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Bigg Boss 14 Wild Card: मुरादाबाद की लड़की के मुंबई में पूरे हुए सपने, नैना सिंह ने 'अमर उजाला' को सुनाई पूरी राम कहानी

Sun, 25 Oct 2020 09:39 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
टीवी के लोकप्रिय धारावाहिक 'कुमकुम भाग्य' में रिया मेहरा का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री नैना सिंह ने 'बिग बॉस' के 14वें सीजन में वाइल्ड कार्ड एंट्री मारी है। बहुत से कलाकारों की तरह नैना भी लॉकडाउन के इस दौर में बेरोजगारी का शिकार थीं इसलिए उन्होंने बिग बॉस के ऑफर को तुरंत स्वीकार कर लिया। नैना का मानना है कि उनका सबसे बड़ा हथियार उनकी दोस्ती ही है जिसे वह 'बिग बॉस' के घर में भी इस्तेमाल कर सकती हैं। शो में जाकर अपना खेल शुरू करने से पहले अमर उजाला ने नैना से खास बातचीत की।
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नैना सिंह - फोटो : instagram/nonaberrry
'बिग बॉस' का हिस्सा बनने का ऑफर आपको पहले भी मिला या फिर यह आपका पहला ही मौका था?
काम के मामले में मैं ज्यादा भाव नहीं खाती। कोई भी काम मुझे मिलता है तो मैं चुपचाप कर लेती हूं। कोरोना की वजह से लॉकडाउन होने के बाद सब खाली ही बैठे हुए थे। किसको आजादी थी काम चुनने की। अपने घर पर रहकर दूसरे ही काम किए हैं सबने। मैं अब बिग बॉस के साथ अपनी दूसरी पारी शुरू करने जा रही हूं। यह मेरा पहला ही मौका था जब बिग बॉस ने मुझसे इस शो का हिस्सा बनने के लिए पूछा। और मैंने तुरंत हां कर दी।
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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
'बिग बॉस' में पहले से ही खिलाड़ी अपना खेल खेल रहे हैं। उनके खेल को देखते हुए आपने अपनी क्या रणनीति बनाई है?
इन सब का खेल बाहर से देखने तो मिल रहा है लेकिन सिर्फ कुछ चीजें ही हम देख पा रहे हैं। घर के अंदर जब मैं जाऊंगी तो उनके साथ मुझे चौबीसों घंटे रहना है। हो सकता है कि वह जो काम अब कर रहे हैं वह तब न करें जब मैं उनके बीच में रहूं! पहले से किसी के बारे में राय बना लेना बेकार है। हो सकता है कि जो इंसान दूसरों के साथ कुछ और व्यवहार करता है, वह मेरे साथ कुछ और व्यवहार करे। इसलिए मैं चाहती हूं कि मैं एकदम साफ दिमाग से जाऊं। मैं खुद जाकर चीजों को अपने साथ होता हुआ देखूं और उसके बाद ही अपनी कोई राय बनाऊं। मेरी दोस्ती और दुश्मनी का स्तर कुछ अलग ही होता है। मैं जिससे दोस्ती करती हूं, वह इंसान कभी दोगला नहीं हो सकता। और मैं भी अपनी दोस्ती में कभी पीछे नहीं हटती। लेकिन, इन लोगों का खेल देखकर तो मैं कह ही नहीं सकती कि आखिर इनमें से दोस्ती करने लायक है कौन? सब अपना खेल खेल रहे हैं क्योंकि सब जीतना चाहते हैं। मैं उनके खेल को जानती हूं इसलिए हो सकता है कि कुछ चीजें मेरे पक्ष में रहें।

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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
अचानक से जब इन लोगों के बीच में वाइल्ड कार्ड एंट्री लेकर आप पहुंचेंगी तो उनके खेल पर क्या असर पड़ सकता है?
