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Movie Review: सुपरहिट की रेस से बाहर हुए सलमान, लाखों फैंस को निराश कर सकती है फिल्म

Fri, 15 Jun 2018 02:28 PM IST
रवि बुले
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रेस - फोटो : SELF
निर्माताः रमेश तौरानी
निर्देशकः रेमो डिसूजा
सितारेः सलमान खान, जैकलीन फर्नांडिस, डेजी शाह, अनिल कपूर, बॉबी देओल, साकिब सलीम, फ्रेडी दारुवाला
रेटिंग **

रेस-3 देखने के बाद कोई आपसे पूछे कि फिल्म में सलमान खान का रोल क्या है? वह क्या कर रहे हैं? तो जवाब देना आसान नहीं होगा। अपनी कहानी के शुरू में ऑक्सफोर्ड में पढ़े सिकंदर सिंह बने सलमान चीन में हैं, जहां उन्हें एक होटल में बैठी युवती जेसिका (जैकलीन फर्नांडिस) से प्यार हो जाता है। एकाध गाने से बात आगे बढ़ती है और वन नाइट स्टैंड के बाद युवती गायब हो जाती है। सिकंदर अब अपने सौतेले पिता शमशेर सिंह (अनिल कपूर) और सौतेले जुड़वां भाई-बहन (साकिब सलीम-डेजी शाह) तथा मैनेजरनुमा दोस्त यश (बॉबी देओल) के साथ है। भारत से भागा शमशेर अल-शिफा द्वीप पर विशाल मेंशन में बच्चों समेत रह रहा है और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का हथियार कारोबारी है। उसके जुड़वां बच्चे सिकंदर के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। 
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रेस 3
मामला अरबों-खरबों की प्रॉपर्टी का है। तमाम खींचतान के बीच गायब जेसिका की फिर एंट्री होती है और धीरे-धीरे कुछ बेहद फिल्मी राज खुलते हैं। इस बचकानेपन पर आप हैरान रह जाते हैं। फिल्म में हथियार तस्कर को देश प्रेमी दिखाया गया कि वह इलाहाबाद के नजदीक हंडिया का रहने वाला है, वहीं कभी उसकी हथियार फैक्ट्री थी और सेना को उनकी सप्लाई होती थी। मगर कुछ भ्रष्ट नेताओं की वजह से उसे ईमान बचाने के लिए देश से भागना पड़ा। उसे अपनी जमीन से इतना प्यार है कि अंग्रेजी मिक्स हिंदी बोलते-बोलते वह अचानक भदेस अंदाज में बोलने लगता है। 
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race 3
आप सलमान के लिए यह फिल्म देखना चाहते हैं तो ठंडे दिमाग से सोचिए। सलमान पर्दे पर दिखते भले हैं लेकिन कहानी के केंद्र में कहने भर को हैं। उनके अलावा जो हैं, उनमें कोई ऐसा नहीं जिसके लिए आप सिनेमाघर में जाएं। पुराने बॉलीवुड मसालों वाली इस कहानी में कभी भी कुछ भी हो जाता है और बॉबी, साकिब और डेजी शाह जैसे एक्टरों से उम्मीद लगाना खुद को धोखा देना है। निर्देशक ने फिल्म को बेसिर पैर की मार-धाड़, गोलीबाजी, गोलाबारी, कारों तथा मोटर बाइक की रेस और उनके धमाकों से उड़ जाने से रचा है। कितने इनमें मारे जाते हैं,उनका हिसाब नहीं। फिल्म नहीं बांधती। न कोई एक्टर प्रभावित करता है। भाई-बहन के संबंधों में भावना नहीं है। दोस्ती में गर्माहट गायब है। 

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Race 3
अनिल कपूर न पिता दिखते हैं और न हथियारों की सप्लाई करने वाले खतरनाक इंसान। रेस-3 यह जानने के लिए जरूर देखी जा सकती है कि बेतहाशा धन उड़ा कर पैसे वाले निर्माता कैसी फिल्म बनाते हैं। उनका बौद्धिक और भावनात्मक ग्राफ कैसा है। नकली चमक-दमक, चीन- कंबोडिया-खाड़ी देशों समेत कई विदेशी खूबसूरत लोकेशन, स्पोर्ट्स कारें, विशाल मेंशन, ऊंचे आकाश से लिए दृश्य। रेस-3 का थ्रिल दिल को नहीं छूता क्योंकि उसमें इमोशन नहीं है। रोमांस नहीं है। कॉमेडी नहीं है। 
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Race 3
सलमान भी वैसे नहीं हैं, जैसा फैन्स पसंद करते हैं। वह यहां दर्शकों से कनेक्ट नहीं होते। उनका ध्यान बॉबी, जैकलीन, साकिब, डेजी और फ्रेडी का करियर संवारने में ज्यादा दिखता है। फ्रेडी को छोड़ बाकी को रेस-3 में खूब मौका मिला परंतु दुर्भाग्य से एक भी प्रभावित नहीं करता। सलमान की नेकदिली की तारीफ हो सकती है लेकिन उनका कमिटमेंट दर्शकों के प्रति होना चाहिए, वे उन्हें देखने आते हैं। फिल्म का गीत-संगीत बहुत औसत है। यहां कैमरा वर्क और वीएफएक्स जरूर शानदार हैं।
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