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EXCLUSIVE: सपना चौधरी भूली नहीं मनोज तिवारी से पहली मुलाकात की खटास, डिजिटल मीडिया पर कही ये बात

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सपना चौधरी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदीभाषी राज्यों के क्षेत्रीय सितारों की जब भी बात होती है तो इन दिनों सपना चौधरी का नाम सबसे आगे आता है। उनके डांस वीडियो के करोड़ों दीवाने हैं। बड़े बडे चैनल उनके नाम का सहारा अपनी टीआरपी दुरुस्त करने के लिए लेते हैं। सपना चौधरी से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने की ये खास मुलाकात।
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सपना चौधरी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दुनिया को शायद पहली बार टीवी शो ‘बिग बॉस’ से ही पता चला कि सपना चौधरी नाम की डांसर किसी डूबते टीवी शो की टीआरपी इतनी बढ़ा सकती है, आपको इस शो से कितना फायदा हुआ। 

फायदा तो होता ही है, मैं कहूंगी कि कहीं न कहीं रीजनल स्टार के जो श्रोता या दर्शक होते हैं वे लोक में बहुत पकड़ रखते हैं। अगर हमें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिले तो हमारे पास वे दर्शक भी आते हैं तो हमें जानते ही नहीं या जिनके पास तक हमारी कला पहुंचती ही नहीं। संभ्रांत वर्ग की यह दर्शक संख्या हमारी कला को देखती है तो क्षेत्रीय कलाकारों को बहुत फायदा होता है। साथ ही हमें खुद को बदलने और अपनी कला को निखारने की सीख भी मिलती है।
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सपना चौधरी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किसानों, मजदूरों और गांव वालों के बीच मंचीय प्रस्तुतियां देने के बरसों बाद आपको मुख्य धारा के मनोरंजन उद्योग ने सिर आंखों पर बिठाया, कितना कठिन रहा ये संघर्ष?

काबिल से काबिल कलाकार भी कुछ नहीं कर पाएगा अगर उसकी कला को लोगों तक पहुंचाने के लिए साधन ही न हों। साधन हर कलाकार के लिए बहुत जरूरी है। मेरे लिए तो ये सब बहुत बाद में मिल सका। मेरी यात्रा में तो शायद भगवान ने ही संघर्ष लिख दिया था। जितना संघर्ष हमने अपने समय में किया, उसका लाभ अब आने वाली पीढ़ी को मिल रहा है। मुझे खुशी होती है जब मैं और नई लड़कियों को वह सब करते देखती हूं जिसे करने के लिए एक समय में मुझे समाज से लोहा लेना पड़ा।

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सपना चौधरी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल मनोरंजन से लोक कलाकारों को कितना लाभ हो रहा है?

अभी तो पलक झपकते इंसान स्टार बन सकता है। अब आपके हुनर को कोई दबा नहीं सकता। कौशल है तो करिश्मा होगा ही, ये तय है। इतने सारे डिजिटल ऐप्स आ गए हैं कि पूछो मत। हमारे समय तो ये कुछ नहीं था। टिक टॉक से ही इतने स्टार बन गए हैं और भी ना जाने कितने शॉर्ट वीडियो वाले हमसे संपर्क करते रहते हैं। तो ये डिजिटल क्रांति गांव, गली, कूंचे के कलाकारों के लिए वरदान से कम नहीं हैं। हमारे पास ऐसा कोई प्लेटफार्म नहीं था तभी शायद हमें लोगों तक पहुंचने में बहुत समय लग गया।
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सपना चौधरी - फोटो : Instagram
अभी आप दो और क्षेत्रीय सितारों मनोज तिवारी और रवि किशन के साथ काम कर रही हैं। मनोज तिवारी से आपकी पहली मुलाकात कब और कैसे हुई?

मनोज तिवारी से मेरी पहली मुलाकात हुई थी मौर्या होटल में।वह उस समय दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बने बने थे। शायद वह मुझे उस समय अच्छे से जानते नहीं थे या फिर जानते थे तो ना जानने का बहाना कर रहे थे। हालांकि, मेरे अंदर नहीं है ये चीज। लेकिन मैंने देखा है जब कोई बड़ा आर्टिस्ट दूसरे से मिलता है तो उसे जानते हुए भी उसे अनदेखा करता है। ये नहीं पता कि ऐसा वह क्यूं करता है। वहां बस हमारी हाय, हैलो हुई थी। वह बोले, ‘अच्छा तुम हो। अच्छा ठीक है। हां, हां, सुना है सुना है। ठीक है।’ फिर उसके बाद मुलाकातें हुईं और प्रेम बढ़ने लग गया तो हम फिर बहुत अच्छे मित्र बन गए आपस में।
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सपना चौधरी - फोटो : Insatagram- @Sapnachoudhary
और रवि किशन?

रवि किशन सर तो कमाल इंसान हैं। उनसे मैं स्टेज पर मिली थी। उनके साथ मैंने परफॉर्म किया था दिल्ली में। उन्होंने मुझे कहा था, ‘तुम बहुत अच्छा कर रही हो। बहुत अच्छा आगे भी करोगी। जो भी ऐसा वैसा बोलता है, बोलने दो उसको। लोग क्या बोलते हैं उसकी परवाह करने की जरूरत नहीं है।’
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सपना चौधरी(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
आपको पहली बार कब लगा कि सपना चौधरी के नाम से भी दर्शक शो देखने आते हैं?

क्या हुआ कि मैंने अपना करियर गाने से शुरू किया था। एक दो बार स्टेज पर गाया भी लेकिन फिर मैंने सोचा कि डांस करके देखते हैं और स्पीकर बजते गाने पर लिप सिंक (साथ में होंठ चलाना) करके गाया तो कमाल ही हो गया। लोग मुझे गाने से पहचानने लगे। और, मेरे नाम की फरमाइशें आने लगीं तो कार्यक्रम कराने वालों ने मुझे बताया कि मेरे नाम से अब शो बिकने लगे हैं।

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सपना चौधरी - फोटो : Sapna Choudhary Instagram
हरियाणवी सिनेमा के उद्धार के लिए कोई योजना है क्या मन में?

मैं अभी जो भोजपुरी फिल्म कर रही हूं निरहुआ के साथ, वह एक तरह से मिक्स फिल्म ही है। वह भोजपुरी बोलेंगे, मैं हरियाणवी मिक्स बोलूंगी। लेकिन हरियाणवी सिनेमा की हालत देखकर मुझे दुख होता है। लोग इस भाषा के सिनेमा में पैसा नहीं लगाना चाहते। आपने पूछा तो मैं बताती हूं कि मेरे मन में हरियाणवी सिनेमा के लिए कुछ करने की योजना है। अभी मैं इस पर काम कर रही हूं। कुछ अच्छा बन पड़ा तो जरूर सबको बताऊंगी।
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सपना चौधरी - फोटो : सपना के फेसबुक प्रोफाइल से
और, राजनीति? दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन पर कोई टिप्पणी?

किसान आंदोलन में मेरे पति नियमित जाते हैं। वह किसानों का ख्याल भी रखते हैं। मेरी राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। मैं चुनाव भी नहीं लड़ना चाहती। मैं तो कहती हूं कि जनता की सेवा के लिए चुनाव लड़ना जरूरी नहीं है। चुनाव लड़ने का मकसद होना चाहिए जनता की सेवा। अगर मैं चुनाव जीतकर भी लोगों का भला न कर सकी तो उसका फायदा नहीं और बिना फायदे के जनता की सेवा तो बिना चुनाव लड़े भी की जा सकती है।




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