नाइट ऑन अर्थ
- फोटो : अमर उजाला मुंबई
नाइट ऑन अर्थ
50 साल के या उससे ऊपर के लोगों से पूछिए कि उनके बचपन का आकाश कैसा था। वे आपको बताएंगे कि रात को सोते समय आसमान में आकाश गंगा भी दिखती थी और सप्तऋषि मंडल भी साफ चमकता नजर आता था। लेकिन, हमने धरती और आकाश के बीच में इतना प्रदूषण भर दिया है कि अब कुछ गांवो में साफ नजर नहीं आता। लेकिन, इस सीरीज में कुदरती की रात की हलचलें थर्मल इमेजिंग, नाइट-विज़न गॉगल्स, इंफ्रारेड लाइट, और ऐसी कई तकनीकों को मिलाकर फिल्माई गई हैं। सूरज के ढलने के बाद जंगलों में होने वाली कई गतिविधियों को इसमें दिखाया गया है।