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महात्मा गांधी: 100 साल में कैसे बदली तस्वीर? कभी बेटे तो कभी गोडसे के नजरिए से दिखी बापू की कहानी

Fri, 02 Oct 2026 06:25 AM IST
राजश्री वर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Gandhi Jayanti 2026: आज 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती है। हिंदी सिनेमा में ऐसी कई फिल्में बनीं जिनमें बापू की जिंदगी को अलग-अलग नजरिए से लोगों तक पहुंचाया। जानिए ऐसी फिल्मों के बारे में…
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महात्मा गांधी पर बनी फिल्में - फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी सिर्फ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बड़े नेता नहीं थे, बल्कि सिनेमा के लिए भी एक ऐसा चेहरा रहे। कई मेकर्स ने उन्हें अलग-अलग दौर में अलग नजरिए से दिखाया। किसी फिल्म में उनके जीवन को दिखाया गया, तो उनके दक्षिण अफ्रीका वाले सफर को दिखाया गया। आज गांधी जयंती पर जानिए चुनिंदा फिल्मों के बारे में…
 
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अभिनेता जो पर्दे पर बने गांधी - फोटो : अमर उजाला
भक्त विदुर
फिल्म 'भक्त विदुर' साल 1921 में आई मूक फिल्म थी, जिसे कांजीभाई राठौड़ ने डायरेक्ट किया था और फिल्म का प्रोडक्शन कोहिनूर फिल्म कंपनी ने किया था। फिल्म महाभारत के विदुर के किरदार से प्रभावित थी। लेकिन फिल्म में विदुर के किरदार को महात्मा गांधी से प्रभावित बताकर अंग्रेजों ने इसे कराची और मद्रास प्रेसिडेंसी में रिलीज होने से रोक दिया था।

त्याग भूमि
साल 1939 में आई मशहूर तमिल निर्देशक के. सुब्रमण्यम की फिल्म 'त्याग भूमि' लेखक 'कल्कि' के उपन्यास पर आधारित थी। बताया जाता है कि यह फिल्म सीधे तौर पर गांधी के सिद्धांतों, अस्पृश्यता निवारण, महिला सशक्तिकरण और विदेशी सामानों के बहिष्कार पर केंद्रित थी। फिल्म में वास्तविक कांग्रेस रैलियों, खादी आंदोलन और गांधी की तस्वीरों का भरपूर इस्तेमाल किया गया था। 

जब ये फिल्म मद्रास के 'गेयटी थिएटर' में लगी, तब कुछ हफ्तों तक हाउसफुल चलती रही। लेकिन फिर दर्शकों का देशप्रेम देखकर ब्रिटिश सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया और सिनेमाघरों से प्रिंट्स भी जब्त करवा लिए थे, लेकिन निर्देशक ने चुपचाप इसकी कॉपियां जनता को मुफ्त बांट दी थीं।
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नाइन ऑवर्स टू रामा - फोटो : सोशल मीडिया
20वीं सदी का पैगंबर- महात्मा गांधी
साल 1940 में आई ये महात्मा गांधी पर बनी पहली डॉक्यूमेंट्री थी, जिसे ए.के. चेट्टियार ने बनाया था। इसका महत्व इसलिए है, क्योंकि इसमें किसी अभिनेता ने गांधी की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि वास्तविक गांधी के फिल्माए गए फुटेज का इस्तेमाल किया गया। गांधी हेरिटेज पोर्टल पर यह फिल्म 1940 में ए.के. चेट्टियार द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री के रूप में दर्ज है और इसके कई हिस्से आज भी संग्रह में उपलब्ध हैं।

नाइन ऑवर्स टू रामा
साल 1963 में आई मार्क रॉबसन की 'नाइन ऑवर्स टू रामा' स्टेनली वोल्पर्ट के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी। कहानी गांधी की हत्या से पहले के घंटों में नाथूराम गोडसे को केंद्र में रखती है। फिल्म को भारत में बैन कर दिया गया था।

महात्मा: लाइफ ऑफ गांधी, 1869–1948
विठ्ठलभाई झवेरी की यह डॉक्यूमेंट्री 1968 में रिलीज हुई। इसे गांधी पर बनी सबसे विस्तृत फिल्मों में गिना जाता है। इसका लंबा वर्जन करीब पांच घंटे का है और इसमें गांधी के बचपन से लेकर 1948 में उनकी हत्या तक की यात्रा दिखाई गई है।

फिल्म में पुरानी तस्वीरों, वास्तविक फुटेज, पुराने प्रिंट और एनीमेशन का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह है कि कहानी को काफी हद तक गांधी के अपने शब्दों के जरिए सुनाया गया।



गांधी

साल 1982 में आई रिचर्ड एटनबरो की यह फिल्म गांधी पर बनी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। इसमें बेन किंग्सले ने गांधी की भूमिका निभाई थी। फिल्म गांधी की हत्या और अंतिम यात्रा से शुरू होती है। फिर कहानी करीब 50 साल पीछे दक्षिण अफ्रीका पहुंचती है। 

