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Bigg Boss 14 Wild Card: आरजे शार्दूल को नहीं भूली सलमान से पहली मुलाकात, 'अमर उजाला' से यूं बयां किया किस्सा

Sun, 25 Oct 2020 09:49 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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शार्दुल पंडित - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
टीवी के जाने-माने अभिनेता शार्दुल पंडित ने रियलिटी शो 'बिग बॉस' के 14वें सीजन में वाइल्ड कार्ड एंट्री मारी है। एक कलाकार के रूप में उनके अंदर कई गुण हैं। उनकी शुरुआत चित्रकारी से हुई और बाद में उन्होंने टीवी पर एंकरिंग की। उसके बाद वह रेडियो जॉकी भी बने और अब टीवी पर अभिनय भी करते हैं। इतना सब कुछ करने के बाद अब वह 'बिग बॉस' का भी हिस्सा बन गए। इस शो में जाने का शार्दुल का उद्देश्य है कि वह इस शो से अपनी एक बड़ी पहचान बनाना चाहते हैं। बिग बॉस के घर में दाखिल होने से पहले अमर उजाला ने उनसे ढेरों बातें कीं।
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शार्दुल पंडित - फोटो : file photo
लगभग ढाई से तीन हफ्ते बाहर बैठकर आपने घर के अंदर खेल रहे लोगों का विश्लेषण तो कर ही लिया होगा! और उनके बारे में कुछ जानकारियां भी इकट्ठी कर ली होंगी! तो अब तक आपने किसके बारे में क्या राय बनाई है?
कुछ ही हफ्तों का खेल देखकर किसी के बारे में भी कोई राय बना लेना गलत बात है। खेल के नजरिए से भी सोचा जाए तो मैं समझता हूं कि जो भी प्रतियोगी घर के अंदर खेल रहे हैं, उन्होंने अब तक अपने सारे पत्ते तो बिल्कुल नहीं खोले होंगे! एक आदमी के रूप में भी इतनी जल्दी लोगों का विश्लेषण करना बहुत मुश्किल है। एक खिलाड़ी का पता लगाया जा सकता है लेकिन एक आदमी का नहीं। मुझे लगता है कि मुझे अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए। न कि दूसरों पर। और मैं व्यक्तिगत तौर पर तो किसी पर भी हमला नहीं करने वाला हूं।
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शार्दुल पंडित - फोटो : file photo
क्या यह सच है कि आप एक रेडियो जॉकी होने के साथ गायक भी हैं? अगर ऐसा है तो आपकी घर के कुछ प्रतियोगियों से काफी जमेगी!
मैं संगीत का आठवां सुर हूं इसलिए मुझसे ताल मिलाने के लिए राहुल वैद्य और जान कुमार सानू को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। (हंसते हुए) न जाने कहां से यह एक अफवाह फैल गई है कि मैं एक गायक हूं। लेकिन, मैं आपको बता दूं कि यह बिल्कुल गलत है। मैं कोई गायक नहीं हूं। लेकिन, अगर ऐसा मान ही लिया गया है तो मैं बिग बॉस में गाऊंगा जिससे कि टीआरपी कुछ अलग ही स्तर की आए। इसमें एक बात बिल्कुल सही है कि मैं एक रेडियो जॉकी भी रहा हूं। मेरे करियर की शुरुआत रेडियो जॉकी से ही हुई थी। उस वक्त में 19 साल का था। तो पढ़ाई के साथ-साथ रेडियो में भी मैं काम कर रहा था। उस वक्त मुझे प्रेम शब्द का मतलब भी नहीं पता था तब रेडियो में मुझे लोगों की प्रेम समस्याएं सुलझाने के लिए बैठा दिया गया था।

