rupesh bane
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पिता के गुजर जाने के बाद रुपेश ने बहुत गरीबी में वक्त गुजारा है। वह बताते हैं, 'मेरी मां कपड़े सिलने का काम करती थी और हम तीनों भाई मिलकर अगरबत्तियां बेचते थे, अखबार बांटते थे। मेरी मां ने कैसे भी करके हमें पढ़ाया, और इस काबिल बनाया कि हम आगे चलकर अपना कुछ कर सकें। मेरे बड़े भाई ने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर नौकरी पाई।'