भारती सिंह
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भारती ने अपने जिंदगी के संघर्ष से जो कुछ भी सीखा है वही आज उनके काम आ रहा है। भारती ने अपने संघर्ष के उस वक्त को तो याद करना नहीं चाहती हैं। लेकिन इस बचपन की बहुत सारी ऐसी यादें भी हैं जो उनके काम में मदद करती हैं। भारती ने इस इंटरव्यू के दौरान कहा था कि, 'जिस तरह सोना भट्टी में पकता है, वैसे ही मैं भी गरीबी की भट्टी में पकी हूं।'