वहां एक युवा वकील के रूप में गांधी के नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष से कहानी आगे बढ़ती है और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन तक पहुंचती है। फिल्म में सत्याग्रह, जेल यात्रा, अमृतसर कांड, नमक मार्च और आजादी के संघर्ष जैसे बड़े घटनाक्रमों को जगह मिली। खास बात ये है कि इस फिल्म को आठ ऑस्कर मिले थे।
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सरदार फिल्म - फोटो : सोशल मीडिया
सरदार
साल 1993 में आई 'सरदार' मुख्य रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल की कहानी है। लेकिन इसमें गांधी भी एक महत्वपूर्ण किरदार है। फिल्म में पटेल और गांधी के राजनीतिक रिश्ते को विस्तार से दिखाया गया है। इस वजह से गांधी को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिसके साथ पटेल का गहरा राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध था।

द मेकिंग ऑफ द महात्मा
साल 1996 में आई श्याम बेनेगल की यह फिल्म गांधी की जिंदगी का वह हिस्सा दिखाती है, जिसे अक्सर छोटी-सी झलक में खत्म कर दिया जाता है... दक्षिण अफ्रीका में बिताए उनके 21 साल। फिल्म 1893 से 1914 के बीच के समय पर केंद्रित है। 

रजित कपूर ने फिल्म में गांधी की भूमिका निभाई। यह फिल्म फातिमा मीर की किताब 'द अप्रेंटिसशिप ऑफ ए महात्मा' पर आधारित थी। फिल्म में गांधी को शुरुआत से ही महान या संपूर्ण व्यक्ति के रूप में नहीं दिखाया गया। वह सीखते हैं, गलतियां करते हैं और धीरे-धीरे अपने विचारों को विकसित करते हैं। 
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हे राम - फोटो : एक्स
हे राम
साल 2000 में आई इस फिल्म को कमल हासन ने डायरेक्ट किया है। फिल्म की कहानी पारंपरिक गांधी बायोपिक नहीं है। कहानी 'साकेत राम' नाम के एक व्यक्ति की है, जिसकी जिंदगी विभाजन और सांप्रदायिक हिंसा से बदल जाती है। फिल्म में गांधी की हत्या और उस समय के सांप्रदायिक माहौल को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। गांधी की भूमिका नसीरुद्दीन शाह ने निभाई।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर
साल 2000 में आई जबर पटेल की इस फिल्म का केंद्र डॉ. आंबेडकर का जीवन और जाति व्यवस्था के खिलाफ उनका संघर्ष है, लेकिन इसमें महात्मा गांधी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। फिल्म गांधी और आंबेडकर के बीच मौजूद वैचारिक मतभेदों को भी सामने लाती है।
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लगे रहो मुन्ना भाई का सीन - फोटो : इंस्टाग्राम @duttsanjay
लगे रहो मुन्ना भाई
साल 2006 में आई राजकुमार हिरानी की 'लगे रहो मुन्ना भाई' शायद गांधी की विचारधारा को लोकप्रिय संस्कृति में नए तरीके से वापस लाने वाली सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है।

यह बायोपिक नहीं है। कहानी एक गैंगस्टर मुन्ना भाई की है, जिसे गांधी दिखाई देने लगते हैं। वह गांधी के सिद्धांतों को अपने रोजमर्रा के जीवन में लागू करने की कोशिश करता है।

गांधी, माई फादर
साल 2007 में आई इस फिल्म का निर्देशन फिरोज अब्बास खान ने किया था और इसे अनिल कपूर ने प्रोड्यूस किया था। यह फिल्म गांधी और उनके बड़े बेटे हरिलाल गांधी के रिश्ते पर केंद्रित है। यह चंदूलाल दालाल की हरिलाल गांधी की जीवनी पर आधारित थी।

हरिलाल की अपनी महत्वाकांक्षाएं थीं। वह अपने पिता की तरह विदेश जाकर पढ़ना और बैरिस्टर बनना चाहता था। लेकिन गांधी की प्राथमिकताएं धीरे-धीरे राष्ट्रीय आंदोलन और उनके सिद्धांतों की तरफ बढ़ती गईं।

गांधी गोडसे: एक युद्ध
राजकुमार संतोषी की साल 2023 में आई फिल्म ने गांधी को एक अलग और काल्पनिक नजरिए से पर्दे पर पेश किया। फिल्म की कहानी इस कल्पना पर आधारित है कि 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे की गोली से गांधी की मौत नहीं होती। 

इसके बाद गांधी और गोडसे के बीच विचारों की बहस और टकराव को कहानी का केंद्र बनाया गया है। फिल्म में गांधी की भूमिका दीपक अंतानी ने और गोडसे की भूमिका चिन्मय मांडलेकर ने निभाई।
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