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Vishnu Puran: श्राप के कारण हिरण्यकशिपु व हिरण्याक्ष रूप में जन्में भगवान विष्णु के द्वारपाल, लक्ष्मी नारायण के हाथों हुआ वध

Sun, 31 May 2020 08:34 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
डीडी भारती पर प्रसारित हो रहे विष्णु पुराण (Vishnu Puran) में अब तक आपने देखा भगवान विष्णु ने छल से देवताओं को अमृत पान करवाया। इस बीच स्वरभानु नामक एक असुर ने धोखे से अमृत की कुछ बूंदें पी लीं। सूर्य और चंद्र ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। इससे पहले की अमृत उसके गले से नीचे उतरता, विष्णु जी ने उसका गला सुदर्शन चक्र से काट दिया। परंतु तब तक उसका सिर अमर हो चुका था। इसी कारण सिर राहु और धड़ केतु ग्रह बना और सूर्य- चंद्रमा से अभी भी द्वेष रखता है।
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
आज के एपिसोड में आपने देखा कुछ ऋषि भगवान विष्णु के दर्शनार्थ उनसे मिलने विष्णु लोक आते हैं, जय और विजय नाम के दो द्वारपाल उन्हें भगवान विष्णु से मिलने नहीं देते जिससे क्रोधित होकर वो दोनों को राक्षस बन जाने का श्राप दे देते हैं। इस तरह दोनों को दंड दिया जाता है। भगवान विष्णु उन ऋषियों से स्वयं माफी मांगते हैं। 
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
इस पर जय और विजय दोनों भगवान विष्णु से इस श्राप का समाधान जानने की कोशिश करते हैं, इसपर ऋषिगण बताते हैं, हमारे श्राप के कारण इन दोनों को तीन बार राक्षस योनि में जन्म लेना होगा और स्वंय भगवान विष्णु के हाथों इनकी मृत्यु होगी। 

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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
सनकादिक ऋषि बताते हैं इनका पहला जन्म हिरण्यकशिपु व हिरण्याक्ष के रूप में हुआ। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का तथा नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। यह भगवान विष्णु का तीसरा अवतार माना जाता है। दूसरे जन्म में जय-विजय ने रावण व कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया। इनका वध करने के लिए भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा। 
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विष्णु पुराण - फोटो : सोशल मीडिया
तीसरे जन्म में जय-विजय शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्मे। इस जन्म में भगवान श्रीकृष्ण ने इनका वध किया। इसके उपरांत दोनों को मुक्ति मिलती है। जय विजय को ये दंड उनके अभिमान के कारणवश दिया गया।
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