शमा कहे परवाने से, परे चला जा
मेरी तरह जल जाएगा, यहां नहीं आ..
वो नहीं सुनता उसको जल जाना होता है
हर खुशी से, हर ग़म से, बेगाना होता है...
आनंद बख्शी ने ये गाना राजेश खन्ना की साल 1971 के पहले महीने में रिलीज हुई फिल्म कटी पतंग के लिए लिखा था लेकिन अगर आपने अमिताभ बच्चन की इस फिल्म के पांच महीने बाद रिलीज हुई फिल्म परवाना देखी है तो आपको लगेगा कि ये गाना शायद इस फिल्म के लिए बिल्कुल मुफीद होता। गाने फिल्म परवाना के भी जबर्दस्त रहे। कैफी आजमी की कलम और मदन मोहन जैसे संगीतकार की धुनें। दिल से बस एक ही बात निकलती है, वाह! फिल्म परवाना हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है, लेकिन फिल्म के बारे में चर्चा करने से पहले सुन लेते हैं फिल्म का वो गाना, जो मेरा भी बड़ा फेवरिट है, सिमटी सी शरमाई सी, किस दुनिया से तुम आई हो, कैसे जहां में समाएगा....