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Nature Conservation Day: इन 6 सीरीज में देखिए कुदरत का अद्भुत करिश्मा, यही है धरती को बचाने का वक्त

Wed, 28 Jul 2021 10:55 AM IST
तान्या अरोड़ा अमर उजाला ब्यूरो
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वर्ल्ड नेचर कन्वर्सेशन डे - फोटो : अमर उजाला मुंबई
जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और कार्बन फुटप्रिंट ये कुछ शब्द युग्म इन दिनों बहुत सुनाई देते हैं। लेकिन, अब भी तमाम लोग ऐसे हैं, जिन्हें इस बात का इल्म ही नहीं है कि वह धरती को धीरे धीरे खत्म कर रहे हैं। अगर आपकी उम्र 50 साल या उससे अधिक है तो आपने अपने जीवन में ही देखा होगा कि बीते पांच दशक में आपके आसपास का वातावरण क्या से क्या हो गया है। कोरोना संक्रमण काल में लोगों की चहलकदमी कम हुई तो शहरों में आसमान बरसों बाद नीला दिखा। हवा की गुणवत्ता बढ़ी और पहाडों पर भी प्रदूषण थोड़ा कम हुआ। लेकिन, अनलॉक होते ही फिर सब पहले जैसी ही आपाधापी में है। 28 जुलाई को इसीलिए हर साल विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है। अगर आप ओटीटी के शौकीन हैं तो आपने डेविड एटनबरो का नाम जरूर सुना होगा। 95 साल के हो चुके डेविन अब भी धरती को बचाने के लिए जी जान से जुटे रहते हैं। इस खास मौके पर चलिए आपको बताते हैं उन नायाब नगीनों के बारे में जिन्हें आप घर बैठे ओटीटी देख सकते हैं।

अवर प्लैनेट

एमी पुरस्कार से सम्मानित इस अभूतपूर्व डॉक्यूमेंटरी सीरीज़ में कुल आठ भाग हैं। इसमें  डेविड एटनबरो की विस्मयकारी आवाज के साथ आप धरती घूम सकते हैं। चार साल में 50 अलग अलग देशों में घूमकर फिल्माई गई ये डॉक्यूमेंटरी दुनिया भर की जैव विविधता पर केंद्रित है। इस सीरीज को देखकर आपको पता चलेगा कि हमारे आसपास की धरती कैसी है और सात समंदर पार की धरती पर क्या आफत आ चुकी है?
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नाइट ऑन अर्थ - फोटो : अमर उजाला मुंबई
नाट ऑन अर्थ

50 साल के या उससे ऊपर के लोगों से पूछिए कि उनके बचपन का आकाश कैसा था। वे आपको बताएंगे कि रात को सोते समय आसमान में आकाश गंगा भी दिखती थी और सप्तऋषि मंडल भी साफ चमकता नजर आता था। लेकिन, हमने धरती और आकाश के बीच में इतना प्रदूषण भर दिया है कि अब कुछ गांवो में साफ नजर नहीं आता। लेकिन, इस सीरीज में कुदरती की रात की हलचलें थर्मल इमेजिंग, नाइट-विज़न गॉगल्स, इंफ्रारेड लाइट, और ऐसी कई तकनीकों को मिलाकर फिल्माई गई हैं। सूरज के ढलने के बाद जंगलों में होने वाली कई गतिविधियों को इसमें दिखाया गया है।
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अ लाइफ ऑन अवर प्लैनेट - फोटो : अमर उजाला मुंबई
अ लाइफ ऑन अवर प्लैनेट

डेविड एटनबरो ने अपने 95 साल के जीवन में इस ग्रह को जितना देखा है उतना शायद ही किसी ने देखा होगा। पृथ्वी पर मानव जाति के प्रभाव का ईमानदार और प्रभावकारी चित्र हम इसमें देखते हैं।

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चेसिंग कोरल - फोटो : अमर उजाला मुंबई
चेसिंग कोरल

2017 में जारी की गई ये डॉक्यूमेंटरी वैज्ञानिकों, गोताखोरों और फोटोग्राफरों की एक टीम के बारे में है जिन्होंने प्रवाल भित्तियों पर प्रदूषण के प्रभावों की जांच की है। जलवायु परिवर्तन के कारण यह शक्तिशाली चट्टानें भी संभावित रूप से गायब हो सकती हैं यह इस डॉक्यूमेंट्री में दर्शाया गया है।
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ब्रेकिंग बाउंड्रीज : द साइंस ऑफ अवर प्लेनेट - फोटो : अमर उजाला मुंबई
ब्रेकिंग बाउंड्रीज: द साइंस ऑफ अवर प्लेनेट

पृथ्वी पर मौजूद जैव विविधता के नाज़ुक संतुलन को दिखाते हुए यह डॉक्यूमेंट्री हमारी आंखे खोल देती है। पृथ्वी की रक्षा के लिए हम कौन से छोटे-छोटे कदम उठा सकते हैं उसके बारे में विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी भी इसमें शामिल है।
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माय ऑक्टोपस टीचर - फोटो : अमर उजाला मुंबई
माय ऑक्टोपस टीचर

सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री (फीचर) के लिए अकादमी पुरस्कार जीतने वाली यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता और एक ऑक्टोपस के बीच के बंधन के बारे में है। इसमें मानव और प्रकृति के बीच की दोस्ती को खूबसूरती से दर्शाया गया है, साथ ही वे एक दूसरे से कैसे सीख सकते हैं इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है।    

 
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