आर माधवन
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कोरोना काल में देश, काल और परिस्थिति में फंसे लोगों का जीवन संतुलन खो रहा है। ऐसे में परियों या राजा रानी की कहानियों में खुश रहने वाली एक बच्ची पारू को बस में सफर करते हुए सुनने को मिलती है कहानी एक ऐसे योद्धा की जिसकी जान एक मछली में है। बच्ची बड़ी होती है और एक दिन ऐसे कस्बे में पहुंच जाती हैं जिसकी दीवारों पर बने फुटकर चित्र दूर से खड़े होकर दिखने में एक ही पेटिंग का हिस्सा नजर आते हैं और उसे याद आने लगती है वही कहानी जो उसने बचपन में सुनी थी। पारू अपनी संभावित शादी को छोड़ सोलो ट्रैवेल पर निकली है। रहने को जो ठिकाना उसे मिलता है वह उसी कलाकार का ठिकाना है, जिसके रहस्य को पारू भेदना चाहती है। ‘मारा’ परीलोक से आगे की लोककथा भी है, रहस्य रोमांच की कहानी भी है और इसमें प्रेम का एक ऐसा सूत्र भी है जिसे हम अक्सर ‘प्लैटोनिक लव’ कहते हैं।