वैसे तो किताबें पढ़ना अब लोगों की आदत नहीं रही। कहानियां तक लोग न पढ़ रहे हैं, न देख रहे हैं, बल्कि कान में ईयर फोन लगाकर सुन ज्यादा रहे हैं। लेकिन, मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों इसके बावजूद एक किताब के चर्चे खूब हैं और ये किताब है, ‘जीएसटी फॉर दे लेमैन’। फिल्म इंडस्ट्री के हर उस शख्स के पास इन दिनों ये किताब देखने को मिल जाती है जिसके वेतन का भुगतान बिल बनाकर भेजने पर होता है और जिसे अपने बिल में जीएसटी भी चार्ज करना होता है।