तारक मेहता
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बात साल 1995 की है। उस वक्त कॉलमनिस्ट तारक मेहता मुंबई से अहमदाबाद चले गए थे। 1997 में उनकी मुलाकात असित मोदी से हुई। दोनों ने 'दुनिया ने ऊंधा चश्मा' कॉलम के आधार पर सीरियल बनाने पर विचार किया और दो साल तक उनकी बातचीत चलती रही। दरअसल, उस दौरान कॉलमनिस्ट तारक मेहता के मन में भी उलझन थी, क्योंकि सूरत में रहने वाले उनके खास दोस्त महेश भाई वकील भी कॉलम के आधार पर सीरियल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने तो एक-दो एपिसोड भी तैयार कर लिए थे। कॉलमनिस्ट ने महेश भाई वकील और असित मोदी की मुलाकात कराई, जिसमें 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शो पर सहमति बन गई। इस शो का यह नाम इसलिए ऐसा रखा गया, क्योंकि तारक मेहता देश और समाज में होने वाली घटनाओं को अनोखे अंदाज में देखते थे।