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Shivaji Satam Interview: एसीपी प्रद्युम्न जितना किसी को नहीं मिला प्यार, सुनाए 'कुछ तो गड़बड़' है के किस्से

सार

'सीआईडी' दूसरे सीजन के साथ टीवी पर वापसी कर रहा है। शो में एसीपी प्रद्युम्न का किरदार निभाने वाले अभिनेता शिवाजी साटम ने 'अमर उजाला' के साथ शो के नए सीजन पर बातचीत की। चलिए जानते हैं उन्होंने क्या-क्या कहा...
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शिवाजी साटम - फोटो : अमर उजाला
टीवी का हिट शो 'सीआईडी' 21 जनवरी 1998 में शुरू हुआ था, जिसे दर्शकों का खूब प्यार मिला। इसका आखिरी एपिसोड 2018 में प्रसारित हुआ था। अब छह साल के अंतराल के बाद यह शो दूसरे सीजन के साथ वापसी कर रहा है और दर्शकों का फिर मनोरंजन करने के लिए तैयार है। 'सीआईडी सीजन 2' 21 दिसंबर से शुरू होगा। हाल ही में शो में एसीपी प्रद्युम्न का किरदार निभाने वाले दिग्गज अभिनेता शिवाजी साटम ने अमर उजाला के साथ शो की वापसी को लेकर बात की और इस दौरान उन्होंने शो को लेकर कई दिलचस्प खुलासे भी किए। यहां पढ़िए अमर उजाला के साथ शिवाजी साटम के बातचीत के मुख्य अंश...
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'सीआईडी' में शिवाजी साटम - फोटो : अमर उजाला
सीआईडी का दूसरा सीजन छह साल बाद वापस आ रहा है तो एसीपी प्रद्युम्न के रूप में दर्शक आपके किरदार से क्या अपेक्षा कर सकते हैं?
इस सीजन में पहले से भी ज्यादा मजा मिलेगा। हमारी स्टाइल नहीं बदली, हम तो वैसे ही हैं, लेकिन स्क्रीन बदल गई है। प्रेजेंटेशन की तकनीक बदल गई है। प्रद्युम्न, दया, अभिजीत और सालुंखे भी वैसा ही रहेगा, बस बैकग्राउंड बदल गया है। प्रोडक्शन वैल्यू बढ़ गई है। शो देखने का अनुभव पहले से ज्यादा अच्छा रहेगा। सिनेमैटिक अनुभव भी बहुत अच्छा रहेगा। इतना जरूर बोल सकता हूं कि कुल मिलाकर दर्शकों को इस बार शो देखते वक्त पहले से ज्यादा मजा आने वाला है।
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शिवाजी साटम - फोटो : एक्स
सीआईडी का पहला सीजन खत्म होने के बाद आपके करियर पर किया तरह का प्रभाव पड़ा और उस किरदार के बिना आपके जिंदगी में क्या बदलाव आए?
मेरे जीवन पर कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि उन छह साल में तीन साल तो कोविड में चले गए। तीन साल हम सभी वैसे ही परेशान रहे और उस समय हमारी फिल्में तो चलती ही थीं। उस समय मैंने वो काम भी किए, जो मुझे दिल से अच्छे लगे। मैंने अभिनय जारी रखा। जो मेरे मन को भाया, वो मैं करता गया। हां, खालीपन तब आता है, जब 22-25 साल की साख होती है और वो टूट जाती है तो दिल में दुख तो होता ही है। तीन साल कोविड में गुजरने के बाद खास प्रभाव नहीं पड़ा। बाकी के तीन साल तो काम किया, जैसे विज्ञापन किए, मराठी फिल्में कीं, हिंदी फिल्में कीं, इन्हें करने में खूब मजा आया। मैंने ऐसा समझता हूं कि ऊपर वाला जो करता है, अच्छे के लिए करता है। हम उन पर विश्वास करेंगे तो सब ठीक हो जाता है।

