फिल्म जगत एक ऐसा संसार है, जो कई बार सितारों की दुनिया बदल देता है। लोग यहां अभिनय के जरिए शोहरत के सपनों को उड़ान देने की चाहत से आते हैं और कई दफा ये शोहरत भी इनके नाम के आगे छोटी हो जाती है। ये मनोरंजन शख्सियत से कब-कैसे राजनीतिक हस्ती बन जाते हैं, संभवत: वे खुद भी ये सोचते होंगे। आगे बढ़ना तो कुदरत की नियति है, लेकिन पीछे मुड़कर जब उन यादों को निहारा जाए तो पिटारे से न जाने कितने ही खुशगवार लम्हें निकलते हैं। अंत में हमारे पास यही लम्हें और उनकी स्मृति बाकी रह जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा दे रहीं स्मृति ईरानी के साथ भी।