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Rituparno Ghosh: रितुपर्णो घोष ने बंगाली सिनेमा को दिया था नया मुकाम, 12 नेशनल अवॉर्ड किए अपने नाम

Thu, 31 Aug 2023 09:49 AM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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रितुपर्णो घोष - फोटो : अमर उजाला

अभिनय इंडस्ट्री में आना हर कलाकार का बहुत बड़ा सपना होता है। हालांकि, सबके लिए इस इंडस्ट्री की राहें आसान नहीं होती। इस दलदल को वही पार कर पाता है, जिसके सपनों में कोई दम होता है। क्या आपने कभी सुना है कि कभी किसी ने अपने सपने को साकार करने के लिए अपना जेंडर ही बदल लिया हो। नहीं ना। तो आज के इस लेख में हम आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी कला के लिए खुद को पुरुष से महिला बना लिया था। बेहद कम उम्र ही कई नेशनल अवॉर्ड्स को भी अपने नाम किया था। तो चलिए जानते हैं।

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रितुपर्णो घोष - फोटो : सोशल मीडिया

रितुपर्णो घोष का जन्म 31 अगस्त 1963 को कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता सुनील घोष डॉक्युमेंट्री फिल्ममेकर और पेंटर थे। इसलिए उन्होंने भी इसी फील्ड में अपना करियर बनाने का फैसला किया। रितुपर्णो घोष के फिल्मों की खासियत होती थी कि वह महिलाओं पर केंद्रित होती थीं। हालांकि, बहुत कम उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान को आज भी याद किया जाता है।

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रितुपर्णो घोष - फोटो : सोशल मीडिया

गौरतलब है कि रितुपर्णो घोष भले ही एक पुरुष थे, लेकिन उन्हें महिलाओं की तरह सजना संवरना काफी पसंद था। यही कारण था कि वह अपनी फिल्मों में बेबाकी से अपनी जटिल सेक्सुअलिटी को स्वीकार्य करते थे। रितुपर्णो घोष ने होमोसेक्सुअल पर्सनैलिटी के बारे में बिना किसी झिझक के खुलेआम बात की थी। वह LGBTQ पर बोलने वाले भी पहले सिनेमाई शख्स थे।

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रितुपर्णो घोष - फोटो : सोशल मीडिया

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खुद को स्वीकार करने के बाद रितुपर्णो घोष पूरी तरह से एक महिला बनना चाहते थे। अपनी इस चाहत को साकार करने के लिए उन्होंने सर्जरी कराई और हार्मोन थेरेपी का सहारा भी लिया। कहते हैं कि इसी वजह से उनके शरीर में कई साइड इफेक्ट्स हुए और 30 मई 2013 को हार्ट अटैक से उनकी कोलकाता में मौत हो गई थी।

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रितुपर्णो घोष - फोटो : सोशल मीडिया

खबरों की मानें तो कहा जाता है कि जब रितुपर्णो घोष महिलाओं की तरह ही साड़ी और सलवार-कुर्ता पहनने लगे थे तो लोगों ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी थी। जब उनकी मौत हुई तो उनका कोई भी करीबी आसपास नहीं था। बता दें कि अलग तरह की फिल्म बनाने वाले घोष को 49 साल की उम्र में 12 बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स से नवाजा गया। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली तीनों भाषाओं में फिल्में कीं।

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