तबला वादक जाकिर हुसैन
- फोटो : एक्स
अपनी गोद में रखते थे तबला
ट्रेन में बैठने के लिए उस्ताद के पास आरक्षित सीट नहीं होती थी, इसलिए वह अखबार बिछाकर नीचे बैठ जाते थे। तबले पर किसी का पैर या जूता ना लगे, इसलिए वह उसे अपनी गोद में रख लेते थे। जब तक उनका सफर जारी रहता था, वह तबले को एक बच्चे की तरह गोद में उठाए रखते थे। संगीत यात्रा के दौरान पैसे के अभाव के कारण वह अपने परिवार से भी मिलने नहीं जा पाते थे। लगातार संघर्षों के बाद जब उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, तब वह अपनी संगीत यात्रा में से समय निकालकर परिवार से मिलने जाने लगे।