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Childrens Day: मासूमियत से कभी हंसाया तो कभी रुलाया, समाज को सच का आईना दिखाती हैं बच्चों पर बनीं ये फिल्में

Thu, 14 Nov 2024 10:09 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

रंग-बिरंगी और बोल्ड फिल्मों के बीच बच्चों व स्टूडेंट के लिए भी कहानियां बुनी गईं। इन फिल्मों ने बच्चों का मनोरंजन किया तो दूसरी ओर सभी को गंभीर संदेश भी दिया।
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बॉलीवुड फिल्में - फोटो : इंस्टाग्राम
बॉलीवुड इंडस्ट्री ने एक लंबा सफर तय कर लिया है। इस दौरान बॉलीवुड ने कई सुपरस्टार दिए हैं और तरह-तरह की फिल्में। यहां हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। रंग-बिरंगी और बोल्ड फिल्मों के बीच बच्चों व स्टूडेंट के लिए भी कहानियां बुनी गईं। इन फिल्मों ने बच्चों का मनोरंजन किया तो दूसरी ओर सभी को गंभीर संदेश भी दिया। आज हम ऐसी ही कुछ मूवीज का जिक्र करेंगे, जिन्हें खासतौर पर स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर बनाया गया।
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फिल्म 'तारे जमीन पर' - फोटो : इंस्टाग्राम
तारे जमीन पर
इस फिल्म के लिए आमिर खान के हौंसले की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘तारे जमीन पर’ एक बच्चे को केन्द्र में रखकर बनाई और बिना बॉक्स ऑफिस की चिंता किए पर्दे पर उतारा। इस फिल्म के जरिए उन्होंने बच्चों के भीतर झांकने की कोशिश की। फिल्म आठ साल के ईशान दर्शील सफारी की कहानी बताती है, जो मानसिक रूप से अपने परिवार के लिए पीड़ित होता है। बच्चे की पहचान शिक्षक रामशंकर निकुंभ करते हैं। फ़िल्म को लोगों ने काफी पसंद किया था।
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'चिल्लर पार्टी' - फोटो : इंस्टाग्राम
चिल्लर पार्टी
चिल्लर पार्टी एक बच्चों के गैंग की कहानी है जो बहुत मासूम हैं। उन्हें कोई चिंता नहीं है और मस्त जिंदगी जीते हैं। चंदन नगर कॉलोनी में ये सब रहते हैं। जल्दी ही इनका गैंग में फटका और भीड़ू भी शामिल हो जाते हैं और इनकी दोस्ती अधिक मजबूत हो जाती है। बच्चों की टीम में तब समस्या उत्पन्न हो जाती है, जब भीड़ू की जिंदगी एक नेता की वजह से खतरे में आ जाती है। ये घबराते नहीं हैं और मिलकर लड़ने का फैसला करते हैं। फिल्म ये साबित करती है कि छोटे बच्चे चाहें तो किसी को भी धूल चटा सकते हैं।

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फिल्म 'स्टेनली का डब्बा' - फोटो : यूट्यूब @FoxRecaps
स्टेनली का डब्बा
इस फिल्म में फोकस चौथी क्लास के बच्चों पर है। कक्षा में स्टेनली बहुत ही बुद्धिमान और मेहनती है और पूरे क्लास के बच्चों का चहीता भी। स्टेनली किसी वजह से अपना टिफिन नहीं ला पाता। उधर हिंदी के टीचर वर्माजी बच्चों के खाने पर नीयत लगाए रहते हैं। बच्चे अपने टिफिन से स्टेनली को तो खिलाना चाहते हैं, पर वर्मा सर को नहीं। पूरी फिल्म का सार यही है कि शिक्षक ने दूसरे के टिफिन में से खाने पर बच्चे को डांट लगाकर भगाया और अब खुद वही कर रहे हैं। बड़ों की कथनी और करनी के अंतर को बच्चे बहुत साफ तरीके से देखते और महसूस करते हैं।
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फरारी की सवारी - फोटो : इंस्टाग्राम: @primevideo
फरारी की सवारी
इस फिल्म को खेल के दृष्टिकोण से बनाया गया है। रूसी के बेटे कायो का सपना है कि वह एक दिन बड़ा क्रिकेट खिलाड़ी बनेगा। आरटीओ में क्लर्क होने के बावजूद रूसी के पास पैसे की तंगी हमेशा बनी रहती है। क्योंकि, वह ईमानदार रहता है। पैसे की तंगी के बीच जूझकर हताशा में वह कहता है कि हम जैसे लोगों को तो सपने नहीं देखने चाहिए। बेटे के सपने को पूरा करने की जद्दोजहद में वह न चाहते हुए भी गलत काम कर बैठता है, जिसके कारण कई परेशानियों से घिर जाता है।
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बम बम बोले - फोटो : इंस्टाग्राम
बम बम बोले
बम बम बोले वर्ष 2010 में रिलीज बॉलीवुड ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। फिल्म में दर्शील सफारी, जिया वास्तानी, अतुल कुलकर्णी, ऋतुपर्णा सेनगुप्ता आदि मुख्य भूमिका में नजर आये थे। फिल्म की कहानी दो भाई-बहन के ऊपर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक गरीब मां बाप के बच्चे होशियार होते हैं और परिवार के दुख में अच्छा साथ निभाते हैं।
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स्लमडॉग मिलियनेयर - फोटो : ANI
स्लमडॉग मिलियनेयर
यह पिक्चर झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों पर फिल्माई गई है, जो दो भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है। वो बचपन में दंगों के दौरान अनाथ और बेघर हो गएl थे। दोनों ने तरह-तरह के बुरे लोगों और कई मुश्किलों का सामना किया। फिल्म में दिखाया गया हैै कि गलत रास्ते पर चलने वाले का अंजाम हमेशा गलत ही होता है।

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फिल्म 'आई एम कलाम' - फोटो : इंस्टाग्राम
आई एम कलाम
यह फिल्म छोटू नाम के 12 साल के बुद्धिमान लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है। गरीबी और अभाव में रहने के बावजूद छोटू हर तरह के हालातों से प्रसन्नतापूर्वक जूझता है। अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए उसे सड़क के किनारे छोटे से होटल में काम करता है और शाम को पढ़ाई करता है। एक दिन छोटू भारत के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को टेलीविजन पर देखता है और उनसे काफी प्रेरित होता है। वह अपना नाम बदलकर कलाम रख लेता है और यह निश्चय करता है कि वह एक ऐसा व्यक्ति बनेगा जो टाई पहनता है और जिसका दूसरे लोग सम्मान करेंगे।
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इकबाल - फोटो : इंस्टाग्राम
इकबाल
यह फिल्म एक गूंगे और बहरे लड़के की कहानी है, जो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए क्रिकेट खेलने का सपना देखता है। उसके पास कोई सुविधा नहीं होती। उसके पिता भी उसके क्रिकेट खेलने का बहुत विरोध करते है, लेकिन वह हार नहीं मानता और अपने सपने को पूरा करके रहता है।
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