रे
- फोटो : Netflix
रे
फिल्ममेकर सत्यजीत रे के काम को ट्रिब्यूट देने का इससे अच्छा तरीका कुछ और हो ही नहीं सकता। निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी, अभिषेक चौबे, वसन बाला ने चार शॉर्ट कहानियों, स्पॉटलाइट, बहुरूपी, बिपिन चौधरी स्मृतिभ्रम और बरीन भौमिक की बीमारी को स्क्रीन पर लाने की जिम्मेदारी उठाई है। इन सभी फिल्मों में हर चीज जो खुद को एक-दूसरे से जोड़ती हैं वो है खुद की पहचान को तलाशना। 'रे' एक एंथोलॉजी है जिनमें ऐसे पुरुष पात्रों को बुना गया है, जो मुखौटे के पीछे हैं। संपूर्णता को पाने की कोशिश के बीच यहां अहंकार, ईष्या, विश्वासघात से जूझते नायक हैं।