आशिकी
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
यूं किस्मत ने दी राहुल के घर दस्तक
लेकिन, असल मायने में अगर किसी की किस्मत फिल्म ‘आशिकी’ से चमकी थी तो वह रहे राहुल रॉय। उनकी मां से मिलने गए महेश भट्ट बेटे को फिल्म के लिए सेलेक्ट करके लौटे थे। राहुल रॉय की मां इंदिरा उन दिनों यूनीसेफ के लिए काम करती थीं और उनके सामाजिक कार्यों से खुश होकर मशहूर पत्रिका ‘सैवी’ ने उन पर खास स्टोरी की थी। महेश भट्ट इसी बात की बधाई देने उनके घर गए थे और वहां उनकी नजर पड़ गई राहुल रॉय पर। राहुल रॉय के लिए तो ये फीलिंग ऐसी थी कि जैसे कोई उनके लिए आसमान से तारे तोड़ लाया हो। उन्होंने न स्क्रिप्ट पढ़ी न कहानी पूछी, बस फिल्म साइन कर ली। साल भर के अंदर एक साथ पचास फिल्में साइन करने का रिकॉर्ड भी राहुल रॉय ने ‘आशिकी’ रिलीज होने के साथ बनाया था। ये और बात है कि तभी फिल्म निर्माताओं की संस्था ने एक बैठक कर यह नियम बना दिया कि कोई हीरो एक साथ 12 फिल्मों से ज्यादा फिल्में साइन नहीं कर सकता। लिहाजा राहुल को बाकी सारी फिल्मों के साइनिंग अमाउंट वापस करने पड़े। राहुल तब विशेष फिल्म्स के साथ करार में बंधे थे लिहाजा उन्हें महेश भट्ट की अगली फिल्में ‘जानम’ और ‘जुनून’ भी करनी पड़ी। महेश भट्ट ने ‘आशिकी’ में जो कमाया था वह सब इन दोनों फिल्मों में गंवा दिया। राहुल रॉय का उन दिनों क्रेज हुआ करता था, युवाओं ने उनके जैसे बाल भी रखने शुरू कर दिए थे, लेकिन साल भर के भीतर ये सब हवा हो गया। एक खास बात यहां और बताने लायक है, वो ये कि फिल्म ‘आशिकी’ में राहुल रॉय की अपनी आवाज नहीं है। पहले इस काम के लिए भट्ट ब्रदर्स ने सचिन को साइन किया था लेकिन बाद में ये काम महेश भट्ट के काफी करीब रहे अभिनेता आदित्य पांचोली ने किया।