mahabharat
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वहीं एक और किस्से का जिक्र करते हुए पुनीत ने बताया था, 'इसी तरह से एक बार हमें एक मारवाड़ी उद्योगपति ने खाने पर आमंत्रित किया। मेरे अगल-बगल में अर्जुन (महाभारत वाले) और रूपा गांगुली (द्रौपदी) बैठे हुए थे। घर की महिलाएं आतीं, वो अर्जुन को परोसतीं, फिर रूपा को और मुझे परोसे बिना बढ़ जातीं। मैंने तब घर की बुजुर्ग महिला से पूछा, 'माताजी, मुझसे कोई गलती हुई क्या।' तो उन्होंने मुझे झिड़कते हुए कहा, 'चुप रहो, तुमने पांडवों के साथ इतना बुरा क्यों किया।' ये घटनाएं दर्शाती हैं कि लोग कितनी शिद्दत से इस धारावाहिक का अनुसरण करते थे और हमारे किरदार किस हद तक हमसे जुड़ गए थे।"