लालबाजार
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रंगन चक्रवर्ती के लिखे लाल बाजार को सजल आनंद ने हिंदी का नया कलेवर दिया है। ये कलेवर आपको कुछ कुछ सुरेंद्र मोहन पाठक और वेद प्रकाश शर्मा के जासूसी उपन्यासों के करीब ले जाता है। हिंदी पट्टी में दोनों लेखकों के उपन्यासों की जो लोकप्रियता रही है, लाल बाजार सीरीज उसी पसंद को वीडियो रूप में आगे बढ़ाती दिखती है। कौशिक सेन, सब्यसाची चक्रवर्ती, सुब्रत दत्ता, दिब्येंदु भट्टाचार्य के कंधे से कंधे मिलाती यहां दिखती हैं ऋषिता भट्ट और रंजिनी चकव्रर्ती।