वक्त
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किसी मल्टीस्टारर फिल्म का मतलब इन दिनों एक से ज्यादा हीरो या एक से ज्यादा हीरोइन भर से होता है, लेकिन यहां तो सितारों की पूरी बारात है। तो चलिए आगे बढ़ने से पहले गिनती करते चलते हैं। बलराज साहनी, सुनील दत्त, साधना, राजकुमार, शशि कपूर, शर्मिला टैगोर, अचला सचदेव, रहमान, मदन पुरी, मनमोहन कृष्ण, लीला चिटनिस, जीवन, सुरेंद्र नाथ, सुमति गुप्ते, शशिकला, हरि शिवदासानी, मोतीलाल, मुबारक, जगदीश राज, सुरेंद्र राही और बद्री प्रसाद। देखा आपने, सिर्फ नाम लिखते लिखते हम चौथी लाइन में आ गए। इनके किरदारों का विस्तार देखने के लिए तो आपको फिल्म ही देखनी पड़ेगी, लेकिन इस लिस्ट में धर्मेंद्र का नाम नहीं है तो बस उनकी मर्जी से। निर्देशक यश चोपड़ा ने फिल्म में राजा का किरदार पहले धर्मेंद्र को ही ऑफर किया था लेकिन वह बड़ा भाई नहीं बनना चाहते थे। यही किरदार फिल्म में राजकुमार ने किया है। हालांकि, 'वक्त' के तुरंत बाद बनी यश चोपड़ा की फिल्म 'आदमी और इंसान' में काम करने को धर्मेंद्र ने जरूर हामी भर दी।
फिल्म 'वक्त' एक तरह से किस्मत के हाथों खेला गया असली सा लगने वाला स्क्रीनप्ले है। फिल्म को लिखने के लिए इसके निर्माता बी आर चोपड़ा ने उस वक्त के सबसे काबिल कारिंदों को लगाया। इनमें शामिल थे बिजनौर में जन्मे मशहूर शायर व राइटर अख्तर उल इमान और सईद मिर्जा व अजीज मिर्जा जैसे मशहूर फिल्म डायरेक्टर्स के पिता अख्तर मिर्जा। अख्तर एंड अख्तर कंपनी ने मिलकर जो कमाल की लाइनें और कमाल के सीन फिल्म के लिए गढ़े, उन्होंने दोनों को फिल्म फेयर अवार्ड भी दिलवाए। फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवार्ड और मिले, एक तो बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला यश चोपड़ा को, दूसरा बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड मिला राज कुमार को और तीसरा बेस्ट सिनेमैटोग्राफर का अवार्ड मिला बी आर चोपड़ा व यश चोपड़ा के भाई धर्म चोपड़ा को। इनके अलावा 'वक्त' को बेस्ट फिल्म का और साधना को बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमीनेशन भी मिला।
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