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Zakir Hussain Death: हमेशा तबला गोद में रख सफर करते थे उस्ताद जाकिर हुसैन, सुर-ताल के साथ श्लोक-मंत्र भी सीखे

Mon, 16 Dec 2024 07:15 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Zakir Hussain Death: तबला वादक जाकिर हुसैन का आज 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जिस संगीतकार जाकिर के तबले के सुर को सुन लोग मदहोश हो जाते थे और कहते थे 'वाह उस्ताद', जानिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें...
 
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तबला वादक जाकिर हुसैन का निधन - फोटो : अमर उजाला
तबला वादक जाकिर हुसैन का आज निधन हो गया। संगीतकार उस्ताद जाकिर हुसैन को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने 73 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके प्रशंसकों और सितारों के बीच गम का माहौल है। जब जाकिर हुसैन अपनी उंगलियों और हाथ की थाप से तबला बजाते थे तो संसार को मंत्रमुग्ध कर देते थे। चलिए आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें....
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तबला वादक जाकिर हुसैन - फोटो : एक्स
जाकिर का पहला एल्बम
जाकिर के तबले के सुर को सुन लोग मदहोश हो जाते थे और कहते थे 'वाह उस्ताद'। जाकिर ने देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी कला का परचम लहराया। जीवन में इतनी प्रसिद्धि पाने के बाद भी उस्ताद को सादगी से रहना पसंद था और वह अक्सर जमीन से जुड़े रहते थे। उन्होंने अपने जीवन में कई संघर्षों के बाद यह मुकाम पाया था। जाकिर हुसैन का जन्म नौ मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। वह तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के बेटे थे। जाकिर को तबला बजाने का यह हुनर अपने पिता से विरासत में मिला था। उन्होंने बचपन से ही पूरी लगन के साथ वाद्य बजाना सीखा। महज तीन साल की उम्र में ही उन्होंने पखावज बजाना सीख लिया था। यह कला उनके पिता ने उन्हें सिखाई थी। श्लोक और मंत्र भी सीखे थे। उन्होंने महज 11 साल की उम्र में ही अमेरिका में अपना पहला कॉन्सर्ट किया था। इसके बाद साल 1973 में अपना पहला एल्बम 'लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड' लॉन्च किया।
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तबला वादक जाकिर हुसैन - फोटो : एक्स
जाकिर के तबला वादन का सफर
बहुत कम उम्र में ही जाकिर ने तबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। इसके बाद उन्होंने 11-12 साल की उम्र में तबला वादन का सफर शुरू कर दिया था। वह जगह-जगह अपने कॉन्सर्ट के लिए यात्रा करते थे। अपने तबले को सरस्वती मान उन्होंने उसकी हिफाजत और इबादत में कोई कमी नहीं छोड़ी। जाकिर ने बताया था कि जब वह यात्रा करते थे तो उनके पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वह आरक्षित कोच में यात्रा कर सकें। इस वजह से वह ट्रेन की भीड़ वाली कोच में चढ़ जाते थे।

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तबला वादक जाकिर हुसैन - फोटो : एक्स
अपनी गोद में रखते थे तबला
ट्रेन में बैठने के लिए उस्ताद के पास आरक्षित सीट नहीं होती थी, इसलिए वह अखबार बिछाकर नीचे बैठ जाते थे। तबले पर किसी का पैर या जूता ना लगे, इसलिए वह उसे अपनी गोद में रख लेते थे। जब तक उनका सफर जारी रहता था, वह तबले को एक बच्चे की तरह गोद में उठाए रखते थे। संगीत यात्रा के दौरान पैसे के अभाव के कारण वह अपने परिवार से भी मिलने नहीं जा पाते थे। लगातार संघर्षों के बाद जब उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, तब वह अपनी संगीत यात्रा में से समय निकालकर परिवार से मिलने जाने लगे।
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अपनी पत्नी एंटोनिया मिनीकोला के साथ जाकिर हुसैन - फोटो : एक्स
ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजे गए जाकिर हुसैन
तमाम कठिनाइयों भरे रास्ते को पार करने के बाद उन्होंने दुनिया भर के लोगों के दिल में जगह बनाई। जब भी वह तबला बजाते थे तो लोग अपनी सुध बुध खो बैठते थे और एक नई दुनिया के सफर का आनंद लेते थे। भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास में उस्ताद का महान योगदान रहा है। साल 1988 में पद्मश्री और साल 2002 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2009 में उन्हें संगीत के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
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