शो में हर बार जब वाइल्ड कार्ड एंट्रीज लेकर लोग पहुंचते थे तो उनका नंबर कोई एक से डेढ़ महीने बाद आता था। लेकिन, इस बार थोड़ा जल्दी हो रहा है। घर में पहले से ही मौजूद लोगों को तो पता भी नहीं है कि आखिर उन्हें करना क्या है? किस तरह खेलना है? यहां बाहर बैठकर उन्हें देखकर इतना तो मैं जान गई हूं कि हमें घर के अंदर पहुंचकर क्या करने की जरूरत है? मुझे लगता है कि घर में पहुंचकर हम भी उनके बराबर में ही खड़े होंगे। मुझे नहीं लगता कि कुछ ज्यादा फर्क पड़ने वाला है। आपको सिर्फ अपने पत्ते ढंग से खेलने आने चाहिए। अगर आप वाइल्ड कार्ड एंट्री मार रहे हो तब भी और आप घर में पहले से रह रहे हो तब भी। सीन कैसे भी पलट सकता है।
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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
मानसिक रूप से तो इस तरह के खेल की तैयारी ज्यादा नहीं कर सकते। लेकिन, शारीरिक तौर पर आपने अपने आप को कितना तैयार किया है?
मैं ठाकुर हूं और उत्तर प्रदेश से हूं (हंसते हुए)। मैंने बचपन से ही हर तरह के खेल खेले हैं। मैं बचपन से ही फुटबॉल, बास्केटबॉल, क्रिकेट जैसे खेल खेलती आ रही हूं इसलिए मेरे अंदर खेल भावना भी है। मैंने एक रियलिटी शो और भी कर रखा है। मैं उससे इस शो की तुलना नहीं कर रही हूं लेकिन हम जिंदगी में जो भी करते हैं, उससे कुछ न कुछ जरूर सीखते हैं। हमें अपनी कमजोरियां और ताकत पता चलती है। जब मैंने स्प्लिट्सविला किया था तो वह शो मैंने टास्क कर करके ही जीत लिया था। उसके अलावा मेरे पास सुरक्षित रहने का कोई और विकल्प नहीं था। मानसिक तौर पर मैं किस तरह व्यवहार करूंगी? वह तो मैं नहीं जानती। लेकिन, शारीरिक तौर पर मैं सब कुछ संभाल लूंगी।
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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
स्प्लिट्सविला से आपने ऐसा क्या सीखा, जो आपके यहां काम आ सकता है?
स्प्लिट्सविला से मुझे कई बार ऑफर आ चुके थे। मुझे नहीं लगता था कि मैं लड़ झगड़कर या फिर टास्क करके ही वह शो जीत लूंगी। मुझे पता ही नहीं था कि मेरे अंदर ऐसी भी खासियत है। मैं स्प्लिट्सविला करना ही नहीं चाहती थी। मुझे पता ही नहीं था कि आखिर इस शो में करना क्या होता है? मैं इस शो को कभी देखती ही नहीं थी। बाद में मुझे पता चला कि उसमें अपना एक पार्टनर चुनना होता है। उसके साथ प्यार भरी बातें करनी होती हैं। लेकिन, मेरा तो प्यार से दूर-दूर तक कोई नाता होता ही नहीं है। मैं इस बात से भी थोड़ी घबराई हुई थी क्योंकि यह सब मेरे से होगा ही नहीं। किसी गेम शो में प्यार मोहब्बत की बातें करना, मुझे ऐसा लगता है जैसे एक दूसरे की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है। फिर भी मैंने वह किया और वहां मैंने अपनी दोस्ती को आगे बढ़ाया, प्यार को नहीं। मुझे लगता है कि मेरी सबसे मजबूत चीज मेरी दोस्ती ही है, जिसे मैं अक्सर निभा देती हूं।
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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
अपने बचपन में आपने इतने खेल खेले हैं तो एक अभिनेत्री आपके अंदर कहां पैदा हुई?
