिला और पुरुष दोनों कोहल का इस्तेमाल किया करते थे। इसके अलावा इसे बुरी नजर का कवच भी माना जाता है। इसके अलावा आंखो में इस्तेमाल करने वाले कोहल को सीसा आधारित खनिज से बनाया जाता है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं। 
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lipstick
मेकअप के आखिर में फाइनल टच के लिए लाल लिपस्टिक का इस्तेमाल किया जाता था, जो आज भी क्लासिक लुक माना जाता है। इसे बनाने के लिए गेरू को पशु वसा या वनस्पति तेल में मिलाया जाता था। हालांकि मिस्त्र की रानी क्लियोपेट्रा परफेक्ट रेड लिपस्टिक शेड के लिए बीटल को कुचला करती थी।
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