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सीआईडी की टीम - फोटो : इंस्टाग्राम
'सीआईडी' में जिस तरह से ऑनस्क्रीन सह-कलाकारों के साथ आपके संबंध रहे तो क्या वैसे ही असल जिंदगी में भी हैं?
बिल्कुल, हमारी दोस्ती अब भी बरकरार है। छह साल के अंतराल पर भी हम एक-दूसरे के करीब रहे। हफ्ते में एक से दो बार फोन पर बात होती है। पिछले दो महीने से तो लगातार मिलते ही हैं, लेकिन उससे पहले ही बातें होती रहती थीं। उससे पहले भी कभी-कभी मिलते थे। साथ खाना खाने जाते थे, ऐसा नहीं होता था कि शो बंद हो गया तो एक-दूसरे से अलग हो गए तो भूल गए। ऐसा बिल्कुल नहीं है। हालांकि, और भी हम एक-दूसरे से बात करना चाहते थे और हमें मजा आता था।
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शिवाजी साटम - फोटो : एक्स
आपने कई फिल्मों में भी काम किया है तो आपको बॉलीवुड में ज्यादा काम करने में अच्छा लगा या टीवी में?
मैं एक्टर हूं। अभी भी मुझसे मेरे पसंदीदा काम करने के लिए पूछा जाएगा तो मैं कहूंगा मराठी रंगभूमि का थिएटर। अब वह नहीं है तो ठीक है। मैं अभिनय करता हूं। जैसे एक क्रिकेटर को किसी भी जगह क्रिकेट खेलने में मजा आएगा, चाहे मैदान हो या बड़ा स्टेडियम, वैसे ही अभिनेता के तौर पर मुझे भी अभिनय करने में मजा आता है। ऐसा नहीं कहूंगा कि मुझे बॉलीवुड में मजा नहीं आता या टेलीविजन पर मजा नहीं आता। हां, अभी भी जो मैं दिल से कर सकता हूं, वो है मराठी रंगमंच भूमि, लेकिन काफी साल हो गए। शुरुआत वही से हुई थी।
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शिवाजी साटम - फोटो : एक्स
और आपकी पसंदीदा फिल्म कौन सी है? फिल्मों का चयन करते समय आप क्या सोचते हैं?
जहां तक पसंदीदा फिल्मों की बात है तो कोई एक फिल्म नहीं, बल्कि बहुत सारी पसंदीदा फिल्में हैं। देवानंद साहब के 'गाइड' है, 'मदर इंडिया', 'मुगल-ए-आजम', 'सुजाता' और 'नंदिनी' जैसी बहुत सारी फिल्में हैं। अभी की फिल्मों में टीवी पर हाल ही में 'पुष्पा 1' देखी थी, मजा आया। मेरा सबसे फेवरेट हीरो तो रजनीकांत ही है और वो भी कॉलेज के दिनों से। पुराने हीरो, पुरानी फिल्मों और पुराने गानों की बात ही कुछ और है। फिल्म 'नायक' में मेरा किरदार बहुत प्यारा है, एक दम नैचुरल किरदार है, मुझे बहुत पसंद है। मैंने अभिनेता के तौर पर वही फिल्में चुनता हूं, जिसकी कहानी या किरदार मुझे पसंद आ जाता है। वहीं, 'फिजा' में मेरा बहुत कम रोल है, लेकिन वो किरदार मुझे बहुत प्यारा लगा, इसलिए मैंने वह फिल्म की। मैंने कभी पैसे के लिए फिल्में नहीं करता, शायद ये हमारे थिएटर के डिसिप्लिन हैं।
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शिवाजी साटम और आदित्य श्रीवास्तव के साथ दयानंद शेट्टी - फोटो : इंस्टाग्राम
आपने यूं तो कई भाषाओं की फिल्में कीं, लेकिन पहचान एसीपी प्रद्युम्न के रूप में मिली तो क्या इस किरदार की वजह से आपको कोई फिल्म ऑफर हुई
नहीं, इसकी वजह से कोई फिल्म ऑफर नहीं हुई है। मैंने थिएटर एक्टर हूं और मैंने फिल्मों में कई किस्म के रोल किए हैं, उनकी वजह से मुझे फिल्में ऑफर होती हैं। 'सीआईडी' की वजह से कोई फिल्म ऑफर नहीं हुई है और होंगी भी तो मैंने कर भी नहीं पाऊंगा, लेकिन वो फिल्म करना ही क्यों है, जब मेरी सीआईडी इतनी अच्छी चल रही है तो मैंने मैं क्यों करूंगा फिल्में। हां, फिल्में तब कर सकता हूं, जब सारे डेट्स मैनेज हो रहे हैं, क्योंकि फिल्में करने के लिए बहुत वक्त चाहिए। हो सकता है कि भविष्य में कोई दिलचस्प फिल्म आएगी तो आगे चलकर कर भी लूंगा।

