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Sayaji Shinde Birthday: मनोज बाजपेयी के साथ एक ही फिल्म से छाए सयाजी शिंदे, शोहरत से दूर शांति में ढूंढा जीवन

Mon, 13 Jan 2025 09:31 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Sayaji Shinde Birthday: अभिनेता सयाजी शिंदे पर्दे पर अभिनय का हर एक रंग बिखरने में कामयाब रहे हैं, जिसके लिए उन्हें फैंस ने हमेशा प्यार भी दिया है। अभिनेता आज अपना 66वां जन्मदिन मना रहे हैं। चलिए जानते हैं उनके कुछ दिलचस्प किस्से...
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सयाजी शिंदे - फोटो : अमर उजाला
कभी खतरनाक खलनायक बनकर डराया तो कभी विलेन के रूप में भी दर्शकों को हंसाया। कभी अदाकारी से लोगों को रुलाया भी तो कई बार कुछ सिखाया भी, अभिनय के जरिए सयाजी शिंदे फैंस को जिंदगी के कई रूप दिखा चुके हैं। साथ ही उन्होंने दर्शकों को कई अवतारों में उनका मनोरंजन कर अभिनय के रंग दिखाया और अदाकारी के रस का स्वाद भी चखा दिया। फिल्मों से अलग कई बार वे जिंदगी का बड़ा सबक देने में भी कामयाब रहे। आज अभिनेता अपना 66वां जन्मदिन मना रहे हैं। चलिए इस खास मौके पर आपको बताते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
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सयाजी शिंदे - फोटो : इंस्टाग्राम
अभिनय से पहले नौकरी करते थे सयाजी
सयाजी शिंदे का जन्म जनवरी 1959 में महाराष्ट्र में एक किसान परिवार में हुआ। अभिनेता कई दफा फिल्मी दुनिया में अपने संघर्ष की कहानी बयां कर चुके हैं। किसान परिवार में जन्मे सयाजी को भी दूसरों की तरह सुबह से शाम तक काम करना पड़ता था। उनके माता-पिता चाहते थे कि उनके बेटे को अच्छी शिक्षा मिले, क्योंकि सयाजी शिंदे पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। पढ़ाई के साथ-साथ पैसे कमाने के लिए उन्होंने चौकीदारी का काम करना शुरू कर दिया। सयाजी शिंदे एक चौकीदार के रूप में प्रति माह 165 रुपये कमाते थे। बाद में उन्हें क्लर्क की नौकरी मिल गई।
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सयाजी शिंदे - फोटो : इंस्टाग्राम
थिएटर से फिल्मों तक का सफर
सयाजी शिंदे को बाद में एक बैंक में नौकरी मिल गयी। इसी बीच उनकी मुलाकात सुनील कुलकर्णी से हुई, जो थिएटर में काम करते थे। यहीं पर सयाजी शिंदे की राय बदल गई. बाद में उन्होंने नौकरी के साथ-साथ नाटक में भी काम करना शुरू कर दिया। सयाजी उस समय कई मराठी नाटकों में अभिनय कर रहे थे, लेकिन 1987 के नाटक झुलवा में उनका अभिनय लोगों को पसंद आया। इसके साथ ही वह करीब 17 साल से एक बैंक में नौकरी कर रहे थे।

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सयाजी शिंदे - फोटो : इंस्टाग्राम
खलनायक बन इंडस्ट्री में छाए
सयाजी शिंदे अपने अभिनय के सपने को पूरा करने के लिए मुंबई आए। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह हीरो बनेंगे। वह बस खलनायक ही बनना चाहते थे। सयाजी शिंदे ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर मैं किसी फिल्म में विलेन का किरदार निभाऊं तो मैं चाहता हूं कि लोग मुझे विलेन समझें। उन्होंने मराठी के साथ-साथ कई साउथ फिल्मों में भी काम किया है। वह साउथ में विलेन के तौर पर सुपरहिट हैं।
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शूल - फोटो : यूट्यूब
मनोज बाजपेयी के साथ फिल्म
सयाजी शिंदे मराठी फिल्मों में तो काम कर रहे थे, लेकिन हिंदी सिनेमा में उनका सफर शुरू नहीं हुआ था, तभी उन्हें शूल फिल्म का ऑफर मिला। यह फिल्म उन्हें मनोज बाजपेयी के जरिए मिली थी, जिन्होंने इस फिल्म में पुलिस का किरदार निभाया था। इस फिल्म में सयाजी ने बच्चू यादव का किरदार निभाया था। इस फिल्म के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा पर अपनी छाप छोड़ी। 'शूल' के बाद सयाजी को नई पहचान मिली। एक ही फिल्म से मनोज बाजपेयी और सयाजी ने सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं, लेकिन वह मनोज बाजपेयी की तरह शौहरत हासिल नहीं कर पाए और इस बाद का उन्हें मलाल भी नहीं है, क्योंकि सयाजी का जिंदगी जीने का एक अलग ही नजरिया है।  
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सयाजी शिंदे - फोटो : इंस्टाग्राम
सिनेमा के अलावा भी एक अलग जिंदगी जीते हैं सयाजी
भले ही 'शूल' के बाद सयाजी को कई फिल्में मिलीं और उन्होंने बहुत सी फिल्मों में खलनायक का किरदार निभाया, लेकिन वह फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच शांतिपूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं। उन्होंने खुद खुलासा किया था कि उनके लिए सिनेमा और जिंदगी, दोनों अलग-अलग चीजें हैं, जिन्हें वह साथ में नहीं रखना चाहते। हर किसी का नजरिया अलग होता है, लेकिन उनके लिए जिंदगी जीना भी बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए वह सारा समय सिनेमा पर नहीं देना चाहते। उनके लिए पैसे नहीं, बल्कि संतुष्टि और शांति मायने रखती है। वह ज्यादा काम करने तनाव नहीं लेना चाहते। वह दूसरों को हंसाने में विश्वास रखते हैं। सयाजी शिंदे एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वे लोगों से पेड़ लगाने का आग्रह करते हैं। किसान परिवार से होने के कारण वह पेड़ों के महत्व को अच्छी तरह से जानते हैं। उन्होंने खुद 25 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए हैं।
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