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'Gurgaon' Movie Review: कहानी में कुछ नया नहीं, सिर्फ घना अंधेरा है यहां...

Sat, 05 Aug 2017 03:33 PM IST
रवि बुले
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'गुड़गांव' फिल्म रिव्यू
निर्माताः अजय जी. राय/एलन मैकएलेक्स

निर्देशकः शंकर रमन

सितारेः अक्षय ओबेराय, रागिनी खन्ना, पंकज त्रिपाठी, शालिनी वत्स

रेटिंग: **

किताबों में सिनेमा की एक श्रेणी है, नुवां। इसमें वैसे आपराधिक थ्रिलर आते है जिनमें पागलपन की हद तक सनकी किरदार और नकारात्मक कथानक होता है। 'गुड़गांव' सिनेमा की वही श्रेणी है। अक्सर लोग सोचते हैं कि मेहनत करने से धन कहां आता है और वे ज्यादातर सही होते हैं।
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'गुड़गांव' फिल्म रिव्यू
अचानक धनी हुए लोगों के किस्सों में पीछे परिश्रम की कम और अपराध कथाएं अधिक सामने आती हैं। अपराध वह चमत्कार है जो रातों-रात अकूत धन पैदा कर देता है। सियार को शेर बना देता है। कुछ यही गुड़गांव में होता है जहां कंक्रीट के जंगल में केहरी सिंह (पंकज त्रिपाठी) का राज है। जिसके हाथ अपने भाई और नवजात बच्ची की हत्या से रंगे हैं। परंतु यहीं उसे एक ज्योतिषि बताता है कि अगर वह किसी लड़की को गोद ले लेगा तो जिंदगी चमक जाएगी। सचमुच यही होता है। टूटे-फूटे मकान में रहने वाले केहरी की जमीन अब गुड़गांव में वहां तक है, जहां तक नजर जा सकती है।
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'गुड़गांव' फिल्म रिव्यू
बबूल बोने पर आम नहीं आते। कहानी में आगे अब इस कहावत को फिट कर लें तो आगे खुद-ब-खुद समझ लेंगे कि क्या होगा। केहरी का बेटा कैसा निकलेगा और जिस बच्ची ने केहरी की किस्मत बदली, उसका क्या होगा। खून के रास्ते आया पैसा अपने साथ खून की महक भी लाता है। जो खतरनाक नशे के जैसी होती है। फिल्म देखते हुए मुश्किल यह आती है कि राहत का एक पल नहीं मिलता।

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'गुड़गांव' फिल्म रिव्यू
गुस्सा, बदला और हिंसा केंद्र में हैं। ये धीमी आंच की तरह हर दृश्य में बने रहते हैं। कहानी में गति नहीं है और इसकी संरचना यूरोपीय ढंग की है। अतः गुड़गांव फिल्म महोत्सवों में दिखाया जाने वाला सिनेमा पसंद करने वालों को अच्छी लग सकती है। फिल्म धैर्य की परीक्षा भी लेती है कि आप सीट पर बने रहें।
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'गुड़गांव' फिल्म रिव्यू
निर्देशक की कहानी पर पकड़ है। हालांकि कहानी में कहने को कुछ ज्यादा नहीं है। शंकर ने पर्दे पर दृश्यों को रच कर बातें बढ़ाई है। अक्षय ओबेराय ने पिता और बहन से नाराज युवा के रूप में अच्छा अभियन किया। वह आंखों और चेहरे के हाव-भाव से बातें करते हैं। संवाद कम करते हैं। वहीं रागिनी खन्ना ने तेज-तर्रार, मुंहफट और आत्मविश्वासी लड़की का रोल निभाया है। वह अपनी जगह सटीक हैं। पंकज त्रिपाठी के हिस्से कम दृश्य हैं मगर वह जमे हैं। फिल्म ऐसे घने अंधेरे का एहसास कराती है, जिसमें रोशनी की कोई किरण नहीं फूटती। अगर आपको अंधेरा पसंद है। आप अंधेरे में खूबसूरती ढूंढ लेते हैं तो गुड़गांव आपके लिए है।
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