अक्षय कुमार
लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) को गायत्री (राधिका आप्टे) से शादी करने के बाद पता चलता है कि माहवारी के दौरान उसकी पत्नी पांच दिनों तक न केवल घर के बाहर रहती है बल्कि साफ-सफाई की जगह गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती है। वह उसकी समस्या को खत्म करने के लिए खोज करना शुरू करता है और सैनिटरी पैड लेकर आता है। राधिका आप्टे महंगा पैड देखकर बौखला जाती है और इसे औरत के लिए शर्म की बात मानती है। लक्ष्मी को डॉक्टर से पता चलता है कि उन दिनों में महिलाएं गंदे कपड़े, राख, छाल आदि का इस्तेमाल करके कई जानलेवा और खतरनाक रोगों की शिकार होती हैं।
कई महिलाएं तो बांझ तक हो जाती हैं। फिर वह खुद सैनिटरी पैड बनाने की कवायद में जुट जाता है। इस सिलसिले में उसे पहले अपनी पत्नी, बहन, मां के साथ साथ समाज से भी दुत्कारा जाता है। गांववाले और समाज उसे एक तरह से बहिष्कृत कर देते हैं, मगर जितना वह जलील होता जाता है उतनी ही उसकी सैनिटरी पैड बनाने की जिद पक्की होती जाती है। परिवार उसे छोड़ देता है, मगर वह अपनी धुन नहीं छोड़ता और आगे इस सफर में उसकी जिद को सच में बदलने के लिए दिल्ली की एमबीए स्टूडेंट परी (सोनम कपूर) उसका साथ देती है।