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Movie Review: 'खानदानी शफाखाना' में सोनाक्षी की गजब एक्टिंग और वरुण की कॉमेडी, इतने मिले स्टार

Fri, 02 Aug 2019 12:24 PM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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khandaani shafakhana - फोटो : social media
Movie Review: खानदानी शफाखाना
कलाकार: सोनाक्षी सिन्हा, वरुण शर्मा, बादशाह. अन्नू कपूर औऱ कुलभूषण खरबंदा आदि।
निर्देशक: शिल्पी दासगुप्ता
निर्माता: मृगदीप सिंह लांबा, भूषण कुमार आदि।

सोनाक्षी सिन्हा की छवि हिंदी सिनेमा में गर्ल नेक्स्ट डोर की रही है। वह पड़ोस की रज्जो भी हो सकती है और मोहल्ले मोहल्ले घूमती बेबी बेदी भी। हिंदी सिनेमा में अछूते विषयों पर फिल्में बनाने की जो शुरूआत चोटी के सितारे आयुष्मान खुराना ने अपनी फिल्मों विकी डोनर और शुभ मंगल सावधान में की, उसे सोनाक्षी की नई फिल्म खानदानी शफाखाना आगे बढ़ाती है। फिल्म में ठहाके लगाने के मौके भी खूब हैं और इस वीकएंड पर परदे में ढकी बातों को सबके सामने लाने की निर्माता मृगदीप सिंह लांबा की ये कोशिश अच्छा टाइमपास साबित होती दिख रही है।
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Khandaani Shafakhana - फोटो : social media
मृगदीप सिंह लांबा वैसे तो फुकरे सीरीज के निर्देशक के तौर पर ही दर्शकों में मशहूर रहे हैं लेकिन इस बार वह फिल्म निर्माता भी बन गए हैं। नई निर्देशक शिल्पी दासगुप्ता के साथ मिलकर उन्होंने सिनेमा में एक हिम्मतवाला प्रयोग किया है। यौन विषयों पर हिंदी में फिल्म बनाना चुनौती भरा काम है। आयुष्मान खुराना की सफल कोशिशों के कंधों पर खानादानी शफाखाना को कामयाबी की ऊंची सीढ़ी तक ले जाने की कोशिश करने में फिल्म के सारे कलाकारों और तकनीशियनों ने एक जुट होकर मेहनत की है।
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Khandaani Shafakhana - फोटो : social media
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है फिल्म की कहानी एक यौन चिकित्सालय यानी खानदानी शफाखाना के इर्द गिर्द बुनी गई है। बेबी बेदी पंजाब के एक शहर में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का काम काम करती है। घर चलाने के लिए वह सुबह से लेकर शाम तक खूब सारे जतन करती है लेकिन उसकी मेहनत से घर बस किसी तरह चल जा रहा है। खबर आती है कि मामाजी गुजर गए। उनका पुराना क्लीनिक बेबी को विरासत में मिलता है पर शर्त ये है कि उसे पहले ये क्लीनिक छह महीने चलाकर दिखाना होगा। रुढ़ियों में जकड़े समाज में एक पुरुष के यौन चिकित्सालय तक जाने में लोगों के घुटने जवाब दे जाते हैं तो फिर एक लड़की को लोग अपनी यौन बीमारियां कैसे बताते हैं, इसी में लिपटी है खानदानी शफाखाना की कहानी।

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Sonakshi Sinha - फोटो : social media
फिल्म खानादानी शफाखाना की निर्देशक भले शिल्पी दासगुप्ता हैं लेकिन फिल्म की पूरी मेकिंग पर मृगदीप की फुकरे स्टाइल की छाप नजर आती है। फिल्म सिर्फ एक सेक्स कॉमेडी भर नहीं है, यह एक मजबूत संदेश भी देने की कोशिश करती है। इस मायने में शिल्पी की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने अपने करियर की शुरूआत के लिए लीक से हटकर एक ऐसी फिल्म चुनी जिसके लिए कलाकार तलाशना भी कम मुश्किल नहीं रहा होगा। शिल्पी के निर्देशन में फिल्म के हर किरदार को जरूरत के हिसाब से गढ़ा गया है और कॉमेडी के मसालेदार तड़कों के बीच शिल्पी अपनी बात दर्शकों के जेहन में बिठाने में सफल रहती हैं।
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सोनाक्षी सिन्हा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
बेबी बेदी के रोल में सोनाक्षी सिन्हा ने अपने करियर का एक और बेहतरीन किरदार निभाया है। वह हैरान परेशान पंजाबी लड़की के रूप में बिल्कुल फिट दिखती हैं और फिल्म में उनका द्वंद्व सबसे अच्छी तरह से उभरकर सामने तब आता है जब वह गलियों में अपनी क्लीनिक का प्रचार करने और लोगों से यौन बीमारियों के बारे में खुलकर बात करने का प्रचार करने निकलती हैं। 

फिल्म की हाईलाइट है चूचा यानी वरुण शर्मा की अदाकारी। वह आपको गुदगुदाते हैं और चेहरे पर हंसी अपने आप आ जाती है। वरुण की पिछली फिल्म अर्जुन पटियाला भले न चली हो लेकिन काम उनका वहां भी सही रहा था। इस फिल्म से वरुण के करियर को नई किक मिलती दिखती है। कुलभूषण खरबंदा को अरसे बाद परदे पर देखना सुखद रहा और अन्नू कपूर तो खैर हैं ही मिस्टर लाजवाब। हां, बादशाह को अभिनेता बनने के मोह से बचना चाहिए था, वह इसके लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।
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badshah
फिल्म तकनीकी तौर पर भी बेहतर दिखती है। पंजाब के खेतों, गलियों, चौराहों और चौबारों को ऋषि पंजाबी ने अच्छे तरीके से कैमरे में कैद किया है। देव राव जाधव की एडीटिंग भी चुस्त और चौकस है। टी सीरीज की फिल्मों में इधर एक दिक्कत लगातार दिख रही है और वह है इसकी फिल्मों का संगीत। संगीत में कुछ बेहतर प्रयोग करने की टी सीरीज को अब कोशिश करनी चाहिए और तनिष्क बागची जैसे रीमिक्स मास्टर्स से आगे बढ़कर अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना चाहिए। अमर उजाला के मूवी रिव्यू में फिल्म खानदानी शफाखाना को मिलते हैं तीन स्टार।
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