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Raksha Bandhan Special: कोई बना दोस्त, किसी की ताकत है भाई; सेलेब्स ने साझा की रक्षाबंधन से जुड़ी प्यारी यादें

सार

Celebs Celebrate Raksha Bandhan: रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, एक खास अहसास है। ये वो दिन है, जब भाई-बहन बचपन की यादों को फिर से जीते हैं, हंसी-मजाक करते हैं। ताउम्र साथ देने का वादा करते हैं। इस खास मौके पर कुछ जाने-माने कलाकारों ने अमर उजाला से अपनी सबसे प्यारी राखी की यादें साझा की हैं।

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सेलेब्स ने साझा की रक्षाबंधन से जुड़ी प्यारी यादें - फोटो : इंस्टाग्राम

आज रक्षाबंधन है, आम से लेकर खास लोग तक इस त्योहार को मना रहे हैं। कई सेलेब्स भी इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। वह अपने भाई-बहनों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाकर, बचपन की पुरानी और खूबसूरत यादों को फिर से जीते हैं। कुछ सेलेब्स रक्षाबंधन के इस खास मौके पर ऐसी ही प्यारी यादों को अमर उजाला डिजिटल के साथ अपनी जुबानी साझा कर रहे हैं। 

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कृतिका कामरा - फोटो : इंस्टाग्राम

कृतिका कामरा: भाई छोटा है, गिफ्ट मैं देती हूं और वह सिर्फ हंस देता है
मैं कई साल से अपने भाई के साथ मुंबई में रही हूं। हमने रक्षाबंधन हमेशा साथ में मनाया है। अब उसकी शादी हो गई है, तो वह मेरे साथ नहीं रहता लेकिन राखी पर घर आता है। इस तरह यह दिन और भी खास हो जाता है। भाभी को जो क्यूट सी लटकन वाली राखियां मिलती हैं, वह मुझे बहुत पसंद हैं, इसीलिए इस बार मैं सेम कलर की राखियां दोनों के लिए लेकर आई हूं। हम बहुत ज्यादा ट्रेडिशनल नहीं हैं, लेकिन रक्षाबंधन के रिचुअल्स मजेदार होते हैं। हंसी-मजाक, अच्छा खाना और भाई के साथ वक्त गुजारना। बचपन में तो मैं और भाई मां के साथ खुद राखियां बनाते थे, ये बातें अब बस यादें बन गई हैं। भाई मुझसे छोटा है, गिफ्ट मैं देती हूं और वह सिर्फ हंस देता है।

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रजनीश दुग्गल - फोटो : इंस्टाग्राम

रजनीश दुग्गल: सगी बहन नहीं, फिर भी राखियों से भरी रहती थी कलाईयां
रक्षाबंधन का त्योहार मेरे लिए बचपन की उन सुनहरी यादों की तरह है, जब पूरा परिवार दादी या चाची के घर इकट्ठा होता था। पांचों बुआएं, उनके बच्चे, घर और बगीचे में बच्चों की भाग-दौड़, हंसी और शरारत से पूरा माहौल खुशी से भर जाता था। मेरी सगी बहन नहीं थी लेकिन कजिन बहनों की राखियों से मेरी और भाई की कलाईयां भरी होती थीं। अब सभी अलग-अलग शहरों में हैं, तो ज्यादातर राखियां कुरियर से आती हैं। मुंबई वाली बहन सबकी राखियां मेरे हाथ पर बांधती है और गिफ्ट सिर्फ उसी को मिलता है। अब भी बहनों की तरफ से प्यारे सरप्राइज गिफ्ट्स आते हैं और मैं भी मनी एनवेलप्स देता हूं। 

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निमृत कौर अहलूवालिया - फोटो : इंस्टाग्राम

