फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Durgamati Review: अभिनेता के बाद अब निर्माता अक्षय ने किया निराश, उम्मीदों पर विफल रही ‘दुर्गामती’

विज्ञापन
1 of 5
दुर्गामती - फोटो : amar ujala
Movie Review: दुर्गामती
कलाकार: भूमि पेडनेकर, अरशद वारसी, माही गिल, जिशू सेनगुप्ता और करन कपाड़िया आदि।
निर्देशक: जी अशोक
निर्माता: अक्षय कुमार और विक्रम मल्होत्रा
रेटिंग: *


किसी राज्य के आईएएस अफसर को किसी केंद्रीय जांच एजेंसी की चाल में फंसाकर बदनाम करने, बेइज्जत करने और फिर उसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बनाने की कोशिश करने की कहानी है फिल्म ‘दुर्गामती’। फिल्म ‘भागमती’ में ये बात फिल्म के क्लाइमेक्स में दर्शकों को पता चलती है, फिल्म ‘दुर्गामती’ शुरू में ही सारा खेल दर्शकों के सामने रख देती है। दुर्गामती कौन है, क्यों राज्य का एक किला शापित है, क्यों वहां कोई जाने से डरता है और आखिर क्यों एक जांच एजेंसी किसी आईएएस अफसर को ऐसे जेल से निकालकर किसी सुनसान हवेली में पूछताछ के लिए ले जाती है और क्या वाकई ऐसा किया जा सकता है, इन सब सवालों के जवाब फिल्म ‘दुर्गामती’ देने की कोशिश नहीं करती। वैसे भी सवाल करना अब प्रचलन में नहीं है।
विज्ञापन

2 of 5
दुर्गामती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘दुर्गामती’ दर्शकों के सामने सिनेमा के नाम पर कैसा भी उत्पाद परोस देने की एक उस परंपरा की अगली कड़ी है जिसमें एक निर्माता फिल्म में सीड मनी (प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए जरूरी मामूली रकम) लगाता है। दूसरा निर्माता आकर उसे बेचने का इंतजाम कर देता है और फिर दोनों मिलकर फिल्म की रिलीज से पहले ही करोड़ों कमा लेते हैं। फिल्म कैसी बनी, दर्शकों को कैसी लगेगी, इससे उनका लेना देना ज्यादा होता नहीं है। उनका पूरा ध्यान रहता है उत्पाद को बेच देने पर। दर्शक सितारों की बड़ी बड़ी बातों में आकर उत्पाद खरीद (देख) लेता है। उत्पाद खराब है या अच्छा, जब तक इसका खुलासा होता है, निर्माता की तिजोरी में करोड़ों जमा हो चुके होते हैं।
विज्ञापन

3 of 5
दुर्गामती - फोटो : screenshot from youtube
अपने करियर में लगातार चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं करती रहीं भूमि पेडनेकर की फिल्म ‘दुर्गामती’ एक खराब फिल्म है। पहले फ्रेम से ही खराब। इसमें उनका कोई दोष भी नहीं है। फिल्म की ओपनिंग ही खराब है। कहानी को खोलने के फिल्म के तरीके से ही फिल्म खराब है। दो साल पहले इस फिल्म की मूल फिल्म ‘भागमती’ को देखने के लिए हिंदी पट्टी के दर्शक भी बेताब रहे थे। फिल्म ‘भागमती’ को इसकी मूल भाषा तेलुगू में जितने लोगों ने नहीं देखा होगा, उससे ज्यादा ये फिल्म अब तक गैर तेलुगू भाषी लोग देख चुके हैं। फिल्म बनी भी बहुत शानदार थी। लेकिन, कहां अनुष्का शेट्टी और कहां भूमि पेडनेकर! निर्देशक जी अशोक ने इस बार ‘दुर्गामती’ को ‘भागमती’ का टेनेट वर्जन बना दिया है।

4 of 5
दुर्गामती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म शुरू होती है तो इस बात पर दर्शकों से गौर करने की अपेक्षा की जाती है ये फिल्म मध्य प्रदेश पर्यटन की बड़ी सहभागिता से बनी है। उसके बाद सूबे के छह बड़े अफसरों को विशेष धन्यवाद दिया गया है। मतलब कि सब्सिडी के दो करोड़ रुपये पक्के। अब इसके बाद फिल्म में बोली जा रही हिंदी मध्य प्रदेश की है कि नहीं। सीबीआई की लेडी अफसर अंग्रेजों की तरह संवाद क्यों बोलती है, पता नहीं। भूमि पेडनेकर के होंठ इतने सूजे क्यों है, किसी को नहीं पता। जीशू सेनगुप्ता इस फिल्म में इतनी खराब एक्टिंग क्यों कर रहे हैं, और तो और अरशद वारसी इस फिल्म में क्या कर रहे हैं? फिल्म ‘दुर्गामती’ की पटकथा तो खराब है ही, इसके संवाद उससे ज्यादा खराब हैं। माही गिल के संवाद सुनकर फिल्म को फास्ट फारवर्ड करने का जी करता है। निर्देशक ने इसमें राजनीति में वंशवाद, हिंदुत्व का मुद्दा, मंदिर का मुद्दा सब डालने की कोशिश की है, लेकिन श्रीमद्भगवतगीता का श्लोक ही जब संवाद लेखक पूरा न लिख पाए तो फिर ऐसे मुद्दे उठाने नहीं चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दुर्गामती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘दुर्गामती’ निर्देशन, लेखन, अभिनय के अलावा सिनेमैटोग्राफी, संपादन और कला निर्देशन में भी मात खाती है। फिल्म ‘भागमती’ में अशोक की तकनीकी टीम के साथी रहे इस बार हिंदी फिल्म में उनके साथ नहीं है। फिल्म देखकर लगता भी है कि अशोक ने बहुत कुछ फेरबदल फिल्म में निर्माताओं के कहने पर ही किए होंगे क्योंकि नृत्य की 13 विधाओं में पारंगत निर्देशक ही किसी एक फिल्म के इतने सारे विभागों में इतना सारा फेरबदल करने के लिए इतना नाच सकता है। फिल्म ‘दुर्गामती’ 11 दिसंबर 2020 को रिलीज हुई यानी सारे अंकों का योग करें तो नौ बनता है। अक्षय कुमार का लकी नंबर। लेकिन, सेलेब्रिटी एस्ट्रोलॉजर संदीप कोचर बताते हैं, ज्योतिष सिर्फ आपको आने वाले समय के लिए तैयार करता है, आपके कर्म का परिणाम नहीं बदल सकता। लगता है कि अक्षय कुमार को किसी बेहतर ज्योतिषी की इस समय सख़्त जरूरत है। अभिनेता अक्षय कुमार ‘लक्ष्मी’ में पिटे यहां बारी निर्माता अक्षय कुमार की है।

पढ़ें: NAXALBARI ON ZEE5 REVIEW: पार्थो मित्रा ने बहुत सलीके से की नक्सलियों की दुनिया की नई रोमांचक पड़ताल
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें