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Movie Review: इन 5 गलतियों ने किया सोनम कपूर की नई फिल्म का बेड़ा गर्क

Fri, 01 Feb 2019 03:35 PM IST
शिप्रा सक्सेना मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga - फोटो : twitter
मूवी रिव्यू: एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
कलाकार: सोनम कपूर, अनिल कपूर, जूही चावला, रेजिना कैसेंड्रा और राजकुमार राव आदि
निर्देशक: शैली चोपड़ा
रेटिंग: **

इस्मत चुगताई की कहानी लिहाफ से मिलती जुलती कहानी पर जब निर्देशक दीपा मेहता ने 1996 में शबाना आजमी और नंदिता दास को लेकर फिल्म 'फायर' बनाई तो न तो ट्विटर था, न इंस्टाग्राम था और न ही किसी फिल्म को दर्शकों को दिखाने से पहले अपने खेमे के फिल्मी कलाकारों को दिखाकर उनसे फिल्म की तारीफें करवाने का रिवाज ही था। 
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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga - फोटो : file photo
अगर फिल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' कि तमाम फिल्मी कलाकारों और निर्देशकों की तारीफों को पढ़ने, सुनने के बाद आपको लगा हो कि सोनम कपूर की यह नई फिल्म फायर से आगे की बात करेगी तो आप बुद्धू बन चुके हैं। विधु विनोद चोपड़ा की बहन शैली चोपड़ा की यह पहली फिल्म विचार के स्तर पर ही आकर्षित करती है। सिनेमा हॉल से निकलने के बाद आपके साथ रह जाता तो सिर्फ अफसोस कि राजकुमार राव जैसे काबिल कलाकार ने एक और 'फन्ने खां' क्यों अपनी फिल्मोग्राफी में जोड़ ली।
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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga
पंजाब में मोगा के एक पंजाबी परिवार की लड़की अपनी सहेली से प्यार कर बैठती है। दादी जी जब उसके लिए दूल्हे की तलाश में परेशान हो रही होती हैं और पापा जी अपनी बिटिया पर लट्टू होने के बीच खुद भी प्यार मोहब्बत की पींगें बढ़ा रहे होते हैं तो कहानी में साहिल मिर्जा आ जाता है। यह किरदार ही इस फिल्म का सबसे बड़ा स्पीड ब्रेकर है। एक अच्छी खासी चलती फिरती कहानी इस मोड़ पर आकर यूं ही खड़ी हो जाती है कि फिर उसके बाद निर्देशक को समझ ही नहीं आता कि आगे करे तो क्या करे? दीपा मेहता और शैली चोपड़ा के निर्देशन का यही बुनियादी अंतर है। 

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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga - फोटो : twitter
समलैंगिक रिश्तों पर हिंदी सिनेमा में पहले भी फिल्में बनती रही हैं। पर, विदेशी फिल्म कंपनी फॉक्स स्टार की हिंदुस्तानी मार्केटिंग टीम के मुंबई से विरार से आगे की न सोच पाने की जिद का ही नतीजा है कि इस फिल्म की ओपनिंग तक सही नहीं लगी है। हिंदी पट्टी के आधे दर्शकों को पता ही नहीं है कि फिल्म का विषय क्या है और आखिर वह ये फिल्म देखने वो जाएं क्यों? 
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ek ladki ko dekha toh aisa laga - फोटो : social media
फिल्म में सोनम कपूर ने अदाकारी डिपार्टमेंट में अपने कलेजा निकालकर रख दिया है। उनके भीतर शबाना आजमी और स्मिता पाटिल की कतार में शामिल होने का पूरा माद्दा भी दिखता है लेकिन उन्हें अब आलिया भट्ट, कृति सैनन या श्रद्धा कपूर के मुकाबले में बने रहने की जिद छोड़नी होगी। वह दमदार अदाकारा हैं पर निर्देशक वह सही नहीं चुन पातीं। वीरे दी वेडिंग के बाद सोनम कपूर ने ये लगातार दूसरी गलत फिल्म चुनी है। नीरजा के बाद से सोनम कपूर के प्रशंसक उनसे इन किरदारों से कहीं बेहतर किरदार की उम्मीद रखते हैं।
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Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga - फोटो : twitter
कहानी और निर्देशन के बाद फिल्म की तीसरी सबसे कमजोर कड़ी है इसका संगीत। फिल्म के प्रमोशन में फिल्म का संगीत ही काम न आए तो ऐसे संगीत का कोई मतलब हिंदी सिनेमा में नहीं होता। मुंबई वितरण क्षेत्र में इस फिल्म की कमजोरी का फायदा ठाकरे को और बाकी हिंदी पट्टी के राज्यों में उरी को मिलता साफ दिखाई दे रहा है। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली रिव्यू में 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' को मिलते हैं दो स्टार।
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