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शिवाजी साटम - फोटो : इंस्टाग्राम
सीआईडी का आपका मशहूर डायलॉग 'कुछ तो गड़बड़ है' बहुत फेमस हुआ, जिस पर आज भी कई मीम्स बनते हैं तो उन्हें देखते हैं आपको कैसा लगता है?
मैं असल जिंदगी में एसीपी प्रद्युम्न की तरह 'कुछ तो गड़बड़' है नहीं बोलता। हां, ये बहुत अच्छी तारीफ है और सराहना है हमारे लिए कि लोग छोटी-छोटी बातों से प्यार करते हैं। हमने जब एपिसोड शुरू किए थे तो यह बहुत साधारण संवाद था, लेकिन हमें पता नहीं था कि लोग इसे कहां लेकर जाएंगे और दिल में बसा लेंगे और इसके जरिए मजे लेंगे। मीम्स देखकर बहुत अच्छा लगता है। मेरे पास भी कई मीम्स हैं, जिन्हें देख के मैं बहुत हंसता हूं और बहुत मजा आता है। मुझे लगता है कि जितना प्यार इस किरदार को मिला है तो उतना प्यार और किसी विषय को नहीं मिला या अन्य कलाकारों के किरदारों को इतना प्यार नहीं मिला। बड़े-बड़े स्टार्स हैं हमारे देश में दुनिया में, हो सकता है मैं गलत हूं, लेकिन मुझे लगता है कि एसीपी प्रद्युम्न जितना प्यार और किसी किरदार को शायद ही मिला हो। चार पीढ़ी देखती आई है हमारी सीआईडी को और उन्हें सभी पीढ़ियों के लोगों का खूब प्यार भी मिला। लोग रिपीट टेलीकास्ट भी देखते थे और अब तो नया सीजन आ रहा है और भी मजा आएगा।

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सीआईडी सीजन 2 - फोटो : इंस्टाग्राम @sonytvofficial
नए सीजन के साथ क्या नई कहानियां होंगी? और इस बार किस स्तर के क्राइम की कहानियों को दिखाया जाएगा?
इस नए सीजन में पहले से भी बड़े स्केल्स पर कहानियां हैं। रेलवे की है, मेट्रो में हुए क्राइम की कहानियां भी होंगी। एयरक्राफ्ट में भी क्राइम की कहानियां होंगी। धीरे-धीरे सब आएगा। कहानियों का विस्तार होगा। बड़े पैमाने पर कहानियां होंगी। साइबर क्राइम पर भी कहानी होगी। सीआईडी इस पर आधारित है कि क्राइम कैसे सुलझाना है। क्राइम कैसे करना है, वो हम नहीं बताते हैं, जैसे अपराधी को कैसे पकड़ा, वो बताएंगे हम तो इन्वेस्टिगेशन पर कहानियां होंगी। बच्चों और स्त्रियों पर जो अत्याचार होते हैं अलग अलग किस्म के, वो हमने आज तक सीआईडी में नहीं बताए हैं। जब यह शो बना था, तभी तय किया गया था कि ये सब नहीं बताएंगे, बस हम दर्शकों का मनोरंजन करेंगे और सामाजिक गया भी देंगे। अपराध करने के तरीके नहीं, बल्कि इन्वेस्टिगेशन के अलग-अलग तरीके बताएंगे।

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दिवंगत अभिनेता दिनेश फडनीस - फोटो : एक्स
सीआईडी में फ्रेडरिक्स का किरदार निभाने वाले अभिनेता दिनेश फडनीस अब इस दुनिया में नहीं हैं तो उनके बिना सीआईडी सीजन 2 कुछ अधूरा सा रहेगा?
फ्रेडी हमारा बहुत प्यारा और अच्छा दोस्त था। दिनेश बहुत मस्ती में रहता था। दुख तो होता है। खैर, क्या करें अब, जिंदगी है, चलती रहनी चाहिए। दिनेश के बिना सीआईडी अधूरा नहीं रहेगा, क्योंकि एक सीधी बात है कि कोई जाता है तो उसकी जगह कोई और लेता है। सबके लिए वह फ्रेडी था और हमारे लिए वह दिनेश था, जो अब हमारे साथ नहीं है तो उसकी जगह कोई और होगा। जैसे हमारी जिंदगी में या घर कोई कोई हमसे दूर चला जाता है तो जिंदगी तो चलती रहती है न, धीरे-धीरे वो मीठी यादें रह जाती हैं, उसी की खुशियां मनाते हैं तो वो हमारी यादों में हैं। अभी पिछले महीने उन्हें गुजरे एक साल पूरा हुआ है और अब वह हमारी सुनहरी यादों में हैं।
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शिवाजी साटम - फोटो : इंस्टाग्राम
सीआईडी के साथ आपके आगामी प्रोजेक्ट्स क्या हैं? दर्शकों को आगे और क्या खास देखने को मिलेगा?
अरे बहुत कुछ, मैं तो बहुत कुछ करना चाहता हूं। जब कुछ अच्छा आएगा और मन को भाया तो हम करने की सोचेंगे, लेकिन अभी तो फिलहाल 'सीआईडी' ही है। हम भी शो शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं और मेरी तरफ से दर्शकों के लिए नए साल की ढेरों शुभकामनाएं हैं।
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