विक्रांत मैसी रिद्धि डोगरा और राशि खन्ना की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म का प्रशंसक बड़ी ही बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे थे। हालांकि, अब आने वाले दिनों में देखना है कि फिल्म कितनी कमाई करती है। अब हाल ही में, विक्रांत मैसी ने तापसी के कमेंट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
गोधरा कांड की दर्दनाक घटना बनी फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ बॉक्स ऑफिस पर अपनी बोहनी ही नहीं ठीक कर पाई। विक्रांत मैसी रिद्धि डोगरा और राशि खन्ना की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म का प्रशंसक बड़ी ही बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे थे। हालांकि, अब आने वाले दिनों में देखना है कि फिल्म कितनी कमाई करती है। अब हाल ही में, विक्रांत मैसी ने तापसी के कमेंट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
विज्ञापन
2 of 5
विक्रांत मैसी
- फोटो : एक्स
विक्रांत मैसी ने दी प्रतिक्रिया
अभिनेता विक्रांत मैसी ने आखिरकार तापसी पन्नू की उस कमेंट पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने हसीन दिलरुबा में मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता के महत्व को कमतर बताया था । एनडीटीवी के साथ एक साक्षात्कार में, अभिनेता ने अपने सह-कलाकार की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि वह इस तरह की राय को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
विज्ञापन
3 of 5
विक्रांत मैसी
- फोटो : इंस्टाग्राम @ektarkapoor
अभिनेता बोले ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है
विक्रांत से उनकी हिट फिल्म 12वीं फेल के बारे में पूछा गया और इस फिल्म में किसी बड़े स्टार के न होने के बारे में चर्चा की गई। सवाल में उन्हें 'हसीन दिलरूबा' के बारे में तापसी पन्नू की टिप्पणी भी याद दिलाई गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि फिल्म में हीरो कौन है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
4 of 5
विक्रांत मैसी
- फोटो : इंस्टाग्राम @ektarkapoor
अभिनेता को नहीं लगा बुरा
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रांत ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो मैं इन बातों पर बुरा नहीं मानता। यह सच है कि 12वीं फेल में कोई बड़ा स्टार नहीं था।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने अभिनय के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, लेकिन इसका बॉक्स-ऑफिस पर कोई असर नहीं हुआ।
बयान नहीं हैं अपमानजनक
उन्होंने कहा, "12वीं फेल से पहले मेरी कोई मजबूत सोलो फिल्म भी सिनेमाघरों में नहीं आई थी। इसलिए, मैं समझता हूं कि इस तरह के बयान किसी भी तरह से अपमानजनक नहीं थे। हमें स्वस्थ रूप से असहमत होने के लिए सहमत होना चाहिए। दुर्भाग्य से, सोशल मीडिया और जीवन में, हम देख रहे हैं कि कैसे अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के कारण दोस्ती टूट रही है। ऐसा लगता है कि आप अब असहमत होने के लिए सहमत नहीं हो सकते। यह परेशान करने वाला है।"