मराठी फिल्म से किया डेब्यू
सदाशिव अमरापुरकर का जन्म 11 मई 1950 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ था। उनके करीबी लोग प्यार से उन्हें 'तात्या' कहते थे। सदाशिव अमरापुरकर ने अपने एक्टिंग के सफर की शुरुआत मराठी नाटकों से की थी। करीब 50 नाटकों में काम करने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में दस्तक दी। सदाशिव अमरापुरकर ने मराठी फिल्म से फिल्मी करियर शुरू किया, इसमें उन्होंने बाल गंगाधर तिलक का किरदार अदा किया। फिल्म का नाम था '22 जून 1897'।
'जिस्म के बाजार की महारानी' बन छाए
सदाशिव ने ‘हुकूमत’ (1987), 'एलान-ए-जंग' (1989), 'सड़क' (1991), 'छोटे सरकार' (1996) जैसी फिल्मों के जरिए खुद को साबित किया। 'सड़क' में सदाशिव अमरापुरकर ने एक किन्नर महारानी का किरदार निभाया था, जो लोगों को काफी पसंद आया। इसके बाद उन्हें 'बॉलीवुड की महारानी' कहा जाने लगा। 'सड़क' के लिए बेस्ट विलेन का अवॉर्ड दिया गया। इस फिल्म में अमरापुरकर का डायलॉग 'मैं हूं इस जिस्म के बाजार का महाराजा और नाम है महारानी' छा गया था। सदाशिव ने धर्मेंद्र, गोविंदा, अमिताभ बच्चन, आमिर खान, संजय दत्त और सलमान खान समेत कई बड़े सितारे के साथ काम किया। खलनायक का किरदार निभाने के साथ-साथ उन्होंने कॉमेडी फिल्मों में भी हाथ आजमाया।
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बन गए धर्मेंद्र के पसंदीदा विलेन
बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र को भी सदाशिव अमरापुरकर के कायल रहे। उन्हें अभिनेता का अंदाज इतना पसंद आया कि सदाशिव धर्मेंद्र के अपोजिट उनके पसंदीदा विलेन हो गए। कहा जाता है कि धर्मेंद्र उन्हें अपना 'लकी चार्म' मानने लगे थे। सदाशिव अमरापुरकर उनके साथ दो-चार नहीं बल्कि 11 फिल्मों में नजर आए। विलेन के किरदार से दिल जीत चुके सदाशिव अमरापुरकर ने 90 के दशक में सह कलाकार के रूप में थोड़ा कॉमेडी की तरफ भी रुख किया। सदाशिव की आखिरी हिंदी फिल्म थी दिबाकर बनर्जी की 'बॉम्बे टॉकीज' जिसमें उन्होंने कैमियो रोल किया था। 3 नवंबर 2014 को फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण अभिनेता का निधन हो गया।
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