मेरा बचपन मुरादाबाद में बीता है और मैं हॉस्टल में ही पली बढ़ी हुई हूं। जब मैं शुरुआत से ही 12 साल तक हॉस्टल में रही तो मेरी प्रवृत्ति ऐसी हो गई है कि मैं बाहर के लोगों के साथ भी तालमेल बैठा लेती हूं। बस कभी कोई आगे बढ़ने के बाद पीछे हट जाता है तो थोड़ी सी दिक्कत होती है। मैंने अपनी जिंदगी में जितने भी काम किए हैं उनसे कुछ न कुछ सीखा है। शुरुआत से ही चाहती थी कि मैं एक अभिनेत्री बनूं। लेकिन, अगर मैं एक लड़का होती तो जरूर मैं एक क्रिकेटर बनती। लड़की थी और थोड़ी अच्छी भी दिखने लगी थी तो लोग हीरोइन हीरोइन कहने लगे थे। फिर मेरा भी मन बदल गया। मेरी मां मुझे एक अभिनेत्री बनाना चाहती थीं जबकि मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं एक क्रिकेटर बनूं। पापा की सुनकर मैंने पूरा बचपन क्रिकेट खेला है और मां की सुनकर अब मैं एक अभिनेत्री बन गई हूं।

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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
आपको एक अभिनेत्री बनाने के लिए आपकी मां ने किस तरह की कोशिशें कीं?
मेरी मां का नाम शक्ति सिंह है और उन्हें भी फिल्मों के ऑफर आए थे। 'पत्थर और पायल' एक फिल्म आई थी जिसके लिए मेरी मां के पास ऑफर आया था। यशराज फिल्म्स में काम करते रहे निर्माता आशीष सिंह मेरे रिश्तेदार हैं।  कुछ कारणों की वजह से मेरी मां उस फिल्म के लिए जा नहीं पाईं। फिर उनकी शादी हो गई तो उनका सपना सपना ही रह गया। जब मैं पैदा हुई तो उन्होंने मुझे अभिनेत्री बनाने का सोचा। उन्होंने मेरी तस्वीरें फेमिना में भेजना शुरू कीं। उस समय मैंने 12वीं कक्षा पास की थी और मुझे मेरे करियर के बारे में सोचना था। मैं उस वक्त बिल्कुल लड़कों की तरह थी। मुझे लड़कियों की तरह चलना और उनकी तरह रहना बिल्कुल पसंद नहीं था। हॉस्टल में रही थी इसलिए सारा वक्त ट्रैक सूट पहनकर ही निकाल दिया। जब मेरी मां ने मेरी तस्वीरें फेमिना में भेजीं तो वहां से मुझे मॉडलिंग के ऑफर आए। मॉडलिंग करते हुए ही मुझे एक फिल्म भी मिली। उसके लिए मैं मुंबई गई लेकिन वह फिल्म फिर बनी नहीं। इसलिए, मुझे खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। उस वक्त मैं सिर्फ 17 साल की थी। मेरी मां को लगा कि बच्ची पर कहीं ज्यादा जोर न पड़ जाए इसलिए मैं वापस गई और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगी।
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नैना सिंह - फोटो : Instagram: @nonaberrry
आपने पहली बार ऑडिशन किस प्रोजेक्ट के लिए दिया था?
मैं जब मॉडलिंग कर रही थी, उसी वक्त मैंने अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस की ईमेल आईडी पर अपने फोटो भेजना शुरू कर दिए थे। मुझे पहला बुलावा आरके फिल्म्स से आया। यह एक नया बैनर था जो संजय दत्त और सुष्मिता सेन को लेकर एक फिल्म बना रहा था। इसके लिए मैंने ऑडिशन दिया और मुझे फिल्म में एक किरदार भी मिला। लेकिन, संजय दत्त के जेल वगैरह जाने का मामला था इसलिए यह फिल्म फिर बन नहीं पाई। मेरे करियर में ऐसा कई बार हो चुका है कि चीजें नजदीक आती हैं लेकिन फिर दूर चली जाती हैं। इस फिल्म के लिए जब मैं मुंबई आई थी तब मैंने एक चीज तो जान ली थी कि जो मुंबई एक बार आता है, वह फिर मुंबई के ही सपने देखता है। इसके दो साल बाद फिर मैं वापस मुंबई आ गई। जब मैं मुंबई आई तो एक फिल्म के ऑडिशन के लिए ही मैं गई थी। उन्हें मेरी एक्टिंग तो पसंद आई लेकिन मुझे किरदार नहीं मिला। उसकी कास्टिंग शाहिद हसन कर रहे थे। फिर उन्होंने मुझे अपने साथ ही एक कास्टिंग निर्देशक के रूप में काम करने का मौका दिया। तब से मैं ऑडिशन खुद भी देती रहती हूं लेकिन कहीं कुछ काम बना नहीं।

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