जुबिन नौटियाल
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फिल्म ‘कबीर सिंह’ से मुझे लगता है कि आपके गानों को लोगों ने खुलकर सराहना शुरू किया, और उसके बाद आया फिल्म ‘मरजावां’ का तुम ही आना.., इन गानों के दर्द का एहसास कोई असल घटना है जीवन की?
नहीं सर, भगवान ने हर चीज से नवाजा है। बहुत प्यार दिया है। माता-पिता बहुत अच्छे दिए हैं। बहनें बहुत अच्छी दीं। दोस्त यार बहुत अच्छे दिए। फैंस बहुत अच्छे दिए तो शिकायत कुछ नहीं है। दुखी नहीं हूं लेकिन हां, मुझे लगता है जीवन अपने आप में बहुत सारी चीजों का निचोड़ होता है। उसमें अच्छे पल भी होते हैं। दुख के पल भी होते हैं तो जब कुछ सैड गाता हूं तो यह याद करके गाता हूं, जब मैं किसी चीज को लेकर उदास रहा होउंगा।
साल 2011 में आप लोगों को पहली बार दिखने शुरू हुए और अब 2025 है, यानी 14 साल बीत गए, माना जाए कि अब राजतिलक का समय आ गया?
क्या बात है! 14 साल बाद आज अगर अपनी यात्रा में पीछे जाकर देखूं तो खुद को एक बेहतर और तैयार गायक के तौर पर महसूस करता हूं। 14 साल की बात आपकी सही है कि ये समय किसी को भी लगता ही है एक मुकाम हासिल करने में। मैं भी शुरू के दिनों में यही खोज रहा था कि क्या कैसे गाना है, क्या कैसे करना है? लेकिन, आज पता है कि किस तरह से चलना है, किस तरह से आगे काम करना है, मेहनत किस दिशा में करनी है।