चुड़ैल्स
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सीरीज की बात करें तो एक डिटेक्टिव एजेंसी से शुरु हुई चुड़ैल्स की कहानी आपको एक गहरे काले सफर पर ले जाती है जहां बलात्कार, ड्रग्स, कत्ल,फरेब, तस्करी सब कुछ है - एक ऐसी दुनिया जिसका सामना करने की इन चुड़ैलों ने सोची तो नहीं थी लेकिन जब सामना हुआ तो प्यार, तकरार, गोलियां, गालियां सब तरह के हथकंड़ों से सामना किया। कानून से न्याय मांगने के लिए जब ये कानून के दायरे से बाहर जाती हैं तो इन चुड़ैलों का तर्क आप काट नहीं पाते, "चाहते तो यही थे कि सब कुछ कानून के दायरे में हो मगर क्या है कि किताब खोली तो समझ में आया कि कानून भी लिखा तो मर्दों ने ही है। तो हमने सोचा कि हम इसे दोबारा लिखेंगे अपने कायदे और अपने कानून। समझो साला दायरा ही फाड़ दिया।" ये कहानी औरतों के बारे में जरूर है और उन मर्दों के बारे में भी जो औरतों की जिंदगी को नरक बनाते हैं लेकिन ये सीरीज मर्दों को सिर्फ वन-डाइमेंशनल नजरिए से नहीं दिखाती। 'कातिल' बतूल को जो शायद सबसे ज्यादा समझने लगता है और उसका साथ देता है वो है थाने का पुलिस इंस्पेक्टर । जुबैदा के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़ा रहने वाला उसका बॉयफ्रेंड शम्स। ये लोग मर्दानगी का मेडल लिए नहीं घूमते, किसी 'अल्फा मेल' की तरह। वहीं इन चुड़ैलों की जिंदगी में ऐसे मर्द भी हैं जो फेमिनिस्ट होने का नकाब पहने घूमते हैं।