हॉलीवुड सिनेमा की सबसे सफल फ्रेंचायजी जेम्स बॉन्ड की फिल्मों में OO7 का किरदार निभाने वाले महान अभिनेता रोजर मूर नहीं रहे। कैंसर के चलते उनकी मौत हो गई। रोजर मूर ने स्विट्जरलैंड में अपनी आखिरी सांसे ली। रोजर मूर जेम्स बॉन्ड फ्रेंचायजी की फिल्मों में 7 बार लीड कैरेक्टर OO7 को जी चुके थे। वो सर्वाधिक बार जेम्स बॉन्ड बनने वाले अभिनेता रहे। आगे की स्लाइड्स में जानें, रोजर मूर के शानदार फिल्मी सफर और उनके इंडियन कनेक्शन के बारे में...
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रोजर मूर 46 साल की उम्र में बनें बॉन्ड
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रोजर मूर 46 साल की उम्र में बनें बॉन्ड
रोजूर मूर साल 1973 से 1985 तक जेम्स बॉन्ड बनकर पूरी दुनिया पर राज करते रहे। इस दौरान बॉन्ड के तौर पर उनकी 7 फिल्में आई। वो सबसे ज्यादा बार बॉन्ड को जीने वाले एक्टर हैं, साथ ही सबसे ज्यादा समय तक भी। बॉन्ड के तौर पर वो दुनिया के सामने साल 1973 में 'लाइव एंड लेट डॉई' फिल्म के साथ आए। आगे की स्लाइड जाने, रोजर के बॉन्ड फिल्मों के नाम...
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OO7 ने दिया स्टारडम
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OO7 ने दिया स्टारडम
रोजर ने 'लाइव एंड लेट डॉई' के बाद साल 1974 में सबसे प्रसिद्ध बॉन्ड फिल्म 'द मैन विद द गोल्डन गन' में बॉन्ड का किरदार जिया। इसके बाद साल 1977 में आई 'द स्पॉई हू लव्ड मी'। इस फिल्म ने उन्हें स्टारडम पर पहुंचा दिया। मूर ने साल 1979 में 'मूनरैकर', साल 1981 में 'फॉर योर आईज ओनली', साल 1983 में 'ओक्टोपसी' और साल 1985 में 'ए व्यू टू ए किल' तक बॉन्ड का किरदार निभाया। मूर के नाम बॉन्ड फिल्मों को लेकर एक और रिकॉर्ड है, जो शायद ही कोई तोड़ पाए। आगे की स्लाइड में जानें, उनके इस खास रिकॉर्ड के बारे में..
सबसे बुजुर्ग बॉन्ड रहे रोजर मूर
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सबसे बुजुर्ग बॉन्ड रहे रोजर मूर
रोजर मूर सबसे ज्यादा उम्र में बॉन्ड (45 वर्ष) बने और सबसे ज्यादा उम्र तक बॉन्ड(58) बने रहे। उनके निभाए बॉन्ड के किरदार को साल 2004 में अकादमी अवॉर्ड की वोटिंग में बेस्ट बॉन्ड चुना गया। साल 2008 में फिर से वो 62फीसदी मतों के साथ बेस्ट बॉन्ड बने रहे। आगे जानें, ब्रिटिश एंपायर का पा चुके थे अवॉर्ड...
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नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर थे रोजर मूर
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नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर थे रोजर मूर
रोजर मूर का जन्म स्टॉकवेल, लंदन में हुआ था। चैरिटी के कामों के चलते उन्हें केबीई(नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर) की उपाधि से ब्रिटिश साम्राज्ञी ने सम्मानित किया था। उन्हें साल 1999 में सीबीई(कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश उपाधि) की उपाधि मिली थी। ये उपाधि ब्रिटिश राजशाही द्वारा बेहतरीन कामों के चलते दिए जाते हैं। वो यूनिसेफ के एंबेसडर भी रहे और मानवता के कामों में उनकी सक्रियता दशकों तक रही। रोजर मूर को हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम में भी शामिल किया जा चुका है। आगे जानें, उनके भारत से खास रिश्ते के बारे में...
रोजर मूर का जन्म भले ही लंदन में हुआ, पर उनकी मां लिलियन लिली का जन्म भारत के कोलकाता में हुआ था। उनके पिता अंग्रेजी पुलिस अधिकारी थे। खुद रोजर मूर 18 साल की उम्र में ब्रिटिश नौसेना से जुड़ गए थे और सेंकेड लेफ्टिनेंट के पोस्ट से होते हुए कैप्टन के पद तक पहुंचे थे। मूर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश की सैन्य सेवा से जुड़े। वो कैप्टन के तौर पर पश्चिमी जर्मनी में एक छोटे से डिपो के कैप्टन थे। नेवी में रहते हुए वो अपने साथियों का मनोरंजन करते थे।