निमृत कौर अहलूवालिया: मीलों की दूरी, लेकिन दिल का रिश्ता अटूट है
मुझे हमेशा लगता है जैसे मैं अपने भाई की दूसरी मां हूं। उसके साथ से एक सिक्योरिटी की फीलिंग मिलती है। कुछ साल से हम लॉन्ग डिस्टेंस राखी मना रहे हैं, वह अमेरिका में है और मैं मुंबई में। फिर भी हम जूम वीडियो कॉल पर मिलते हैं, बातें करते हैं। यही पल मेरे लिए सबसे बड़ा गिफ्ट होता है। भाई के साथ बचपन की बहुत सारी यादें मेरे मन में बसी हुई हैं। वाटर टैंक को पूल समझकर खेलना, जामुन के पेड़ पर चढ़ना, यह बातें आज भी मन को सुकून देती हैं। भाई से मेरी डिमांड हर बार क्लियर होती है, डॉलर या नया फोन। लेकिन सबसे अनमोल तोहफा है, यह भरोसा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह सब छोड़कर वह मेरे पास आ जाएगा। 

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हरलीन सेठी - फोटो : इंस्टाग्राम

हरलीन सेठी: ओवरप्रोटेक्टिव भाई अब मेरा सबसे मजबूत सहारा है
राखी हमेशा हमारे लिए एक फैमिली गेट-टुगेदर की तरह रही है। बचपन में नानी के घर सारे मामा-मौसी, चाचा-बुआ, कजिन्स इकट्ठा होते थे। वह चहल-पहल, एकसाथ बैठकर राखी बांधना आज भी दिल में बसा है। मेरा भाई करण मुझसे बस एक साल छोटा है, लेकिन हमेशा मुझे ऐसे प्रोटेक्ट करता है जैसे वह मेरा बड़ा भाई हो। जब जिंदगी में कुछ भी क्लियर नहीं होता, जब दिल टूटा हो या करियर में चुनौती हो, मेरा भाई करण हमेशा साथ खड़ा होता है। पहले उसके ओवरप्रोटेक्टिव नेचर पर गुस्सा आता था, अब समझती हूं, यही उसका प्यार है। 

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अदिवि शेष - फोटो : इंस्टाग्राम

अदिवि शेष: अब मैं सिर्फ बड़ा भाई नहीं, सबसे भरोसेमंद दोस्त भी हूं
जब हम छोटे थे, मां-पापा मुझे पैसे देते थे कि बहन को गिफ्ट दे सकूं। आज वह अमेरिका में डॉक्टर है, अपनी जिंदगी खुद बना चुकी है। अब तोहफों की कीमत उनकी कीमत में नहीं, फीलिंग में होती है। राखी सिर्फ रस्म नहीं, एक ऐसा अहसास है जो हमें जोड़ता है। अब मैं सिर्फ उसका बड़ा भाई नहीं, उसका सबसे भरोसेमंद दोस्त भी हूं। जब भी मैं किसी परेशानी में होता हूं, सबसे पहले उसी को कॉल करता हूं। जब उसे मेरी जरूरत होती है, वह बिना कहे मेरे पास होती है। यही रक्षाबंधन है, हर साल मजबूत होता हुआ रिश्ता। 

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सानंद वर्मा - फोटो : एक्स (ट्विटर)

सानंद वर्मा: वह सिर्फ मेरी बहन नहीं, मेरी सबसे बड़ी ताकत है
मेरी जिंदगी की जो सबसे बड़ी व्यक्तिगत चुनौती रही है, उसे मैंने कभी किसी से साझा नहीं किया। लेकिन मेरी बहन शोभना हमेशा मेरे साथ खड़ी रही, उसने मुझे संभाला, हिम्मत दी और टूटने नहीं दिया। उसका साथ मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। अब मैं उसे कभी पैसे देता हूं तो कभी फोन जिससे वह अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ अच्छा खरीद सके। पहले मैं 10-20 रुपये देता था, अब कोशिश करता हूं कि कुछ बड़ा और काम का गिफ्ट दूं। लेकिन हमारे रिश्ते में जो गहराई है, वह कभी नहीं बदली। इस बार फिर उससे राखी बंधवाऊंगा। उस पल का मुझे बेसब्री से इंतजार है।

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