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Oscars 2020: जानिए कैसे चुनी जाती हैं ऑस्कर के लिए फिल्में, क्या है पूरी प्रक्रिया?

Thu, 06 Feb 2020 05:09 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Oscars - फोटो : social media
92वें एकेडमी अवॉर्ड शो Oscars 2020 का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में 9 फरवरी (भारत में 10 फरवरी सुबह 6.30 बजे) से इस अवॉर्ड्स का लाइव प्रसारण किया जाएगा। फिल्मों का यह एक ऐसा अवॉर्ड फंक्शन है जिस पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। बात करें नॉमिनेशंस की तो इस बार ऑस्कर नॉमिनेशंस में दो फिल्मों का सबसे ज्यादा बोलबाला रहा है। '1917' और 'Joker' को सबसे ज्यादा नॉमिनेशंस मिले हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं ऑस्कर में जाने वाली फिल्मों का चयन कैसे होता है। आइए बताते हैं...
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cost of the Oscars
साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से सिर्फ नौ फिल्में फाइनल सिलेक्शन तक पहुंचती हैं और उनमें से टॉप पांच फिल्मों को ही नॉमिनेशन मिलता है और उनमें से एक को ऑस्कर मिलता है। दरअसल ऑस्कर में दो लोग तय करते हैं कि कौन सी फिल्म नॉमिनेट होगी और कौन सी जीतेगी।
  • एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेस के मेंबर्स
  • अकाउंटिंग कंपनी प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स
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cost of the Oscars
  • प्रोफेशनल मेंबर्स ऑफ अकेडमी द्वारा द अकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स ऑर्टस एंड साइंसेस की अपनी 6000 मेंबर्स की एक रिसर्च टीम है, जो फिल्मों के नॉमिनेशन को हर पैमाने पर मापने के बाद ही ओके करती है। इस टीम में एक्टर, डिजाइर, सिनेमाटोग्राफर्स, डायरेक्टर्स, डॉक्यूमेंट्री, एक्जीक्यूटिव्स, फिल्म एडिटर मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट, म्यूजिशिएन, प्रोड्यूसर पब्लिक रिलेशन, साउंड,विजुअल इफेक्ट और राइटर्स प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।
  • फिल्म के मेकर्स को इन सभी मेंबर्स के लिए अपनी फिल्मों के शो रखने होते है। स्क्रीनिंग पर वोटर्स को बुलाने की जद्दोजहद के साथ थियेटर, स्क्रीनिंग, नाश्ते और बाकी अलग तरह के खर्च होते हैं। जिससे वोटर्स की नजरों में फिल्म आ सके।
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oscars
  • दरअसल नोमिनेटेड फिल्म को वोटर, वोटिंग के समय रैंकिंग करते हैं कि उन्हें दूसरे, तीसरे और बाकी के नंबरों पर कौन सी फिल्में पसंद है और उस फिल्म को विजेता घोषित किया जाता है जिसे सबसे ज़्यादा वोट मिलते हैं। इन सबके बीच फिल्म निर्माता के सामने सबसे बड़ी मुसीबत होती है अपनी फिल्म को सही तरीके से कैसे प्रोमोट करे।
  • फिल्ममेकर को सबसे पहले एकेडमी के सदस्यों को ढूंढना पड़ता है और ये सदस्य हर साल बदल जाते हैं। पहले इन सब के लिए एक अच्छे पब्लिसिस्ट की जरूरत पड़ती है। जो फिल्मों को प्रमोट करता है। इसके लिए 10 हजार डॉलर से लेकर 50 हजार डॉलर तक का खर्च आ जाता है। जिस फिल्म की ज़्यादा स्क्रीनिंग होती है मतदाता उससे ज्यादा प्रभावित होता है।
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