बम्फाड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तो आप थिएटर लंदन में पढ़े, राइटिंग में अमेरिका में कढ़े और अब जाकर अभिनय के पेड़ पर फिल्म बम्फाड़ में चढ़े हैं, काफी तैयारी की है आपने मैदान में उतरने से पहले?
(हंसते हुए) जी बिल्कुल। इंसान जितनी तैयारी के साथ मैदान में उतर सके, उतना बेहतर है। मैंने लंदन में छह महीने की पढ़ाई फिजिकल थिएटर में की। लंदन इंटरनेशनल स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स में जो फिजिकल थिएटर होता है, प्रयोगात्मक थिएटर होता है। फिर मैंने एनवाईयू से एमएफए किया ड्रामेटिक राइटिंग में। जो होता है फिल्म राइटिंग, स्क्रीन राइटिंग और टीवी राइटिंग में। आपने जो मैदान में उतरने की बात कही, वह एकदम सही है। हम टीवी के सामने बैठकर बोल देते हैं कि ये खिलाड़ी भी आउट हो गया। या हममें से कोई क्रिकेट में पहुंच गया तो बोल देते हैं कि यार ये कैसे पहुंच गया। लेकिन लोग ये नहीं जानते कि उसने अपने मोहल्ले के मैदान में या रणजी ट्रॉफी में कितने सौ और दो सौ रन बनाए होंगे तब जाकर कहीं इसका नंबर आ रहा है।