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शार्दुल पंडित - फोटो : file photo
आपके करियर की शुरुआत अचानक से एक रेडियो जॉकी बनने से कैसे हो गई? किस तरह पहुंचे आप वहां तक?
यह उस समय की बात है जब मैं अपने शहर इंदौर में लोकल टेलीविजन पर एंकरिंग करता था। तब रेडियो मिर्ची की शुरुआत एक लोकल चैनल के रूप में ही शहर में हो रही थी और वह कुछ हुनरमंद लोगों की तलाश में थे। मुझे लगा कि मुझे भी इसके लिए टेस्ट देना चाहिए। मैंने भी इसकी लिखित परीक्षा दी और बाद में मेरा सामान्य ज्ञान भी जांचा गया। एंकरिंग मैं पहले से ही कर रहा था इसलिए बाकी की चीजों में मुझे ज्यादा दिक्कत हुई नहीं। और मुझे रेडियो जॉकी बना दिया गया।
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शार्दुल पंडित - फोटो : file photo
टेलीविजन पर एंकरिंग शुरू करने का आपका क्या मकसद था?
यह भी उसी समय की बात है जब मैं 18 से 19 साल का ही हूंगा। मैं चाहता था कि अपने जेब खर्च के लिए मैं कुछ ऐसा करूं, जिससे कि मुझे घर वालों के ऊपर ज्यादा आश्रित न रहना पड़े। उस वक्त में पेंटिंग करता था और बच्चों को भी सिखाता था। इसके अलावा मैं कुछ और कोचिंग भी दिया करता था। उसी दौरान मुझे लोकल टेलीविजन पर एंकरिंग करने का भी मौका मिला तो उसमें भी मैंने हाथ आजमाया। मैंने सोचा कि अगर दिन के तीन से चार घंटे पढ़ाई के अलावा अगर मैं ऐसी चीजों में भी काम करूं और इनसे पैसे कमाऊं तो इसमें बुराई क्या है?
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शार्दुल पंडित - फोटो : instagram: shardulpandit
बहुत ही कम ऐसे बच्चे होते हैं जो इतनी कम उम्र में अपने पैरों पर खड़ा होने का सोचते हैं। आपके दिमाग में ऐसी सोच ने कब घर किया?
उस वक्त मैं छठवीं कक्षा का छात्र हुआ करता था। मेरे माता-पिता की शादी की सालगिरह थी और मैं चाहता था कि मैं उन्हें कुछ उपहार दूं। लेकिन, मेरे सामने दिक्कत यह थी कि मुझे जेब खर्च इतना नहीं मिलता था कि उससे मैं उनके लिए कुछ खरीद सकूं। अब उनसे मैं यह भी नहीं कह सकता कि मुझे उनके लिए कोई उपहार खरीदना है और वह भी उनके ही पैसे से। यह भी अच्छा नहीं लगता। मुझे याद है कि एम एफ हुसैन की तरफ से एक चित्रकारी प्रतियोगिता में मुझे पुरस्कार मिला था। उसकी वजह से मेरे मोहल्ले में मुझे एक अच्छा चित्रकार माना जाने लगा। तो उस वक्त मैंने इसी रौब में कुछ दूसरे बच्चों को चित्रकारी की कोचिंग देना शुरू की और उससे कुछ पैसे कमाए। उन पैसों से मैंने अपने माता पिता को उपहार दिया। जब अपने पैसे से मैंने उन्हें उपहार दिया तो उन्हें बहुत अच्छा लगा और मुझे भी।
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शार्दुल पंडित - फोटो : instagram: shardulpandit
क्या आप आज भी चित्रकारी का शौक रखते हैं?
जी हां! मैं अब भी चित्रकारी करता हूं। पिछले साल की बात है जब मैं बिल्कुल खाली बैठा हुआ था। मेरे पास करने के लिए कोई काम नहीं था। तब मैंने खूब चित्रकारी की। उनमें से एक चित्र मैंने बेचा भी जिसकी फोटो मैंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा की थी। और मैं आपको बताऊं तो इंडस्ट्री में मेरे जितने दोस्त हैं, वह मुझसे हमेशा कहते हैं कि भई हमें हमारे जन्मदिन पर कोई उपहार खरीद कर देने की बजाय कुछ चित्रकारी करके ही उपहार स्वरूप दे दिया करो। और मैं भी इन्हें अपने हाथ से बनाए हुए चित्र ही तोहफे के रुप में देता हूं। उस तोहफे का मजा ही कुछ अलग है जब हम उसे अपने हाथों से तैयार करके देते हैं।

