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इस साल मुंह के बल गिरीं ये सीक्वल फिल्में

Fri, 03 Jun 2016 10:36 AM IST
संजय मिश्रा/ बीबीसी संवाददाता, मुंबई
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फिल्म 'क्या कूल है हम 3' का पोस्टर
इस साल रिलीज़ हुई फ्रेंचाइजी फिल्में टिकट खिड़की पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाईं। साल 2016 में आधा दर्जन सीक्वेल फिल्में रिलीज हुईं, जिन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। आगे पढ़िये आखिर क्यों फ्लाप हो रहीं हैं ये फिल्में..
 
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मुंह के बल गिरीं ये सीक्वल फिल्में

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'घायल वंस अगेन' फिल्म के एक दृश्य में सनी देओल
‘क्या कूल हैं हम 3’, ‘तेरा सुरूर’, 'जय गंगाजल', ‘घायल वंस अगेन’, 'तेरे बिन लादेन डेड ऑर अलाइव' और '1920 लंदन' सरीखी फ्रेंचाइजी फिल्में रिलीज तो हुईं, लेकिन इनका बॉक्स आफिस कलेक्शन निराशाजनक रहा।

जाने-माने फिल्म विश्लेषक और लेखक जयप्रकाश चौकसे कहते हैं, "इस साल रिलीज हुई इन तमाम फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल रहा।" वे बताते हैं कि फिल्म 'क्या कूल हैं हम' और 'घायल वंस अगेन' ने बेशक अपनी लागत निकाल ली थी, लेकिन कमाई के मामले में कोई मापदंड नहीं स्थापित कर पाई।
 
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'तेरा सुरूर' फिल्म का पोस्टर
फिल्म विश्लेषक चौकसे बताते हैं, "इन फिल्मों के वितरकों को काफी नुकसान हुआ है।'' वे हिमेश रेशमिया की 'तेरा सुरूर' को भी बेहद खराब फिल्म मानते हैं। निर्देशक प्रकाश झा की 'जय गंगाजल' के बारे में वे कहते हैं, ''प्रकाश अपने फार्मूले में कैद हो गए हैं। वे फिल्म में समस्या तो उठाते हैं, लेकिन उसका निदान नहीं दिखाते।''

वे आगे कहते हैं कि झा की पहली फिल्म 'गंगाजल' मजबूत पटकथा और बोल्ड थी, लेकिन इस बार पूरा काम सतही तौर पर हुआ था।

मुंह के बल गिरीं ये सीक्वल फिल्में

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'घायल वंस अगेन' फिल्म का पोस्टर
सनी देओल की 'घायल वंस अगेन' लागत निकालने में कामयाब तो रही, लेकिन सफ़लता का परचम नहीं फहरा सकी। चौकसे इसकी वजह छोटे शहरों में देओल परिवार की प्रसिद्धि को बताते हैं।

'तेरे बिन लादेन' के पहले भाग में पूरी तरह नवीनता के चलते फिल्म काफी पसंद की गई, लेकिन असल जिंदगी में लादेन की मौत के बाद दूसरे भाग का बनना बेतुका था।
 
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मुंह के बल गिरीं ये सीक्वल फिल्में

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फिल्म '1920 लंदन' का पोस्टर
यह फिल्म पूरी तरह घाटे का सौदा साबित हुई थी। विक्रम भट्ट की '1920 लंदन' में भी घाटा हुआ। इसके बावजूद फिल्म का अगला सीक्वेल बनाने की बातें चल रही हैं। आखिर असफल होने के बाद भी निर्माता सीक्वेल क्यों बना रहे हैं?
इसते जवाब में चौकसे कहते हैं, ''निर्माता-निर्देशकों की कल्पना शक्ति उनका साथ नहीं दे रही है। तभी तो वो सफलतापूर्वक बिके ब्रांड की कीमत के सहारे आगे बढ़ना चाह रहें हैं।''
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मुंह के बल गिरीं ये सीक्वल फिल्में

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फिल्म 'मस्तीजादें' का एक दृश्य
वे आगे कहते हैं कि निर्माता-निर्देशकों के पास मौलिक कहानियां नहीं है। अब देखते हैं कि पुरानी कहानी को रबर की तरह खींचने का काम कब तक चलेगा? फिल्मकारों को सलाह देते हुए वे कहते हैं कि कोई भी सीक्वेल ओरिजिनल फिल्म के मुकाबले कम से कम डेढ़ गुना अच्छा और रोचक होना चाहिए।

फिल्म समीक्षक और लेखक रवि बुले बताते हैं, ''इन फिल्मों की वजह से साल 2016 में अब तक डिस्ट्रीब्यूटर को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।''
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फिल्म 'जय गंगाजल' के प्रमोशन के मौके पर प्रकाश झा के संग प्रियंका चोपड़ा
फिल्म समीक्षक और लेखक रवि बुले कहते हैं, "फिल्म का सारा खेल कहानियों का होता है और बिना अच्छी कहानी के फिल्मों की फ्रेंचाइजी पर काम ही नहीं होना चाहिए।''

आने वाले महीनों में भट्ट कैम्प की 'राज़ रिबूट', साजिद नाडियाडवाला की मल्टीस्टारर 'हाउसफुल 3', इंद्र कुमार की 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती', फिरोज नाडियाडवाला फिल्म्स की 'हेरा फेरी 3', फरहान अख्तर की 'रॉक ऑन 2', सुजॉय घोष की 'कहानी 2' और अनुभव सिन्हा की 'तुम बिन 2' रिलीज होंगी।
 
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