गुल्लक
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘गुल्लक’ उन लोगों के लिए ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ है जिन्होंने कानपुर की गंदगी देखी नहीं है। जियो का डाटा पाकर चीनी मोबाइल पर ऐसी सीरीज देखने वालों के लिए ये रोज का टंटा है, इसमें कॉमेडी कहां है। हर बात में चिड़चिड़ाना, हर बात में भन्नाना, गरीब परिवार का अपनी मुसीबतों से ध्यान बंटाने का क्लासिक किस्सा ऐसी कॉमेडी में रहता है लेकिन इसमें जबतक समाज ढंग से न जुड़े, कहानी का संहार हर बार उपसंहार तक पहुंचने से पहली ही हो जाता है। जमील खान, गीतांजलि कुलकर्णी एक मिडिल क्लास हसबैंड वाइफ लगते तो हैं लेकिन उनकी परेशानियां एक दो एपीसोड बाद चुभने लगती हैं। हर्ष मायर को ऐसा क्यों बनाया गया, राइटर ही जानें लेकिन इतने मंदबुद्धि बालक मिश्राओं के परिवार में होते नहीं हैं। हां, अन्नू मिश्रा जैसे भौकाली बहुत हैं, लेकिन वो इतनी ओवरएक्टिंग नहीं करते।