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शार्दुल पंडित - फोटो : instagram: shardulpandit
रेडियो में जॉकी रहे, टीवी पर एंकरिंग की और लगातार चित्रकारी आप करते रहे हैं। तो यह अभिनय का कीड़ा आपके अंदर कैसे आया और वहां तक कैसे पहुंचे?
जब मैंने पहली बार कैमरे का सामना किया उस पल को मैं लिख कर बोल कर या पढ़कर बयां नहीं कर सकता। वह मेरी जिंदगी का ऐसा अनुभव है कि मैं उसे शब्दों में बता नहीं सकता। इसकी शुरुआत कुछ ऐसे हुई थी कि मैं इंदौर में ही था और रेडियो में काम कर रहा था। उसी वक्त जी चैनल का एक शो 'इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज' शुरू हुआ। इसमें मैं, दिव्यांका त्रिपाठी और भी कई जाने-माने कलाकार सफल रहे। हम जीत गए थे और हमारी शुरुआत भी हो गई थी। लेकिन, मुझे वापस रेडियो में जाना पड़ा। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का हूं और अभिनय को हमारे यहां एक पेशे के रूप में नहीं देखा जाता। मुझे भी इस क्षेत्र में आने से रोका गया इसलिए मैं रुक गया और फिर से रेडियो में काम करने लगा। लेकिन, जब रेडियो मिर्ची के साथ मैं मुंबई आया और यहीं पर रहने लगा तो यहां रेडियो मिर्ची में रहकर मैंने कई फिल्मी कलाकारों के इंटरव्यू लिए। इस दौरान मुझसे कई कलाकारों ने कहा कि जब मेरा सब कुछ इतना अच्छा है तो मैं अभिनय में क्यों नहीं आता। मुझे अच्छे से याद है कि एक बार मैं अब्बास मस्तान का इंटरव्यू करने के लिए गया था। उनका इंटरव्यू खत्म करके मैं वापस आया तो उन्होंने रेडियो मिर्ची में एक पत्र लिखकर भेजा कि इस लड़के को हमें दे दो। हम इसे फिल्म में लॉन्च करना चाहते हैं। 

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शार्दुल पंडित - फोटो : instagram: shardulpandit
इस समय इस रियलिटी शो 'बिग बॉस' में जाने का आपका क्या उद्देश्य है?
बाहर बैठकर मैंने कोई रणनीति तो बनाई नहीं है। मैं देख रहा हूं कि घर के अंदर रहने वाले हर इंसान का मूड हर रोज बदल रहा है। जब मैं घर के अंदर जाऊंगा तो जरूरी नहीं है कि सब लोग मेरे साथ अच्छे से बर्ताव करें। मैं एक मूर्ख इंसान की तरह सोच कर तो नहीं जा सकता कि मैं इस इंसान के साथ दोस्ती करूंगा और इसके साथ मुझे लड़ाई करनी है और मैं से थप्पड़ मारूंगा। हो सकता है कि घर के अंदर जितने भी लोग हैं, उनमें से जो सबके लिए बुरा हो वह आपके लिए अच्छा हो सकता है। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि जो सबके लिए अच्छा है लेकिन आपके लिए बुरा हो! इसलिए कोई भी योजना बनाना मुझे तो सही नहीं लगता।
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शार्दुल पंडित - फोटो : instagram: shardulpandit
जब आप शो में दाखिल हो रहे होंगे, उससे पहले आपका सामना शो के होस्ट सलमान खान से होगा। रेडियो जॉकी रहते हुए क्या आप पहले भी उनसे मिल चुके हैं? या फिर यह आपका पहली बार होगा?
जी, मैं उनसे पहले भी एक बार मिल चुका हूं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें याद होगा या फिर भी कोई भी सकता है क्योंकि उनकी जिंदगी में उनसे न जाने हर रोज कितने लोग मिलते होंगे और न जाने कितने लोग इंटरव्यू लेते होंगे! वह ऐसे इंसान हैं जो एक बार किसी को मिल जाए तो उनसे हुई मुलाकात कोई भुला नहीं सकता। मुझे आज भी याद है कि मैं फिल्म 'बागबान' की प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए गया था। सलमान उस समय पीछे खड़े हुए थे और वह इवेंट शुरू होने ही वाला था। हम सब से कहा गया था कि एक एक करके सभी लोग अपने अपने इंटरव्यू खत्म कर लीजिए। तो, मैंने सलमान जी से जाकर कहा कि मैं आपका इंटरव्यू लेना चाहता हूं। तो उन्होंने मुझसे कहा कि आ जाओ बगल में खड़े होते हैं। और क्या आप चाय पिएंगे? मेरे लिए वह पल ऐसा हो गया था कि मैं इंदौर का रहने वाला एक लड़का उनके साथ खड़े होकर चाय पी रहा हूं। उस पल को मैं कभी नहीं भूल सकता।


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