अक्सर डिप्रेशन को एक मानसिक बीमारी मानने और बताने वाले लोगों को सीरियल 'मर्यादा कब तक' से नाम कमाने वाली रिद्धी डोगरा ने एक मेसेज दिया है। डिप्रेशन झेल रहे लोगों को मोटीवेट करने के लिए रिद्धी कहती हैं कि ये सिर्फ दिमाग की ही नहीं दिल की भी बेटल है। जिसे बेहद सीरियसली लेना चाहिए।
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Ridhi Dogra
बता दें कुछ समय पहले दीपिका पादुकोण और मनीषा कोइराला भी डिप्रेशन झेल रही थीं। उस वक्त अपने फैंस के साथ अपने एक्सपीरियंस शेयर करते हुए उन्होंने बताया था कि ये सिर्फ आपके दिमाग के अंदर उठे विचारों की लड़ाई नहीं बल्कि दिल और दिमाग के बीच की लड़ाई है। इन दोनों बॉलीवुड हसीनाओं के बाद टीवी की दुनिया से शोहरत कमाने वाली रिद्धी डोगरा ने भी डिप्रेशन पर खुलकर बात की।
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हर किसी को होता है डिप्रेशन
रिद्धी डोगरा कहती हैं , 'मैं खुद इस भावनात्मक दौर से गुजर चुकी हूं। ये उस वक्त की बात है जब मैं खुद नहीं जानती थी कि मेरे साथ वाकई ऐसा क्यों हो रहा है। वो अपनी लाइफ का एक उदाहरण देते हुए कहती हैं कि कुछ साल पहले लाइफ में एक टाइम ऐसा आया था जब मैं हर टीवी शो के लिए न कर देती थी। मैं ऐसा इसलिए करती थी क्योंकि मुझे कुछ ऐसा चाहिए था जो बेहद चैलेंजिंग हो।
जब काफी समय तक मुझे ऐसा कोई रोल नहीं मिला तो मैं काफी निराश हो गई। इसके बाद मैनें महसूस किया कि डिप्रेशन के कई लक्षण जैसे कि सेल्फ डाउट, खुद पर दया आना, उदास रहना जैसे कई लक्षण मेरे अंदर आ गए थे।
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अंदर ही अंदर खोखला करता है डिप्रेशन
रिद्धी डोगरा कहती हैं कि डिप्रेशन में होने वाली उदासी आपको अंदर ही अंदर खोखला कर देती हैं। इस अवस्था में इंसान किसी भी चीज के बारे में बहुत ज्यादा सोचता है। कोई भी छोटी से छोटी चीज भी आपको उदास कर सकती है। लेकिन क्रिएटिव लोगों के पास अपने दर्द की दवा भी खुद ही मौजूद होती है। वो जानते हैं उन्हें कैसे अपने दुख से निकलना है।
रिद्धी डोगरा कहती हैं कि ऐसे कई आर्टिस्ट हैं जो अपने डिप्रेशन से या तो निकल चुके हैं या फिर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। मैं उन सबकी भावनाओं का सम्मान करती हूं। वो कहती हैं कि मैं उन सभी लोगों को सलाम करती हूं जिनके पास अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत होती हैं।
अपने फैंस को सलाह देती हुई वो कहती हैं कि आप अपने अंदर की उस आग को बुझने मत दीजिए जिसे लक्ष्य कहते हैं। अपने लक्ष्य को हमेशा अपने सामने रखकर अपना सिर हमेशा ऊंचा रखें। अपने रिजेक्शन को अपनी हिम्मत में बदलकर अपने गुस्से को अपना जुनून बनाएं।