पेद्दी
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ऐसी है ‘पेद्दी’ की कहानी
बुची बाबू सना द्वारा निर्देशित ‘पेद्दी’ की कहानी एक पहाड़ी गांव के दिहाड़ी मजदूर पेद्दी (राम चरण) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। पेद्दी जो मन में आता है वो हर काम करता है क्योंकि उसका मानना है कि ‘दोबारा थोड़ी न पैदा होंगे..’। वो खुद को और अपने गांव को पहचान दिलाने के लिए ऊंची जाति और शहरी लोगों से लड़ाई लड़ रहा है।
पेद्दी कमाल का क्रिकेट खेलता है और अपनी ऊपर लगने वाली बोली से पैसे कमाता है पर एक दिन ऊंची जाति के लोग एक होकर उसे हरा देते हैं। पहचान पाने के लिए पेद्दी क्रिकेट छोड़कर, पहलवान बन जाता है ताकि गोल्ड मेडल जीतकर पहचान हासिल कर सके। फिर सम्मान पाने के लिए पेद्दी कुछ ऐसा करता है, जो किसी ने सोचा भी नहीं हाेता।