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Movie Review: सनी देओल और अक्षय नहीं, कहीं इस वजह से BLANK न रह जाए फिल्म

Fri, 03 May 2019 01:18 PM IST
shrilata biswas मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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blank - फोटो : social media
फिल्म: ब्लैंक
कलाकार: करण कपाड़िया, सनी देओल, करणवीर शर्मा और इशिता दत्ता
निर्देशक: बेहजाद खंबाटा
निर्माता: श्रीकांत भासी और निशांत पिट्टी
रेटिंग: **


मन्ना दा ने भले गाना गाया हो कि कसमें वादे प्यार वफा सब बातें हैं बातों का क्या, लेकिन रिश्तों की अहमियत समझनी हो तो इस हफ्ते रिलीज हुई फिल्म ब्लैंक से समझी जा सकती है। कंगना रनौत भले इस बात से चिढ़ें कि फिल्म इंडस्ट्री में एक और स्टार किड आ गया और दो-दो खानदान उसे प्रमोट करने में लगे हैं, लेकिन इसी में मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के तमाम अच्छे सबक भी हैं। 
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Blank - फोटो : amar ujala mumbai
करण कपाड़िया आगे चलकर स्टार बनेंगे या कुमार गौरव की तरह गुमनामी में खो जाएंगे, ये तो उनकी मेहनत और लगन तय करेगी लेकिन इस फिल्म की रिलीज और इसको लोगों तक पहुंचाने में सनी देओल और अक्षय कुमार ने जो मेहनत की है, वह काबिल-ए-तारीफ है। कुछ फिल्मों में अभिनय करने के बाद बरसों तक सनी देओल की कॉस्ट्यूम डिजाइनर रहीं सिंपल की बड़ी बहन डिंपल के सनी देओल अकेलेपन का सहारा रहे हैं। 
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Blank - फोटो : social media
अक्षय करण के जीजा हैं। करण कहते तो सनी और अक्षय दोनों उनके लिए अपने प्रोडक्शन हाउस से फिल्म बना सकते थे लेकिन करण ने अपने दोस्त बेहजाद को साथ लेकर फिल्म बनाई। सनी देओल फिल्म में साथ हैं, अक्षय कुमार फिल्म के एंड क्रेडिट में साथ हैं। फिल्म ब्लैंक न्यू एज साइको थ्रिलर जैसी है और हिंदी सिनेमा के सिंघम, दबंग और सिम्बा जैसे दौर में तकनीक के अगले दौर की बात करती है। हिंदी सिनेमा के दर्शक ऐसी कहानियों के लिए तैयार नहीं, ये कहना भी ज्यादती होगी क्योंकि यही वे दर्शक हैं जो एवेंजर्स एंडगेम जैसी फिल्मों को 5 दिन में 200 करोड़ रुपए की कमाई करने वाली फिल्म बना देते हैं।

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blank - फोटो : social media
तो फिर, ब्लैंक की दिक्कत क्या है? ब्लैंक कहानी है एक ऐसे लड़के की जिसके दिल में आयरनमैन की तरह का लगा एक यंत्र तमाम दूसरे आत्मघाती हमलावरों से जुड़ा है। तबाही की इतनी बड़ी साजिश को विफल करने की जिम्मेदार एटीएस चीफ की है। करण कपाड़िया और सनी देओल की केमिस्ट्री यहां काम करती दिखती है, बस फिल्म की दिक्कत ये है कि इसकी कहानी को बनाने के लिए जरूरी स्पेशल इफेक्ट्स का पैसा अभी हिंदी सिनेमा के प्रोड्यूसर्स के पास नहीं है। 
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akshay kumar, karan kapadia - फोटो : social media
कहानी का विचार दमदार है। इस पर फिल्म बनाने में टीम लड़खड़ा गई है। बेहजाद के पास सिनेमा की समझ है लेकिन उसे हिंदी सिनेमा के बजट के खांचे में बनाने की चुनौतियां उनके सामने बहुत बड़ी हैं। फिल्म आपको सनी देओल के नाम पर देखनी है या करण कपाड़िया के नाम पर लेकिन फिल्म से बहुत ज्यादा उम्मीदें लेकर न जाएं। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली मूवी रिव्यू में ब्लैंक को मिलते हैं दो स्टार।
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