फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jaidev: जयदेव ने फूंकी देवानंद के गानों में जान, जानें कौन हैं तीन नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले पहले संगीतकार

Mon, 06 Jan 2025 11:05 AM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

आज संगीत की दुनिया के नगीने जयदेव की पुण्यतिथि है। उन्होंने देवानंद की फिल्मों में अपने शानदार म्यूजिक से जान फूंकी है। आइए इस संगीतकार के जीवन की दिलचस्प बातों को जानते हैं। 
 
विज्ञापन
1 of 5
संगीतकार जयदेव - फोटो : अमर उजाला
भारतीय संस्कृति हमेशा से कला और साहित्य की धनी रही है। इस भूमि पर एक से बढ़कर एक कलाकारों ने जन्म लिया। ऐसे ही एक म्यूजिक डायरेक्टर मनोरंजन जगत में हुए, जिन्होंने पहली बार तीन नेशनल अवॉर्ड जीतकर अपने नाम एक रिकॉर्ड कर लिया। इस हस्ती का नाम था जयदेव। जयदेव वह संगीतकार थे, जिन्होंने दिग्गज अभिनेता देवानंद के गानों में जान डाल दी। जयदेव का जन्म नैरोबी में हुआ था और उनका पालन-पोषण लुधियाना , भारत में हुआ। बचपन में उनके सिर पर हीरो बनने का भूत सवार था, जिसके चलते वह घर से भागकर मुंबई पहुंच गए। हीरो बनने पहुंच जयदेव की मुलाकात संगीत से हुई, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनकी पुण्यतिथि है, आइए जानते हैं उनके जीवन की कुछ दिलचस्प बातों को…
विज्ञापन

2 of 5
जयदेव - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
जिंदगी ने लिया यू-टर्न
मुंबई पहुंचकर जयदेव ने वाडिया फिल्म कंपनी के लिए एक बाल कलाकार के रूप में आठ फिल्मों में अभिनय किया। लुधियाना में प्रोफेसर बरकत राय ने उन्हें छोटी उम्र में ही संगीत की शिक्षा दी। वह जब मुंबई आए तो उन्होंने कृष्णराव जौकर और जनार्दन जौकर से संगीत सीखा। सब कुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन अचानक जयदेव सब कुछ छोड़कर मुंबई से लुधियान लौट गए, क्योंकि उनके पिता अंधे थे, जिससे परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके युवा कंधों पर आ गई। पिता की मृत्यु के बाद जयदेव ने अपनी बहन वेद कुमारी की देखभाल की जिम्मेदारी ली और बाद में उनकी शादी सतपाल वर्मा से करवा दी। इसके बाद 1943 में वह संगीत के उस्ताद अली अकबर खान से शिक्षा लेने के लिए लखनऊ चले गए।
विज्ञापन

3 of 5
जयदेव - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
देवानंद की फिल्मों में संगीत से फूंकी जान
जयदेव ने दिग्गज अभिनेता देवानंद की कई फिल्मों में अपनी धुनों का जादू बिखेरा है। उन्होंने ‘अल्लाह तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम’, ‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, ‘अभी ना जाओ छोड़कर, ‘कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया’ जैसे सुपरहिट नगमों में धुन दी है। 1950 के दशक में, नवकेतन की हर फिल्म में एसडी बर्मन का संगीत होता था और जयदेव ने उनमें से ज्यादातर में एसडी बर्मन को असिस्ट किया था। ये फिल्में थीं ‘टैक्सी ड्राइवर’ (1954), ‘हाउस नंबर 44’ (1955), ‘नौ दो ग्यारह’ (1957), ‘काला पानी’ (1958) और ‘काला बाजार’ (1960)। नवकेतन की इन सभी फिल्मों में देवानंद ने अभिनय किया है।

4 of 5
जयदेव - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
जीते तीन राष्ट्रीय पुरस्कार
जयदेव वह पहले म्यूजिक डायरेक्टर थे, जिन्होंने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। उन्हें साल 1985 की फिल्म ‘अनकही’, साल 1979 की ‘गमन’ और 1972 की ‘रेशमा और शेरा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
जयदेव - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
जिंदगी भर रहें अविवाहित
जयदेव ने कभी शादी नहीं की, वह अविवाहित ही रहे। अपनी बहन के परिवार के करीब रहे, जो बाद में यूनाइटेड किंगडम में बस गए। संगीत की दुनिया में अतुलनीय योगदान देने वाले जयदेव ने 6 जनवरी 1987 को 68 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें