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Movie Review: आनंद कुमार की ब्रांडिंग में ऋतिक रोशन के सपने काले कर गई 'सुपर 30'

Sun, 14 Jul 2019 02:22 PM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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super 30 - फोटो : Twitter
कलाकार: ऋतिक रोशन, मृणाल ठाकुर, आदित्य श्रीवास्तव, पंकज त्रिपाठी आदि
निर्देशक: विकास बहल
निर्माता: रिलांयस एंटरनटेनमेंट, फैंटम फिल्म्स, नाडियाडवाला ग्रांडसन एंटरटेनमेंट

 
हिंदी सिनेमा में हर कोई अब बलियाटिक होना चाहता है। चॉकलेटी बॉय वाले स्टूडेंट करण जौहर के सिनेमा में भी नहीं चल रहे। देश के सबसे बेहतरीन मॉडल रहे जॉन अब्राहम को बाटला हाउस के ट्रेलर में करिया होता देखने के बाद एशिया के सबसे कामुक इंसान का खिताब पाने वाले ऋतिक रोशन की बारी आई। देश में गरीब होना सिनेमा में काला होने की पहली शर्त है। 
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super 30 - फोटो : Twitter
हिंदी सिनेमा में कोई गरीब आखिर हीरो कैसे बनता है? उसके हाथ से एक बड़ा मौका निकलना चाहिए। फिर उसे दूसरों की मदद के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देना चाहिए और फिर..। फिर क्या, हिंदी सिनेमा का फॉर्मूला हीरो ऐसा ही होता है। देखा नहीं अक्षय कुमार को अपनी फिल्मों टॉयलेट एक प्रेम कथा, पैडमैन और गोल्ड में सिर पर तेल चुपड़े, एक तरफ मांग निकालकर कर कंघी किए गरीब आदमी का रूप धरते हुए। देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सितारे वो इन्हीं फिल्मों से बने हैं।
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Hrithik Roshan - फोटो : social media
सिनेमा जब कहानी नहीं सुनाता है औऱ दर्शकों को बनाने की कोशिश करता है तो सुपर 30 जैसी फिल्में बनती हैं। विकास बहल की सिनेमा की पढ़ाई अनुराग कश्यप स्कूल में हुई है। ये ऐसा स्कूल है जहां सैकड़ों विदेशी फिल्में देखने के बाद उनके बेहतरीन सीन स्टॉक कर रखे जाते हैं और फिर देसी कहानियों के चूल्हे पर चढ़ने का मौका आते ही ये सीन छौंक लगाने का काम करते हैं। कोई भी उद्देश्य किसी एक से नहीं पूरा होता, इसके लिए अनेक लोगों की जरूरत होती है। लेकिन, सुपर 30 देखने के बाद अगर आपको आनंद कुमार की क्लास में पढ़े किसी एक छात्र का भी नाम, उसकी पृष्ठभूमि या आईआईटी में पहुंचने की उसकी अपनी जद्दोजहद याद रह जाए तो बड़ी बात है।

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hrithik roshan - फोटो : file photo
फिल्म की कहानी आनंद कुमार की है। आनंद कुमार ने खुद ही लेखक के साथ बैठकर फिल्म लिखवाई है। विकास बहल को बतौर निर्देशक अपने बायोडाटा में एक बायोपिक जोड़नी थी तो बस फिल्म बन गई। अच्छा हुआ अक्षय कुमार ने ये फिल्म हाथ में आने के बाद भी जाने दी। संजू से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक सिनेमा के जरिए दर्शकों के बीच एक शख्सीयत की ब्रांडिंग की कोशिश की गई है। सुपर 30 भी वही करती है। बस फर्क ये है कि आनंद कुमार को संजय दत्त जैसी न शोहरत मिली और न ही बदनामी। बीजेपी को रिकॉर्डतोड़ मतों से जिताने वाली जनता जब पीएम नरेंद्र मोदी देखने नहीं गई तो सुपर 30 के लिए उनसे उम्मीदें लगाना बेमानी है।
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super 30 - फोटो : social media
ऋतिक रोशन ने चेहरे की चीक बोन्स छुपाकर, अपने सिक्स पैक ऐब्स को ढीली शर्ट में ढककर और पूरे शरीर पर तमाम रंग पोतकर खुद को बिहारी बनाने की कोशिश की। लेकिन, बिहारी होना शान की बात है। गरीबी में उसका रंग और निखरता है। रंग अदाकारी का ऋतिक रोशन का भी निखरा है, लेकिन इसके लिए उनको इतना दीन-हीन दिखने की जरूरत नहीं है। ऐक्टिंग वही है जो परदे पर ऐक्टिंग न लगे, नहीं तो परदे पर ऐक्टिंग करने में होने वाली मेहनत दिखाने का रिकॉर्ड तो सुनील शेट्टी कब का बना चुके हैं। 
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Super 30 - फोटो : Social Media
आदित्य श्रीवास्तव, पंकज त्रिपाठी, नंदीश सब अपनी अपनी जगह फिट मोहरे हैं, पर मृणाल ठाकुर की ताजगी के आगे ये सब भी फीके दिखते हैं। विकास बहल ने एक गलती और की है और वह है मराठी म्यूजिक एक्सपर्ट अजय-अतुल से एक बिहारी पृष्ठभूमि वाले सुरों की उम्मीद करके। आनंद कुमार की कहानी अगर आपको बहुत प्रेरित करती हो या फिर ऋतिक के आप एवेंजर्स टाइप फैन हों, तो फिल्म देखी जा सकती है, नहीं तो घर में बैठिए, दो महीने बाद किसी न किसी ओटीटी पर दिख ही जाएगी। औसत और अच्छी के बीच झूलती फिल्म सुपर 30 को अमर उजाला के मूवी रिव्यू में मिलते हैं दो स्टार। 
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