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Movie Review: कहीं ये सोलो फिल्म न कर दे तापसी का गेम ओवर!

Fri, 14 Jun 2019 01:23 PM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Taapsee Pannu - फोटो : social media
मूवी रिव्यू: गेम ओवर
कलाकार: तापसी पन्नू, विनोदिनी वैद्यनाथन आदि।
निर्देशक: अश्विन श्रवणन।
निर्माता: वाई नॉट स्टूडियोज, रिलायंस एंटरटेनमेंट।


हिंदी फिल्में बनाने वाले तो इसे गेम में माहिर थे ही अब साउथ वालों को भी इसका चस्का लग गया है। ये आदत है फिल्म की रिलीज से पहले अपनी फिल्म की तारीफों के पुल बंधवाने की। पहले ये काम फिल्म में काम करने वाले कलाकारों के साथी सितारे करते थे और अब ये किस्सा आम हो चला है। फिल्म गेम ओवर के प्रेस शो से पहले फिल्म बनाने वाली कंपनी ने इतने ट्वीट फिल्म की तारीफ में किए कि फिल्म देखते समय जब भी बोरियत सी महसूस हुई तो ये ट्वीट्स ही याद आते रहे। 
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Taapsee Pannu - फोटो : social media
खैर, अपना प्रोडक्ट बेचने की और इसकी मार्केटिंग करने की सबको आजादी है। फिल्में ही इससे क्यों अछूती रहें। अमिताभ बच्चन का फिल्म शान का एक शानदार संवाद है, ‘मैं हमेशा घर में घुसकर मारता हूं।’ घर में घुसकर मारना सिनेमा का एक बेहतरीन जॉनर भी है। राम गोपाल वर्मा ने फिल्म कौन में इसका बेहतरीन नमूना भी पेश किया। गेम ओवर में भी कोशिश यही है। दिक्कत ये है कि महिलाओं को डरी हुई, अंधेरे से भागती, किसी अनजान भय से घिरी हुई दिखाने के अलावा हॉरर का दूसरा कोई तरीका उनके पास नहीं है। और, तापसी पन्नू की शख्सीयत इसके ठीक उलट है।
 
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Taapsee Pannu - फोटो : social media
तापसी पन्नू की हिंदी सिनेमा में अलग पहचान ही इसीलिए बनी है कि उनके प्रशंसक उन्हें एक बिंदास और दबंग महिला के रूप में देखते हैं। सूरमा और मनमर्जियां से बनीं तापसी की इमेज पर भी ये फिल्म पानी फेरती है। आगे, सांड़ की आंख की राह का रोड़ा भी ये फिल्म बनती दिखती है। गेम ओवर न हॉरर फिल्म है और न ही साइकोल़ॉजिकल थ्रिलर। ये दोनों के बीच की ऐसी एक्सपेरीमेंटल है जिसमें हर चौथे सीन में कहानी का पांचवा सूत्र खुल जाता है। मकड़ी के जाले से फैली फिल्म में मकड़ी कौन है और जाले में फंसी मक्खी कौन, इसी गुत्थी को पूरी फिल्म सुलझाती रहती है।
 

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Taapsee Pannu - फोटो : social media
कहानी गुरुग्राम की है। घर में अकेली रह रही एक लड़की का सिर काटकर कोई फुटबॉल के गोलपोस्ट में गेंद की तरह किक कर गोल करता है। लाश को कुर्सी पर रखकर जला देता है। ये है फिल्म की प्रस्तावना। और, फिर दिखती हैं घुंघराले बालों वाली तापसी। जॉगिंग करते। देखकर लगता नहीं कि ये किसी चीज से डर भी सकती है। अतीत का हादसा उसका पीछा कर रहा है। टैटू की स्याही में किसी की अस्थियों का घोल उसे पागल कर रहा है। और, वीडियो गेम की तरह रीयल लाइफ के हादसे उसकी बाकी बची लाइफ लाइनें खत्म करने की कोशिश में हैं।
 
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Taapsee Pannu - फोटो : social media
अश्विन श्रवनन के करियर की ये दूसरी फिल्म साउथ में पनप रहे हॉरर फिल्मों के नए जॉनर से थोड़ा छिटककर अपना नया वर्गीकरण चाहती है। फिल्म चूंकि मूल रूप से हिंदी में बनी नहीं है तो क्लोज अप में कलाकारों के संवाद थोड़े अटपटे लगते हैं। विनोदिनी की डबिंग किसी अकुशल डबिंग आर्टिस्ट ने कर दी है जिसे सीन के इमोशन ही नहीं समझ आते, आवाज उम्र के हिसाब से भी नहीं है। 
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game over - फोटो : social media
फिल्म गेम ओवर जिस ऊंचाई से शुरू होती है, उसका ग्राफ निर्देशक बरकरार नहीं रख पाते हैं। इंटरवल तक मामला उलझता रहता है और फिर जब सुलझना शुरू भी होता है तो काफी देर हो चुकी होती है। फिल्म देखनी हो तो सिर्फ तापसी पन्नू की अदाकारी के लिए देखी जा सकती है। पल पल बदलते भावों को चेहरे पर यूं ले आना आसान काम नहीं है। बाकी फिल्म में कुछ खास है नहीं। अमर उजाला के वीकली मूवी रिव्यू में फिल्म को मिलते हैं दो स्टार।
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