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Soumitra Chatterjee: दादा साहब फाल्के पुरस्कार तक ऐसे पहुंचा सौमित्र का सफर, जानिए 10 फिल्मों के बारे में

Fri, 15 Nov 2024 11:21 AM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

सौमित्र चटर्जी बंगाली फिल्मों के ऐसे महान कलाकार हुए, जिन्होंने अपना पूरा जीवन अभिनय को समर्पित कर दिया। आज सौमित्र चटर्जी की पुण्यतिथि (15 नवंबर 2020) है। इस मौके पर उनकी 10 बड़ी फिल्मों पर एक नजर। 
 
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सौमित्र चटर्जी - फोटो : सोशल मीडिया
सौमित्र चटर्जी को बतौर कलाकार उनके प्रशंसक आज भी पसंद करते हैं, साथ ही उन्हें बतौर लेखक, कवि और नाटककार के रूप में भी याद किया जाता है। सौमित्र ने अधिकतर बंगाली फिल्मों में अभिनय किया, साथ ही वह चुनिंदा हिंदी फिल्मों में भी नजर आए। अपने अभिनय के लिए, सिनेमा में दिए गए योगदान के लिए उन्हें 2012 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सौमित्र ने सबसे ज्यादा काम निर्देशक सत्यजीत राय (सत्यजीत रे) के साथ किया वह उनकी 14 उम्दा फिल्मों का हिस्सा रहे। सौमित्र चटर्जी ने अपने अभिनय के सफर में कई फिल्में कीं, उन्हीं में से 10 बड़ी फिल्मों के बारे में, जानिए। 
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फिल्म 'अपुर संसार (1959)' - फोटो : सोशल मीडिया
अपुर संसार 
अपने अभिनय करियर की शुरुआत सौमित्र चटर्जी ने बंगाली फिल्म 'अपुर संसार (1959)' से की, इस फिल्म को द वर्ल्ड ऑफ अप्पू के नाम से भी जाता जाता है। इस फिल्म के निर्देशक, निर्माता और लेखक सत्यजीत राय रहे। यह फिल्म एक चर्चित उपन्यास 'अपराजितो' के दूसरे भाग पर आधारित रही है। जब फिल्म रिलीज हुई, तो आलोचकों ने इसे खूब सराहा, साथ ही इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। इस फिल्म में किए अपने उम्दा अभिनय के कारण सौमित्र चटर्जी के लिए फिल्मी दुनिया के रास्ते खुल गए।  
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फिल्म 'देवी' - फोटो : सोशल मीडिया
देवी 
साल 1960 में फिल्म 'देवी' रिलीज हुई। यह फिल्म निर्देशक सत्यजीत की ही रही। इसमें सौमित्र ने शर्मिला टैगोर के साथ अभिनय किया। इस फिल्म की कहानी प्रभात कुमार मुखोपाध्याय की एक लघु कथा पर आधारित है। फिल्म की कहानी अति अंधविश्वास को बखूबी बयां करती है। 

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फिल्म 'अभिजान' - फोटो : सोशल मीडिया
अभिजान 
साल 1962 में सौमित्र ने एक और फिल्म 'अभिजान' निर्देशक सत्यजीत राय के साथ की। इसमें उन्होंने एक टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाई, जो कि बहुत ही घमंडी और गुस्सैल किस्म का व्यक्ति होता है। इस फिल्म के किरदार और कहानी के साथ सौमित्र ने पूरा न्याय किया, उन्होंने अपने किरदार को बहुत ही शानदार तरीके से निभाया।  
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फिल्म 'घरे बाइरे' - फोटो : सोशल मीडिया
घरे बाइरे 
1962 से लेकर 1984 तक सौमित्र ने कई और फिल्में की, लेकिन 1984 में उन्होंने सत्यजीत राय की ही एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म घरे बाइरे की। यह फिल्म रवींद्रनाथ टैगोर के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित रही। इसमें सौमित्र के साथ विक्टर बनर्जी, स्वातिलेखा चटर्जी और जेनिफर केंडल जैसे उम्दा कलाकार भी नजर आए। फिल्म की कहानी राष्ट्रवाद, महिला मुक्ति, परंपरा बनाम आधुनिकता जैसे मुद्दों को उठाती है। 
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फिल्म 'गणशत्रु'-'लाठी' - फोटो : सोशल मीडिया
गणशत्रु-लाठी
'गणशत्रु' नाम की एक फिल्म 1989 सत्यजीत राय ने बनाई, इसमें भी मुख्य भूमिका में सौमित्र चटर्जी को ही लिया। यह फिल्म हेनरिक इबसेन के 1882 के नाटक एनिमी ऑफ द पीपल का रूपांतरण है। इसको 1989 के कान फिल्म समारोह में दिखाया गया था। 'लाठी (1996)' फिल्म में मुख्य भूमिका तो विक्टर बनर्जी की रही, लेकिन इसमें सौमित्र चटर्जी ने विक्टर बनर्जी के दोस्त का एक अहम रोल निभाया। इस फिल्म के निर्देशक प्रभात रॉय रहे। फिल्म एक सामान्य व्यक्ति के संघर्ष की कहानी कहती है। 
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फिल्म 'शेष चिट्ठी'-'शेशर गोलपो' - फोटो : सोशल मीडिया
शेष चिट्ठी-शेशर गोलपो 
'शेष चिट्ठी' (2018) फिल्म तन्मय रॉय ने बनाई। इसमें सौमित्र चटर्जी और लिली चक्रवर्ती अहम भूमिकाओं में नजर आए। फिल्म की कहानी परिवार के चालाक सदस्यों के बारे में है, जो घर के मुखिया की मृत्यु के बाद उनकी जमीन-जायदाद को संभालने की योजना बनाते हैं। 2019 में आई फिल्म 'शेशर गोलपो' में सौमित्र चटर्जी और ममता शंकर मुख्य भूमिका में नजर आए। यह फिल्म रवीन्द्रनाथ टैगोर के 1929 के प्रसिद्ध उपन्यास शेशेर कबिता से प्रेरित रही, यह फिल्म उसी उपन्यास का विस्तार थी। फिल्म में एक वृद्ध जोड़े की प्रेम कहानी को एक युवा जोड़े के समानांतर दिखाया जाता है।
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फिल्म 'बोरुनबाबुर बंधु'-'बेलाशुरू' - फोटो : सोशल मीडिया
बोरुनबाबुर बंधु-बेलाशुरू
साल 2019 में रिलीज हुई 'बोरुनबाबुर बंधु' फिल्म रामपद चौधरी द्वारा लिखी गई एक बंगाली कहानी 'छड़' पर आधारित है। यह एक बुजुर्ग आदमी की कहानी है। अचानक उसे पता चलता है कि उसका एक वीवीआईपी दोस्त उससे मिलने आ रहा है। फिल्म में सौमित्र चटर्जी ने बुजुर्ग व्यक्ति की भूमिका निभाई है। इस फिल्म ने रिलीज वाले साल में कई पुरस्कार भी अपने नाम किए। 2022 में 'बेलाशुरू' फिल्म रिलीज हुई, इसमें सौमित्र चटर्जी ने मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म उनकी मृत्यु के उपरांत रिलीज हुई, इसलिए इसे उनकी आखिर फिल्म माना गया। फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की रही, जिसकी पत्नी अल्जाइमर रोग के कारण उसे पहचान नहीं पाती है। वह अपनी पत्नी की पूरी देखभाल करता है, साथ ही कोशिश करता है कि वह उसे पहचान सके। फिल्म की कहानी इस स्टोरी लाइन पर बनाई गई है। 
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